- भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में जल्द फेरबदल संभव है
- वर्तमान में मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं, जबकि संविधान के अनुसार अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं
- हाल ही में तीन मंत्रियों के इस्तीफे के बाद कैबिनेट में कई पद खाली हैं और नए नाम शामिल हो सकते हैं
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में अपनी नई टीम का गठन किया है. इस टीम के बाद पीएम नरेंद्र मोदी की टीम यानी कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है. चर्चा है कि अगले कुछ महीने में ही यह बदलाव संभव है. यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है, जब दिल्ली में हाल ही में जेन जी आंदोलन हुआ है. ऐसे में चर्चा यह भी है कि नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में क्या युवाओं की संख्या बढ़ सकती है. अभी सत्तर वर्ष से अधिक उम्र के 12 कैबिनेट और राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं. इसके अलावा 81 वर्ष के जीतन राम मांझी सबसे ज्यादा उम्र के कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि 38 वर्ष के के. राम मोहन नायडू सबसे युवा कैबिनेट मंत्री हैं.
पीएम नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की जब शुरुआत हुई थी, तब 65% से अधिक मंत्रियों की उम्र 51-70 वर्ष की थी. इसके 31-50 आयु समूह के 24% मंत्री थे. हाल ही में तीन मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दिया है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस्तीफ़ा दिया है. इस तरह अभी 29 कैबिनेट मंत्री, पांच राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्य मंत्री हैं. प्रधानमंत्री को मिला कर मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं. संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के तहत अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं. इस तरह 12 पद तो सीधे तौर पर खाली हैं. फिर फेरबदल में कौन जाएगा और किसे एंट्री मिलेगी, वह अलग है.
मंत्रिपरिषद के फेरबदल में कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है. जैसे दो राज्य मंत्रियों - हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा और पंकज चौधरी को यूपी भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का कोषाध्यक्ष भी बनाया गया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का राज्य सभा कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है. प्रदर्शन के आधार पर भी कुछ मंत्रियों को हटाया जा सकता है. आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र भी कुछ राज्यों से मंत्रियों की संख्या बदली जा सकती है. मंत्रिपरिषद में फेरबदल करते समय 2029 लोक सभा चुनाव को भी ध्यान में रखा जाएगा.
चर्चा यह भी है किए नए सहयोगी दलों को भी मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है. डीएमके, एनसीपी-एसपी, अकाली दल पर भी नजरें होंगी कि ये दल एनडीए में शामिल होंगे या नहीं. टीएमसी के बाग़ियों से बनी एनसीपीआई से मंत्री बनाए जाने की अटकलें भी लग रही हैं. आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए सात राज्य सभा सांसदों में से किसी को पंजाब चुनाव के मद्देनज़र जगह मिल सकती है.इसके साथ ही शिवसेना को कैबिनेट का पद मिल सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के शामिल होने से उसकी संख्या बढ़कर 13 हो गई है. शिवसेना से श्रीकांत शिंदे के नाम की अटकलें लग रही है.
इस मंत्री परिषद में महिलाओं और युवाओं की संख्या बढ़ सकती है. 14 मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालयों का प्रभार है. इन मंत्रियों में अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल, एचडी कुमारस्वामी, पीयूष गोयल, ललन सिंह, प्रल्हाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, गजेंद्र सिंह शेखावत, किरेन रिजिजू, मनसुख मांडविया, जी किशन रेड्डी पर एक से अधिक विभाग हैं. ऐसे में कुछ मंत्रियों का भार हल्का किया जा सकता है. फिलहाल चर्चा है कि राज्यों से कुछ युवा नेताओं को कैबिनेट में लाया जा सकता है. विशेष तौर पर यूपी, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र से नए चेहरे ला जाए सकते हैं.
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