रियो ओलिम्पिक 2016 में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पहलवान साक्षी मलिक (फाइल फोटो)
मुंबई:
रियो ओलिम्पिक में कांस्य पदक जीतने वाली महिला पहलवान साक्षी मलिक के शादी के लिए तैयार होने की ख़बर सुर्खियों में है, लेकिन साक्षी ने साफ कहा है कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान कुश्ती पर है, शादी की बात उनके अभिभावक तय करेंगे.
NDTV से ख़ास बातचीत में साक्षी मलिक ने कहा कि फिलहाल वह रेसलिंग की तैयारी कर रही हैं. 58 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी ने भरोसा जताया कि वह उम्मीदों के दबाव को पटखनी देने में कामयाब रहेंगी. उन्होंने कहा, "अब दबाव बढ़ रहा है... यह दोगुना और यहां तक कि तिगुना हो सकता है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इससे उबरने में सफल रहूंगी और टोक्यो में होने वाले 2020 ओलिम्पिक में अच्छा प्रदर्शन करूंगी..."
साक्षी उन खिलाड़ियों में शामिल थीं, जिन्हें खेलों से पहले पदक का दावेदार नहीं माना जा रहा था, क्योंकि सभी की निगाहें फोगट बहनों बबीता कुमारी और विनेश पर टिकी थीं. साक्षी ने हालांकि कहा कि वह पदक जीतने के प्रति आश्वस्त थीं.
जब प्रधानमंत्री ने कहा, "मारोगी तो नहीं..."
पदक जीतने के बाद साक्षी पर इनामो-इकराम की बारिश हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए साक्षी ने NDTV से कहा, "उन्होंने मुझसे पूछा, तुम कहां की हो, मैंने कहा, रोहतक से... तब उन्होंने हंसते हुए कहा, मारोगी तो नहीं, फिर बताया कि वह भी पांच साल हरियाणा में रह चुके हैं..."
अब पूजते हैं लोग...
इस मौके पर साक्षी ने यह भी बताया कि कैसे उन लोगों का नज़रिया बदला है, जो पहले महिलाओं को पहलवानी करते देख नाक-भौं सिकोड़ते थे. साक्षी ने कहा, मैंने बिल्कुल ऐसे नेचर बदलते नहीं देखा है आदमियों का. अब कई लोग अपनी बच्चियों को साथ लाकर कहते हैं, इसके सिर पर हाथ रख दो. लेकिन सिर पर हाथ रखने से क्या होगा, मैं उन्हें कुश्ती सिखा सकती हूं.
NDTV से ख़ास बातचीत में साक्षी मलिक ने कहा कि फिलहाल वह रेसलिंग की तैयारी कर रही हैं. 58 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी ने भरोसा जताया कि वह उम्मीदों के दबाव को पटखनी देने में कामयाब रहेंगी. उन्होंने कहा, "अब दबाव बढ़ रहा है... यह दोगुना और यहां तक कि तिगुना हो सकता है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इससे उबरने में सफल रहूंगी और टोक्यो में होने वाले 2020 ओलिम्पिक में अच्छा प्रदर्शन करूंगी..."
साक्षी उन खिलाड़ियों में शामिल थीं, जिन्हें खेलों से पहले पदक का दावेदार नहीं माना जा रहा था, क्योंकि सभी की निगाहें फोगट बहनों बबीता कुमारी और विनेश पर टिकी थीं. साक्षी ने हालांकि कहा कि वह पदक जीतने के प्रति आश्वस्त थीं.
जब प्रधानमंत्री ने कहा, "मारोगी तो नहीं..."
पदक जीतने के बाद साक्षी पर इनामो-इकराम की बारिश हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए साक्षी ने NDTV से कहा, "उन्होंने मुझसे पूछा, तुम कहां की हो, मैंने कहा, रोहतक से... तब उन्होंने हंसते हुए कहा, मारोगी तो नहीं, फिर बताया कि वह भी पांच साल हरियाणा में रह चुके हैं..."
अब पूजते हैं लोग...
इस मौके पर साक्षी ने यह भी बताया कि कैसे उन लोगों का नज़रिया बदला है, जो पहले महिलाओं को पहलवानी करते देख नाक-भौं सिकोड़ते थे. साक्षी ने कहा, मैंने बिल्कुल ऐसे नेचर बदलते नहीं देखा है आदमियों का. अब कई लोग अपनी बच्चियों को साथ लाकर कहते हैं, इसके सिर पर हाथ रख दो. लेकिन सिर पर हाथ रखने से क्या होगा, मैं उन्हें कुश्ती सिखा सकती हूं.
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