विज्ञापन

मैट पर ही रो पड़ीं सुचिका, बोली, 'इस नतीजे से मैं सहमत नहीं', F & Q सें जानें 'नियम की मार' की कहानी

सुचिका तरियाल भले ही रजत पदक से चूक गई हों, लेकिन उन्होंने करोड़ों भारतीयों के दिल पर एक ऐसे खेल का नाम लिखवा दिया, जिसमें भविष्य में भारत और नई ऊंचाइयां छू सकता है

मैट पर ही रो पड़ीं सुचिका, बोली, 'इस नतीजे से मैं सहमत नहीं',  F & Q सें जानें 'नियम की मार' की कहानी
MMA में कांस्य पदक जीतने वाली सुचिका तारियाल
source: X

जापान में खेले जा रहे 20वें एशियन गेम्स के तीसरे दिन एकदम से ही MMA (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स ) भारत के नक्शे पर लाकर करोड़ों भारतीयों को इसकी ओर देखने और जाने पर मजबूर करने वाले 36 साल की भारतीय लड़ाका सुचिका तरियाल को कांस्य से संतोष करना पड़ा. वह सुबह 60 किग्रा भार वर्ग में वह सिंगापुर की हुई हून तेओ के खिलाफ एक नाटकीय सेमीफाइनल मुकाबला कम-वजन के नियम के आधार पर हार गईं. भारत की अपील स्वीकार किए जाने के बाद मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ था, लेकिन इंटरनेशनल मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स फेडरेशन (IMMAF) के नियमों के तहत विजेता का फैसला सुबह के वे-इन (वजन मापने) के दौरान दर्ज किए गए खिलाड़ियों के वजन के आधार पर किया गया. 

मैट पर ही रो पड़ीं सुचिका

इस आधार पर तेओ, जिनका वजन सुचिका से 700 ग्राम कम था ने फाइनल में प्रवेश किया. दोनों फाइटरों के वजन के बीच का यह अंतर एक टैबलेट कंप्यूटर या हार्डकवर किताब के बराबर है यह कांस्य पदक एमएमए (MMA) में भारत का पहला पदक है, जो आइची-नागोया खेलों में अपना एशियाई डेब्यू कर रहा है. अंतिम फैसला तेओ के पक्ष में सुनाए जाने के बाद 36 वर्षीय सुचिका मैट पर ही रो पड़ीं. इस कांस्य पदक के साथ इन खेलों में भारत के पदकों की संख्या छह हो गई. भारतीय निशानेबाजों ने अब तक चार रजत और एक कांस्य पदक जीता है.

हरियाणा के रोहतक जिले के किलोई गांव की रहने वाली सुचिका जू-जित्सु में 2024 की विश्व चैंपियन हैं. उन्होंने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में और साल 2022 एशियाई खेलों में कुराश में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है. मुकाबले के बाद सुचिका ने कहा कि उन्हें लगा था कि उन्होंने जीतने के लिए पर्याप्त प्रदर्शन किया है. सुचिका ने कहा, 'मैं आज की बाउट (मुकाबले) के नतीजे से थोड़ी निराश हूं क्योंकि मुझे लगा कि मैं फाइट जीत गई थी. मैं इस नतीजे से सहमत नहीं हो पा रही हूं. मैं कह रही थी कि यह सही नहीं है.'

अपनी बात कहना मेरा अधिकार

उन्होंने कहा, 'यह सही नहीं है क्योंकि अगर आप किसी खिलाड़ी को देखें, तो वह हर जगह अपना 100 प्रतिशत देता देती है. और अगर आपको लगता है कि फैसला अन्यायपूर्ण है, तो (अपनी बात व्यक्त करना) यह मेरा अधिकार है.' सुचिका बोलीं,  'मैंने अपने दोनों दौर बहुत अच्छे से जीते क्योंकि मैंने उन्हें टेकडाउन (नीचे गिराया) किया. उन्होंने तो मुझे टेकडाउन भी नहीं किया था. हां दो-तीन कनेक्टिंग पंच रहे होंगे. मैंने भी एक कनेक्टिंग पंच मारा था. और आखिरी मिनट में वह आगे-पीछे हो रही थीं. फिर मैं अपनी किक लगा रही थी. मैं उन्हें बार-बार मार रही थी.' अपनी निराशा के बावजूद, सुचिका ने कहा कि उन्हें एमएमए में भारत की पहली एशियाई खेल पदक विजेता बनने पर गर्व है.'

F & Q: Freqently Asked Questions

प्र. 1: MMA में यदि कोई मुकाबला (Bout) आधिकारिक तौर पर ड्रॉ (बराबर) घोषित हो जाता है, तो विजेता का निर्णय कैसे किया जाता है? उ.: यदि जजों की री-स्कोरिंग या मध्यस्थता (Arbitration) के बाद मुकाबला ड्रॉ घोषित हो जाता है, तो टूर्नामेंट के नियमों (जैसे IMMAF) के अनुसार विजेता तय करने के लिए सुबह के आधिकारिक वजन में कम वजन वाले खिलाड़ी को विजेता घोषित करने या अतिरिक्त जजों द्वारा दोबारा स्कोरिंग कराने जैसे विकल्प लागू किए जाते हैं.

प्र. 2: कम-वजन नियम  क्या है और यह कब लागू होता है?

उ.: कम-वजन नियम के तहत, यदि किसी बाउट के अंत में मुकाबला पूरी तरह ड्रॉ हो जाता है, तो जिस खिलाड़ी का वजन मैच के दिन सुबह हुए आधिकारिक वजन के दौरान कम दर्ज किया गया था, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है

प्र. 3: मैच के नतीजे को चुनौती देने या मध्यस्थता (Arbitration) की प्रक्रिया क्या होती है?

उ.: यदि किसी टीम को जजों के शुरुआती फैसले पर आपत्ति होती है, तो वे निर्धारित मध्यस्थता शुल्क जमा करके फैसले को आधिकारिक रूप से चुनौती दे सकते हैं. इसके बाद नए जजों का पैनल गठित किया जाता है जो बाउट का पुनर्मूल्यांकन करता है.

प्र. 4: मध्यस्थता में स्कोर ड्रॉ होने पर प्रतिद्वंद्वी टीम के पास क्या विकल्प होते हैं?

उ.: जब नए जजों के पुनर्मूल्यांकन के बाद मुकाबला ड्रॉ हो जाता है, तो विरोधी टीम के पास IMMAF नियमों के तहत दो विकल्प होते हैं:

  1. तीन और नए जजों को जोड़कर दोबारा स्कोरिंग करवाना

  2. सुबह के आधिकारिक वजन के रिकॉर्ड के आधार पर सीधे फैसले को स्वीकार करना.

प्र. 5: कम-वजन नियम लागू करने के पीछे मुख्य तर्क या उद्देश्य क्या होता है?

उ.: कॉम्बैट स्पोर्ट्स में माना जाता है कि समान तकनीकी स्कोर होने की स्थिति में जिस खिलाड़ी का वजन कम था, उसने अपने से अधिक वजन वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ मुकाबला किया है। इसलिए, मैच पूरी तरह बराबरी पर खत्म होने पर कम वजन वाले फाइटर को बढ़त दी जाती है.


 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Asian Games 2026, Sports News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com