भारत में अपराध कर विदेश भागने वालों के लिए अब दुनिया का कोई कोना सुरक्षित नहीं रह गया है. पिछले कुछ सालों में देश ने भगोड़े आर्थिक अपराधियों और गंभीर अपराधियों को वापस लाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. साल 2018 में लाए गए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम ने इस दिशा में निर्णायक बदलाव लाया. 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से कुल 274 भगोड़ों को भारत लाया जा चुका है. इनमें 2025 में अकेले 70 और 2026 के जुलाई तक 45 भगोड़े शामिल हैं. ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि विदेश में शरण लेकर कानून से बचने की प्रवृत्ति अब राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुकी है. सरकार इसे तोड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित है.
गृह मंत्रालय इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य समन्वयक और नोडल एजेंसी है. हर भगोड़े का डोजियर तैयार करवाना, विदेशी समकक्षों के साथ दस्तावेजों का आदान-प्रदान, सबूतों का सत्यापन और औपचारिक अनुरोध-ये सभी जिम्मेदारियां गृह मंत्रालय के पास हैं. गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को सक्रिय, तेज और प्रभावी बनाया गया है. सात जनवरी 2025 को सीबीआई की ओर से तैयार 'भारतपोल' पोर्टल का शुभारंभ किया गया. यह प्लेटफॉर्म 1,400 से अधिक राज्य और केंद्रीय कानून प्रवर्तन इकाइयों को इंटरपोल से जोड़ता है. इससे सूचना आदान-प्रदान का समय तीन महीने से घटकर 10-20 दिन रह गया है. इससे अपराधियों की ट्रैकिंग वास्तविक समय में संभव हो गई है.
रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का भी बना रिकॉर्ड
ट्रैकिंग के नए युग में रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई है. 2026 में अब तक 182 नोटिस जारी किए जा चुके हैं. जनवरी 2026 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के मल्टी-एजेंसी सेंटर के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन कर हाई-प्रोफाइल भगोड़ों पर नजर रखने का काम तेज किया गया. 'ऑपरेशन त्रिशूल' के जरिए सैटेलाइट, निगरानी और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर भगोड़ों की लोकेशन पता लगाई जा रही है, भले ही उन्होंने नाम या पहचान बदल ली हो. पिछले सालों में 137 प्रत्यर्पण अनुरोधों में से 134 स्वीकार हो चुके हैं. अब आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी मुकदमे की प्रक्रिया चलती रहती है.
अमेरिका और यूएई जैसे देशों से मिली सफलताएं उल्लेखनीय हैं. नौ अप्रैल 2025 को अमेरिका से 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण कराया गया.यूएई से गणेश ज्वैलरी हाउस के प्रमोटर कमलेश पारेख (हजारों करोड़ की धोखाधड़ी के आरोपी), मोहम्मद नवाज कक्कट इस्माइल और हरियाणा के संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े गौरव जैसे कई अपराधियों को लाया गया. हर्षित बाबूलाल जैन जैसे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपियों को भी डिपोर्ट कराया गया.
भारत की कितने देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि है
2014 से पहले भारत की केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं. आज लगभग 60 देशों के साथ समझौते हैं. पहले औसतन साल में सिर्फ चार भगोड़ों का प्रत्यर्पण हो पाता था. 2004 से 2014 तक केवल 62 भगोड़े लाए जा सके थे, जबकि सैकड़ों अर्जियां लंबित थीं. अधूरे दस्तावेज और कमजोर पैरवी के कारण विदेशी अदालतें अक्सर अनुरोध ठुकरा देती थीं. अब पीएमएलए के तहत सख्त कार्रवाई हो रही है. भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और 18,762 करोड़ रुपये की सफल वापसी भी सुनिश्चित की गई है.
विजय माल्या ब्रिटेन में हैं. उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लंबी चल रही है. नीरव मोदी भी यूके की जेल में हैं. उनके खिलाफ अपीलें खारिज हो चुकी हैं और प्रत्यर्पण लगभग निकट माना जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं. मेहुल चोकसी बेल्जियम में हिरासत में हैं. एंटवर्प अदालत ने प्रत्यर्पण के पक्ष में राय दी है, लेकिन बेल्जियम सरकार अभी भी मामले की जांच कर रही है. इससे प्रक्रिया रुकी हुई है. जाकिर नाइक मलेशिया में बताए जाते हैं और उनके खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आवेदन अदालतों में विचाराधीन हैं. संजय भंडारी (हथियार सलाहकार) भी यूके में हैं. महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े सौरभ चंद्रकार जैसे नामों पर भी कार्रवाई चल रही है. नीरव मोदी के भाई और कुछ अन्य सहयोगी भी विदेशी ठिकानों पर नजर में हैं.
चुनौतियां अभी भी कम नहीं हुई हैं
विदेशी अदालतों में मानवाधिकार, जेल की स्थिति और निष्पक्ष सुनवाई संबंधी आश्वासनों की मांग प्रक्रिया को लंबा खींचती है. दोहरी आपराधिकता (ड्यूअल क्रिमिनैलिटी) और राजनीतिक अपराध जैसे अपवाद कभी-कभी बाधा बनते हैं. कुछ देश शरण या नागरिकता संबंधी दावों को गंभीरता से लेते हैं. भगोड़े अक्सर पहचान बदलते हैं, क्रिप्टोकरेंसी और एन्क्रिप्टेड संचार का इस्तेमाल करते हैं. दस्तावेजों की सटीकता और राजनयिक समन्वय पर निरंतर ध्यान देना पड़ता है. नियम ऑफ स्पेशलिटी का पालन भी महत्वपूर्ण है ताकि भविष्य के अनुरोध प्रभावित न हों. फिर भी, तकनीक, भारतपोल, मजबूत द्विपक्षीय संबंध और सक्रिय कूटनीति के दम पर भारत इन चुनौतियों से निपट रहा है.
ये उपलब्धियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का परिणाम हैं. भारत के भगोड़ों तक कानून की पहुंच सीमाओं के पार सुनिश्चित हो चुकी है. शेष बड़े नामों को भी जल्द न्याय के कटघरे में लाने की दिशा में प्रयास जारी हैं.
(डिस्क्लेमर: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, वो देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अलग-अलग विषयों पर लेख लिखते हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)