सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में पूरे देश का नाम रोशन करने वाली हरियाणा की बेटी ने ऐतिहासिक वापसी के पीछे का राज बताया है. भारतीय पहलवान मनीषा भानवाला ने बताया कि अपने कोचों के साथ मुश्किल मैचों की स्थितियों के लिए सालों तक की गई प्रैक्टिस ने उन्हें सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के फाइनल में 0-6 से पिछड़ने के बाद वापसी करने में मदद की. उन्होंने कजाकिस्तान के अस्ताना में महिलाओं के 59 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर एक ऐतिहासिक वापसी की.
सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं मनीषा ने कहा कि स्वर्ण पदक के मुकाबले में एबिगेल नेटो के खिलाफ 0-6 से पिछड़ने के बावजूद उन पर कोई मानसिक दबाव नहीं था, क्योंकि उन्होंने ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों के लिए पहले से ही काफी प्रैक्टिस की थी.
मनीषा ने बताया कि ऐसी स्थितियों के लिए उनकी तैयारी, खासकर आखिरी कुछ सेकंड में अंक हासिल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें मुकाबले का रुख बदलने और ऐतिहासिक जीत हासिल करने में मदद की. रविवार को SAI मीडिया द्वारा आयोजित एक बातचीत में मनीषा ने कहा, 'जब हम प्रैक्टिस करते हैं, तो हमारे कोच हमें ऐसी स्थितियां देते हैं जहां हमें 30 सेकंड के अंदर अंक हासिल करने होते हैं. हम इसी बात की प्रैक्टिस करते हैं. मैं लंबे समय से इसके लिए काम कर रही थी. मुझे ऐसी स्थितियों को संभालना था, इसलिए मैंने प्रैक्टिस की और इससे मुझे मदद मिली. वहां कोई मानसिक दबाव नहीं था.'
10 दिन में बदला पूरा प्लान
23 वर्षीय मनीषा ने एशियाई खेलों में मिली निराशा के बारे में भी बात की, जहां वह महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में कोई पदक नहीं जीत पाई थीं. हालांकि, उन्होंने बताया कि उन्होंने तुरंत अपना ध्यान वर्ल्ड चैंपियनशिप पर लगा दिया, जो ठीक 10 दिन बाद होने वाली थी.
उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगा था कि मैं एशियाई खेलों से बिना कोई पदक जीते वापस आऊंगी. मैंने जितनी कड़ी मेहनत की थी और जितनी प्रैक्टिस की थी, मुझे पूरा यकीन था कि मैं पदक जरूर जीतूंगी. मैं बहुत निराश थी. ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन जो हो गया, मैं उस पर ध्यान नहीं देती. मैं आगे आने वाली चीजों पर विश्वास रखती हूं.'
उन्होंने आगे कहा, 'मेरे पास 10 दिन थे, इसलिए मैंने अपना पूरा ध्यान वर्ल्ड चैंपियनशिप पर लगाया. उन 10 दिनों में मैंने अपनी कमियों पर काम किया. तो हां, इससे मुझे काफी मदद मिली.' मनीषा ने अस्ताना में 59केजी कैटेगरी में हिस्सा लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि दो प्रतियोगिताओं के बीच कम समय होने की वजह से 57 केजी कैटेगरी में दोबारा उतरने के लिए अपना वजन मैनेज करना और रिकवर करना मुश्किल होगा.
57 केजी कैटेगरी पर फोकस
लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए, मनीषा ने बताया कि वह अगले साल होने वाले क्वालिफिकेशन इवेंट्स में 57 केजी कैटेगरी पर फोकस करेंगी, क्योंकि 59केजी कैटेगरी ओलंपिक प्रोग्राम का हिस्सा नहीं है. उन्होंने कहा, 'अगले साल होने वाले लॉस एंजिल्स क्वालिफायर्स के लिए, मैं 57केजी कैटेगरी में हिस्सा लेना चाहती हूं.'
उन्होंने 2027 में होने वाली चार रैंकिंग सीरीज प्रतियोगिताओं में भाग लेने के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि इससे उन्हें ओलंपिक क्वालिफिकेशन इवेंट्स की तैयारी में मदद मिलेगी.उन्होंने आगे कहा, 'हमारे लिए सबसे जरूरी बात चार रैंकिंग सीरीज में खेलना है. अगर हम इनमें हिस्सा लेते हैं, तो हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा, जिससे लॉस एंजिल्स क्वालिफायर्स आसान हो जाएंगे.'
इस पहलवान ने 'टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' (TOPS) से मिले सपोर्ट को भी स्वीकार किया, जिसमें वह 2024 से शामिल हैं. उन्होंने बताया कि आर्थिक मदद और इंटरनेशनल ट्रेनिंग कैंप्स में हिस्सा लेने के मौके ने उनके विकास में अहम भूमिका निभाई है.
हर महीने मिलती है पॉकेट मनी
मनीषा ने कहा, 'TOPS स्कीम के तहत हमें हर महीने पॉकेट मनी मिलती है. एक खिलाड़ी के लिए यह बहुत जरूरी है. कई चीजें काफी महंगी होती हैं, जिनका खर्च उठाना हमारे परिवार के लिए मुमकिन नहीं होता. उदाहरण के लिए, जब हम विदेशी कैंप्स में जाते हैं, तो TOPS हमें वहां पहुंचने में मदद करता है. हमें विदेशी खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस करने का मौका मिलता है, जिससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम बहुत कुछ सीख पाते हैं.'
उन्होंने यह भी बताया कि एशियन गेम्स में खराब प्रदर्शन के बावजूद TOPS ने उनका साथ नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें अपना पूरा ध्यान लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर लगाने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने कहा, 'मैं 2024 से TOPS का हिस्सा हूं. TOPS ने मुझे बहुत कुछ दिया है और वे हमेशा मेरा सपोर्ट करते हैं. एशियन गेम्स में मेडल न जीत पाने के बाद भी, उन्होंने मुझे लॉस एंजिल्स पर फोकस करने के लिए कहा. TOPS मुझे मेरी जरूरत की हर चीज मुहैया कराता है. इसके लिए मैं TOPS का धन्यवाद करती हूँ.'
एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप की तुलना करते हुए, मनीषा ने कहा कि दोनों ही प्रतियोगिताओं में मजबूत प्रतिद्वंद्वी होते हैं, इसलिए यह तय करना मुश्किल है कि कौन सी ज्यादा कठिन है. उन्होंने कहा, "कुश्ती में एशिया बहुत मजबूत है, और दुनिया भी मजबूत है. मैं तुलना कैसे कर सकती हूँ?
उन्होंने कहा कि, 'प्रतियोगिता तो प्रतियोगिता होती है. एशिया में भी बेहतरीन खिलाड़ी आते हैं और विश्व स्तर पर भी बेहतरीन खिलाड़ी आते हैं. लेकिन विश्व स्तर पर यूरोपीय खिलाड़ियों का पलड़ा थोड़ा भारी रहता है, जबकि एशिया में एशियाई देशों के खिलाड़ी होते हैं.' विश्व चैंपियनशिप में भारत ने कुल चार पदक जीते, जिनमें मनीषा का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक भी शामिल था. इसके अलावा, भारत ने दो रजत पदक और एक कांस्य पदक भी हासिल किया.
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