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Dhinidhi Desinghu: जिसे पानी से नफरत और ऊंचाई से लगता था डर, आज उसी बेटी ने ओलंपिक मंच पर रच दिया इतिहास

Dhinidhi Desinghu won bronze: युवा तैराक धिनिधि देसिंगु ने महिलाओं की 100 मीटर फ्रीस्टाइल इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपने शानदार सफर को जारी रखा. धिनिधि ने 56.27 सेकंड का समय लेकर तीसरा स्थान हासिल किया.

Dhinidhi Desinghu: जिसे पानी से नफरत और ऊंचाई से लगता था डर, आज उसी बेटी ने ओलंपिक मंच पर रच दिया इतिहास
Swimmer Dhinidhi Desinghu
X (formerly Twitter)

एक समय ऐसा था जब धिनिधि देसिंघु स्विमिंग पूल के आस-पास भी नहीं जाना चाहती थीं. उन्हें पानी में रहना बिल्कुल पसंद नहीं था, पानी के अंदर सिर डालने से डर लगता था और पूल में पैर रखने में भी उन्हें बहुत परेशानी होती थी. उन्होंने बताया कि उनकी मां कभी-कभी उन्हें धक्का देकर पानी में गिरा देती थीं.

दरअसल, सोमवार को, बेंगलुरु की 16 वर्षीय धिनिधि डकार में यूथ ओलंपिक के पोडियम पर खड़ी थीं. उन्होंने महिलाओं की 100 मीटर फ्रीस्टाइल इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता. वह सीनियर और यूथ, दोनों स्तरों पर ओलंपिक इवेंट में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय तैराक बन गईं.

56.27 सेकंड के साथ नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया

उन्होंने 56.27 सेकंड में दीवार को छूकर एक नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया. इससे पहले, 18 जून को अहमदाबाद में हुई इंडियन चैंपियनशिप में उन्होंने 56.57 सेकंड का समय निकाला था, जिसे उन्होंने अब और बेहतर कर दिया है. क्रोएशिया की एना बोबानोविच ने 55.89 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि न्यूजीलैंड की एलिसा लॉसन ने 56.13 सेकंड के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया.

27.31 सेकंड में पूरी की 50 मीटर की दूरी

उन्होंने बहुत शानदार तरीके से रेस पूरी करके यह मेडल जीता. रेस के आधे रास्ते (50 मीटर) तक देसिंघु पांचवें स्थान पर थीं, उन्होंने शुरुआती 50 मीटर की दूरी 27.31 सेकंड में पूरी की थी. लेकिन रेस के दूसरे हिस्से में उन्होंने अपनी रफ्तार बढ़ाई, पिछड़ते हुए भी वापसी की और तीसरे स्थान पर रहते हुए पोडियम पर अपनी जगह पक्की की.

'मेरी मां मुझे धक्का देकर पानी में डाल देती थीं,'

यह उस तैराक के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव है, जिसे कभी यह खेल बिल्कुल पसंद नहीं था. फाइनल से पहले Olympics.com से बात करते हुए, देसिंघु ने याद किया कि कैसे स्विमिंग के साथ उनका रिश्ता बदल गया. उन्होंने कहा, 'मेरी मां मुझे धक्का देकर पानी में डाल देती थीं. धीरे-धीरे मुझे यह खेल पसंद आने लगा. फिर मुझे इससे प्यार हो गया.' उन्होंने कहा कि, 'शुरुआत में, यह बहुत मुश्किल था. सच कहूं तो, मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं था. मैं पानी में जाना ही नहीं चाहती थी. मुझे पानी में रहना अच्छा नहीं लगता था. मुझे ऊंचाई से भी डर लगता था. मुझे बस स्विमिंग से नफरत थी.'

उन्होंने बताया कि, 'जैसे-जैसे समय बीतता गया, मैं जीतने लगी और मेरे दोस्त बनने लगे. इसी वजह से आज मैं एक तैराक के रूप में इस मुकाम पर पहुंच पाई हूं.' उनका सफर बहुत तेजी से आगे बढ़ा है. पेरिस 2024 ओलंपिक में जब डेसिंघु ने भारत का प्रतिनिधित्व किया, तब वह सिर्फ 14 साल की थीं और देश के दल की सबसे कम उम्र की सदस्य थीं. उन्होंने महिलाओं की 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में हिस्सा लिया और कुल मिलाकर 23वें स्थान पर रहीं, लेकिन उन्होंने इस अनुभव को जीतने के मौके के बजाय सीखने के एक अवसर के रूप में देखा.

फाइनल से पहले उन्होंने कहा, 'मैं कोशिश कर रही हूं कि इस बात को बहुत ज्यादा अपने दिमाग पर न लूं. मुझे पता है कि मैं बहुत गर्म मौसम में भी अच्छा प्रदर्शन करती हूं और मैं अपनी पसंदीदा रेस में हिस्सा ले रही हूं. इन बातों से दबाव थोड़ा कम हो जाता है.' उनके लिए, नर्वस होना हमेशा नुकसानदेह नहीं होता. 'थोड़ी घबराहट होना एक तरह से मददगार ही होता है.' 'यह एक तरह की अतिरिक्त ऊर्जा है जो आपमें होती है. मैं घबराहट को भी एक तरह से खुद में समाहित कर लेती हूं.'

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