- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली आने के लिए दो एक जैसे एयरक्राफ्ट ने एक साथ उड़ान भरी
- पुतिन के फ्लीट में दो IL-96-300PU मॉडल के एयरक्राफ्ट शामिल हैं, जो एक जैसे रंग और डिजाइन के होते हैं
- दोनों विमान एक साथ उड़ान भरते हैं, लेकिन पुतिन किस विमान में हैं इसका पता केवल सुरक्षा एजेंसियों को होता है
भारत में आयोजित हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन के लिए रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं. पुतिन इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच रूस से दिल्ली पहुंचे कि किसी को ये पता तक नहीं चला कि वह बैठे किस विमान में थे. उनके एयरक्राफ्ट की सुरक्षा देख हर कोई हैरान था. वजह थी उनके फ्लीट में हूबहू एक जैसे दो एयरक्राफ्ट्स का शामिल किया जाना. विमानों का सिर्फ मॉडल ही नहीं उनका रंग और डिजाइन भी एक जैसा था. बाहर से कोई ये समझ ही नहीं सकता कि पुतिन कौन से विमान में बैठे हैं. उनकी सुरक्षा के लिए रूस की ये खास ट्रिक है, जिसे दुश्मन के लिए भी भेद पाना नामुमकिन सा है.
व्लादिमीर पुतिन का खास एयरक्राफ्ट
पुलिस ने मॉस्को से अपने सहयोगियों के साथ IL-96-300PU मॉडल के इन दोनों एयरक्राफ्ट में भारत के लिए उड़ान भरी. अब आप सोच रहे होंगे कि पुतिन के फ्लीट में एक जैसे दो विमान क्यों रखे गए और पुतिन इन में से कौन से एयरक्राफ्ट में थे तो इसका जवाब या तो पुतिन दे सकते हैं या फिर उनकी सुरक्षा एजेंसियां. दरअसल ये कदम उाया ही इसलिए गया था कि किसी को ये पता ही न चले कि पुतिन किस एयरक्राफ्ट से भारत पहुंचे. ये कदम उनकी सिक्योरिटी को देखते हुए उठाया गया था.
पुतिन के फ्लीट में एक जैसे दो एयरक्राफ्ट
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन के फ्लीट में एक जैसे दो एयरक्राफ्ट शामिल करना मॉस्को की सुपर सीक्रेट सिक्योरिटी ट्रिक है. इसे दुनियाभर में ‘डिकॉय फ्लाइट' कहा जाता है. इसका मतलब है एक रियल और दूसरा नकली एयरक्राफ्ट. खास बात यह है कि दोनों एयक्राफ्ट एक साथ उड़ान भरते हैं. लेकिन पुतिन इनमें से एक में होते हैं, लेकिन कौन से विमान में ये कोई नहीं जानता, सिवाय उनकी सिक्योरिटी एजेंसियों के.
डबल शील्ड प्रोटोकॉल की ड्रिल नई नहीं
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा के लिए डबल शील्ड प्रोटोकॉल रूस की कोई नई ट्रिक नहीं है. मॉस्को की सुरक्षा एजेंसियां पहले भी इस ट्रिक का इस्तेमाल करती रही हैं. दुश्मन अगर हमला करना भी चाहे तो पहले तो उसे ये पता लगाना पड़ेगा कि पुतिन आखिर हैं किस विमान मे, जो कि मुश्किल टास्क है. क्यों कि दोनों एयरक्राफ्ट का सिग्नल हर कुछ मिनट में ऑन-ऑफ होता है. रडार पर एक साथ दोनों दिखते ही नहीं हैं.
कितना खास है पुतिन का विमान?
खास बात यह है कि दोनों ही एयक्राफ्ट एक साथ उड़ते हैं, कभी एक का रडार सिग्नल बंद होता है तो कभी दूसरे एयरक्राफ्ट का. दोनों विमान बीच-बीच में गायब भी हो जाते हैं, पता ही नहीं चलता है कि ये कहां उड़ रहे हैं. रूस की सिक्योरिटी एजेंसी ने पुतिन की सुरक्षा के लिए ये दम यूक्रेन संग युद्ध और यूरोपीय देशों की नाराजगी को देखते हुए उठाया है.
डिकॉय ड्रिल वाली ट्रिक जानें
पुतिन जब कजाकिस्तान पहुंचे थे तब भी आसमान में उनके दोनों एयरक्राफ्ट के बीच डिकॉय ड्रिल शुरू हुई थी. फ्लाइट ट्रैकर में दोनों एयरक्राफ्ट एक ही स्पीड में और एक ही जगह बहुत ही थोड़े फासले से उड़ते दिखाई दिए थे. एक का नाम था RSD221, दूसरे का नाम RSD369. ये पता कर पाना बहुत मुश्किल था कि पुतिन कौ से विमान में बैठे हैं.
पुतिन के IL-96 एयरक्राफ्ट की खासियत जानें
रूसी राष्ट्रपति का एयरक्राफ्ट कोई आम विमान नहीं है.पुतिन इसमें बैठकर ही दुनिया के किसी भी कोने से देश की न्यूक्लियर ताकत को कंट्रोल कर सकते हैं. मॉस्को के पास ऐसे एक नहीं बल्कि चार विमान हैं. ये एयरक्राफ्ट बहुत ही खास हैं. इनमें सैटेलाइट फोन, मिसाइल से बचाने वाली डिवाइस मे बहुत ही खास सुविधाएं हैं. पुतिन के एयरक्राफ्ट का फ्यूल टैंक इतना बड़ा है कि एक बार भरने पर 13 हजार किमी. तक बिना टेंशन के उड़ सकता है. बीच में कहीं भी लैंडिंग की जरूरत ही नहीं पड़ती है.
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