कुलदीप कुमार और देव मीणा जब आज एशियन गेम्स में मेंस पोव वॉल्ट इवेंट में एक्शन में होंगे तो उनकी नजरें न सिर्फ मेडल जीतने की होगी, बल्कि उनकी कोशिश उस सिस्टम को भी आईना दिखाने की होगी, जिसके चलते उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसी साल मई महीने में इन दोनों स्टार्स ने रांची में रविवार नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता 2026 में शानदार प्रदर्शन किया था. इस दौरान नेशनल रिकॉर्ड्स कई बार टूटा. लेकिन इसके बाद जो तस्वीरें आई उसने सभी स्पोर्ट्स फैन का दिल तोड़ दिया. कुलदीप और देव मीणा ई-रिक्शे में अपने पोल को लेकर जाते दिखे. इससे कुछ दिनों पहले उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया था, कारण पोल. कुलदीप और देव मीणा ने बीते कुछ सालों से ट्रैक एंड फील्ड पर तो बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन मैदान के बाहर उन्हें अपने पोल को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने को लेकर काफी परेशानी हुई है.
मेडल की होगी उम्मीद
मीना ने नेशनल रिकॉर्ड को 5.32 मीटर से बढ़ाकर 5.46 मीटर कर दिया है. उनका यह नया रिकॉर्ड भुवनेश्वर में हुई 2026 नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में बना. उनका आगे बढ़ना इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि वे 400 मीटर स्प्रिंट से पोल वॉल्ट में आए, जिससे उन्हें रनवे पर अच्छी स्पीड मिली.
कुलदीप ने भी 5.45 मीटर का रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने पहले 5.41 मीटर के साथ इंडियन इंडोर ओपन जीता था और फिर रांची में फेडरेशन कप में मीना के बराबर (5.45 मीटर) प्रदर्शन किया. दोनों ने ग्लासगो में हुए 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में बड़ी चैंपियनशिप का अनुभव भी हासिल किया. मीना चौथे स्थान पर रहे, जबकि कुलदीप छठे स्थान पर रहे.
कुलदीप को भाई से विरासत में मिला खेल
सिर्फ 21 साल की उम्र में, मध्य प्रदेश के इस एथलीट ने देश के बेहतरीन वॉल्टर्स के बीच तेज़ी से अपनी जगह बनाई है. उनके रिकॉर्ड तोड़ने वाले प्रदर्शन ने भारतीय पोल वॉल्टिंग के लिए एक नए दौर की शुरुआत की है. 12 मार्च 2005 को जन्मे कुलदीप कुमार मध्य प्रदेश से हैं और नेशनल कॉम्पिटिशन में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं. कुलदीप के बड़े भाई भी इसी खेल से जुड़े थे. परिवार की इसी पृष्ठभूमि ने उन्हें इस कठिन तकनीकी खेल की ओर आकर्षित किया.
देव ने रेस छोड़ी पोल पकड़ा
7 मई 2005 को मध्य प्रदेश के देवास ज़िले में जन्मे देव मीणा ने अपने एथलेटिक्स सफ़र की शुरुआत पोल वॉल्टर के तौर पर नहीं की थी. शुरुआत में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया, लेकिन बाद में कोच घनश्याम यादव ने पहचाना कि उनका शरीर और एथलेटिक गुण पोल वॉल्ट के लिए ज़्यादा बेहतर हैं.
यह फ़ैसला उनके करियर के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ. देव ने भोपाल की मध्य प्रदेश एथलेटिक्स अकादमी में ट्रेनिंग शुरू की, जहां यादव की देखरेख में उन्होंने लगातार तरक्की की. अमृतसर के खालसा कॉलेज से बैचलर ऑफ़ आर्ट्स की डिग्री लेते हुए उन्होंने इंटरनेशनल कोच एंजेल गार्सिया के साथ भी काम किया है. साथी पोल वॉल्टर कुलदीप कुमार के साथ ट्रेनिंग करने से भी उनके खेल में तेज़ी से सुधार हुआ है. दोनों ने एक-दूसरे को नए नेशनल स्टैंडर्ड तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया है.
एशियन गेम्स के इतिहास में पोल वॉल्ट में भारत का पहला और अब तक का पहला पदक बरनिका एलंगोवन ने जीता है. उन्होंने 2026 एशियन गेम्स में महिला पोल वॉल्ट में 4.15 मीटर की छलांग के साथ कांस्य पदक हासिल किया. यह भारत का पोल वॉल्ट में पहला एशियन गेम्स पदक था. भारत के लिए कोई भी पुरुष एथलीट ने ऐसा नहीं किया है. लेकिन आज इन दोनों की नजरें होंगी इस सूखे को खत्म करने की.
यह भी पढ़ें: नीरज नंबर-2, यशवीर नंबर 5, रोहित की टॉप 10 में एंट्री, एशियन गेम्स में सबसे दूर भाला फेंकने वाले जैवलिन थ्रोअर
यह भी पढ़ें: अफगानिस्तान में लड़का बनकर करनी पड़ी थी प्रैक्टिस, अब इस साइकिलिस्ट ने एशियन गेम्स में जीता सिल्वर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं