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सिंड्रेला दास: 8 की उम्र में शुरू की प्रैक्टिस, मनिका बत्रा को हराकर मचाई सनसनी, अब 17 की उम्र में एशियन गोल्ड पर नजरे

कोलकाता की युवा टेबल टेनिस स्टार सिंड्रेला दास की नजर एशियन गेम्स में गोल्ड पर है साथ ही वह रैंकिंग में टॉप-50 में शामिल होना चाहती हैं.

सिंड्रेला दास: 8 की उम्र में शुरू की प्रैक्टिस, मनिका बत्रा को हराकर मचाई सनसनी, अब 17 की उम्र में एशियन गोल्ड पर नजरे
17 साल की उम्र में सिंड्रेला की नजरें गोल्ड मेडल पर होंगी.

सिंड्रेला दास की तेज़ी से बढ़ती कामयाबी का नतीजा यह हुआ है कि उन्हें एशियाई खेलों के लिए सीनियर महिला टीम में चुना गया है. 17 साल की यह खिलाड़ी अब गोल्ड मेडल जीतने और "जितनी जल्दी हो सके" टॉप 50 में जगह बनाने पर ध्यान दे रही हैं.  सिंड्रेला अभी अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ की महिला एकल रैंकिंग में 99वें जबकि युवा वर्ग में 27वें स्थान पर काबिज हैं. उन्हें विश्वास है कि वह जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में अपनी अच्छी फॉर्म बरकरार रखने में सफल रहेंगी. 

कानपुर में नेशनल रैंकिंग टेबल टेनिस चैंपियनशिप में अंडर-19 और महिला सिंगल्स, दोनों खिताब जीतकर (जो उन्होंने अपने 17वें जन्मदिन के आस-पास जीते थे) लौटीं भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी अब अपने युवा करियर के सबसे बड़े टूर्नामेंट में से एक – एशियन गेम्स 2026 – की तैयारी कर रही हैं. उनकी उपलब्धियों में अल्टीमेट टेबल टेनिस के महिला एकल मैच में स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा को हराना भी शामिल है. 

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17 साल की उम्र में एशियन गोल्ड पर नजरें

आइची-नागोया में होने वाले कॉन्टिनेंटल टूर्नामेंट के लिए भारत की टेबल टेनिस टीम में चुनी गईं सिंड्रेला दास, भारतीय दल की युवा सदस्यों में से एक होंगी. हालांकि, उनके लिए यह मौका उस सफर में एक और कदम है, जिसकी योजना उन्होंने पिछले एक साल से बहुत सोच-समझकर बनाई है. सिंड्रेला ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा,"मैं एशियाई खेलों को लेकर बेहद उत्साहित हूं. हम निश्चित रूप से स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगे. मेरा लक्ष्य जल्द से जल्द विश्व रैंकिंग में शीर्ष 50 में जगह बनाना भी है."

सिंड्रेला ने कहा कि यह सत्र उनके लिए सबसे अच्छा रहा है और वह राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में भी सफल रही लेकिन अब भी बहुत कुछ सीखना बाकी है. उन्होंने कहा,"यह सत्र मेरे लिए बहुत अच्छा रहा है क्योंकि मेरा चयन एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप और युवा ओलंपिक के लिए हो चुका है. मैं अब सीनियर टीम में हूं. बेशक मैंने कई मैच हारे हैं, कई जीते हैं. अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है."

हर दिन 5-6 घंटे का अभ्यास

सिंड्रेला ने कहा कि जब वह खेल नहीं रही होती हैं तो मानसिक रूप से मजबूत बनने और अपनी गलतियों का विश्लेषण करने पर ध्यान देती हैं. उन्होंने कहा,"जब मैच नहीं चल रहे होते हैं तो मैं अपनी फिटनेस और मानसिक रूप से मजबूत बनने पर ध्यान केंद्रित करती हूं. मैं सुबह करीब 3-4 घंटे और शाम को 2-3 घंटे अभ्यास करती हूं और अपनी फिटनेस को भी बराबर समय देती हूं."

सिंड्रेला ने कहा,"प्रत्येक प्रतियोगिता के बाद मैं अपने कोच के साथ मिलकर अपने खेल का विश्लेषण करती हूं और उसी के अनुसार सुधार करती हूं. मैं मैच में जो गलतियां करती हूं उन्हें अभ्यास के दौरान सुधारने की कोशिश करती हूं." उन्होंने कहा कि पहले वह दबाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती थी लेकिन अब उन्होंने इससे निपटना सीख लिया है.

सिंड्रेला ने कहा,"पहले मुझे लगता था कि दबाव ही वो चीज है जो मुझे हमेशा आगे बढ़ने से रोकती है. जब मैंने अपनी मानसिक कोच से बात की तो उन्होंने कहा कि दबाव तो सौभाग्य की बात है. उसके बाद मुझे नहीं लगता कि मैं दबाव की परवाह करती हूं क्योंकि हर कोई इस दबाव का अनुभव नहीं कर सकता."

4 साल की उम्र में शुरू की प्रैक्टिस

कोलकाता के बाघाजतिन की रहने वाली सिंड्रेला के माता-पिता कॉलेज के दिनों से ही टेबल टेनिस में माहिर थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को पास के ही एक क्लब में भर्ती करा दिया. तब वह सिर्फ चार साल की थी. 

स्पोर्टस्टार से बात करते हुए सिंड्रेला कहती हैं,"मैं ड्राइंग करती थी, गाती थी, डांस करती थी, बैडमिंटन खेलती थी और स्विमिंग भी करती थी. मुझे स्विमिंग बहुत पसंद थी, लेकिन क्लोरीन से मेरी स्किन पर असर होने की वजह से मुझे इसे छोड़ना पड़ा. फिर मैंने लोकल क्लब में हुए एक मिक्स्ड टेबल टेनिस टूर्नामेंट में जीत हासिल की. ​फाइनल में मैंने एक लड़के को हराया और जब मैंने मेडल और ट्रॉफ़ी देखी, तो मैं बहुत खुश हुई. मैं और जीतना चाहती थी."

सौम्यदीप रॉय की देखरेख में निखरीं

एक और घटना जिसने सिंड्रेला को इस खेल की ओर और ज़्यादा आकर्षित किया, वह थी कोलकाता में हुआ UTT 2018 टूर्नामेंट. सिंड्रेला ने कहा,"मैं उसे देखने गई और वहां अलग-अलग खिलाड़ियों को देखा. मेरा भी मन था कि एक दिन मैं भी वहां खेलूं." 

सिंड्रेला ने 8 साल की उम्र में सौम्यदीप रॉय की अकादमी ज्वाइन की. हालांकि, पूर्व नेशनल चैंपियन और अर्जुन अवॉर्डी उन्हें अपनी अकादमी में लेने को लेकर हिचकिचा रहे थे. लेकिन सिंड्रेला की मां की गुज़ारिश पर उन्होंने इस बच्ची को ट्रेनिंग देना शुरू किया. 

सिंड्रेला को पहली बड़ी सफलता, 2021 में अंडर-13 कैटेगरी में अपना पहला नेशनल रैंकिंग टूर्नामेंट जीतना था. लेकिन इस पहली जीत से कुछ महीने पहले, डॉजबॉल खेलते समय सिंड्रेला की कलाई टूट गई थी. उन्हें लगता है कि यह घटना उनके करियर के लिए बहुत अहम थी.  उनका कहना है कि इस घटना के बाद ही उनके खेल में तेज़ी आई.

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