Delhi Court on Brij Bushan Sharan Singh: दिल्ली की कोर्ट ने हाल ही में पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया. कोर्ट ने आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत होने के साथ-साथ गहरी साजिश का हिस्सा बताया और साथ ही कहा कि ये राजनीतिक रूप से प्रेरित भी लगते हैं. कोर्ट ने पाया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप रिहर्सल या कहें बार-बार अभ्यास करके लगाए गए और ये मनगढ़ंत प्रतीत हो रहे थे. राउज़ एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पवार ने पिछले सोमवार को न केवल बृजभूषण बल्कि पूर्व डब्ल्यूएफआई सहायक सचिव विनोद तोमर को भी इस मामले में बरी करने का आदेश सुनाया. बता दें कि ये टिप्पणियां आदेश की प्रति में दर्ज की गई हैं, जिसे अभी तक अदालत ने सार्वजनिक नहीं किया.
NDTV को पता चला है कि कोर्ट ने आदेश में कहा कि ये आरोप हरियाणा के रोहतक स्थित कुश्ती ट्रेनिंग सेंटर महादेव अकादमी में एक महिला और एक पुरुष पहलवान के साथ-साथ कोचों ने सामूहिक रूप से लगाए थे.अदालत ने अभियोजन पक्ष के एक गवाह का हवाला देते हुए कहा कि रिकॉर्ड से जो बात सामने आई है, वह यह है कि धरने पर बैठने से पहले गवाह संख्या 5 ने यौन उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं लगाया था और न ही किसी महिला पहलवान का नाम लिया गया था, जिसने कथित तौर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया हो. फिर अचानक सेलेक्टेड महिला पहलवान सामने आईं और उन्होंने बड़े ही 'फैंसी' तरीके से तैयार की गई शिकायतों में इन आरोपों में शामिल कर लिया और 21 अप्रैल 2023 को पुलिस के सामने केस दर्ज करवाया गया.अदालत ने उन दो पहलवानों के बयानों पर भी भरोसा किया, जिन्होंने शुरू में यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी, लेकिन बाद में अपने बयान बदल दिए, कोर्ट ने उनके बयानों को अधिक विश्वसनीय पाया.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिन पांच पीड़ितों के आरोपों पर आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए थे, उनमें से दो तो बयान से मुकर गईं. उन्होंने कहा कि गवाह संख्या 5 और 10 के कहने पर आरोप लगाने को मजबूर किया गया था.इसके साथ ही अभियोजन पक्ष ने ऐसा कुछ भी साबित नहीं किया इन दोनों पीड़ितों ने आरोपी के दबाव में या किसी और वजह से आरोपों का समर्थन नहीं किया.
राजधानी की निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों के पैटर्न में भी समानताएं प्रतीत होती हैं. कथित घटनाएं उस समय की बताई गईं जब पीड़िताएं एक टूर्नामेंट में भाग ले रही थीं और ये घटनाएं कथित तौर पर उस स्थान पर हुईं जहां खिलाड़ियों के परिवार और दोस्तों सहित बड़ी संख्या में लोग जमा थे.कोर्ट ने ये भी बताया कि ये आरोप आश्चर्यजनक रूप से समान थे और एक ही समय पर एक ही स्थान पर लगाए गए थे, जो आरोपी के खिलाफ सुनियोजित साजिश का संकेत देते हैं.
पिछले सोमवार को कार्यवाही के दौरान चार महिलाओं की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने बरी होने के फैसले को "बेहद परेशान करने वाला" बताया था.वहीं कोर्ट से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने कहा था कि अगर आरोप सही साबित हुए तो वह खुद को फांसी लगा लेंगे. मुझे बहुत खुशी है कि मुधे बरी कर दिया गया. ये मेरे लिए और मेरे समर्थकों के लिए अच्छी खबर है. मैं इससे ज्यादा और कुछ नहीं कह सकता.
बीजेपी के अमित मालवीय ने उठाया सवाल
कोर्ट के फैसले को लेकर बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सवाल उठाया कि दिल्ली अदालत के फैसले से एक सीधा सवाल उठता है: जानबूझकर झूठे आरोप लगाने वालों और राजनीतिक वर्ग के उन लोगों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने जानबूझकर एक व्यक्ति, एक संघ और सरकार को बदनाम करने के लिए रची गई साजिश के तहत इन आरोपों को हवा दी? आप आरोपों को हथियार नहीं बना सकते, मीडिया ट्रायल नहीं कर सकते, प्रतिष्ठा को नष्ट नहीं कर सकते और फिर न्यायिक जांच में मामला खारिज होने पर यूं ही बच नहीं सकते.
क्या था मामला
गौरतलब है कि ये आरोप अप्रैल-मई 2023 में सामने आए जब महिला पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और बृजभूषण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. 36 दिनों तक चले इस प्रदर्शन में शीर्ष महिला पहलवानों के साथ बजरंग पुनिया भी प्रमुख चेहरा थे.
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