खेलों की दुनिया से बहुत गजब कहानियां-किस्से सामने आते रहते हैं. और जब बात अफगानिस्तानी महिलाओं की आती है, तो हालात क्या हैं, पूरी दुनिया के सामने हैं. लेकिन जब खेल के प्रति जुनून हो, तो चैंपियन रास्ता निकाल ही लेते हैं. और इसका उदाहरण एशियन खेलों में देखने को मिला. पुरुषों के वेश में अपने सपने को साकार करने वाली अफगानी महिला साईक्लिस्ट फरीबा हाशमी ने मंगलवार को रजत पदक जीता. साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे ऐसे देश की अन्य महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी जहां तालिबान अधिकारियों ने उनकी स्वतंत्रता पर भारी प्रतिबंध लगा दिए हैं. इटली में रहने वाली फरीबा हाशमी ने जापान के नागोया के पास महिलाओं की रोड रेस में दूसरा स्थान हासिल किया और इस जीत को "कुछ खास" बताया.
Afghan cyclist Fariba Hashimi wins Asian Games road race silver.
— Vok Sports (@voksports) September 22, 2026
She once trained disguised as a man to avoid attacks. Now she hopes her success inspires Afghan girls.
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पत्थरों से किया गया हमला
23 वर्षीय फरीबा ने कहा, 'मैं अभी अपनी भावनाओं को बयां नहीं कर सकती' इसके बाद उन्होंने याद किया कि जब उन्होंने अपनी बहन युलुज (जो अब खुद एक पेशेवर साइकिल चालक हैं) के साथ एक किशोर के रूप में इस खेल की शुरुआत की थी, तब उन पर पत्थरों से हमला किया गया था और उन्होंने पुरुषों के वेश में प्रशिक्षण लिया था.' उन्होंने कहा, 'मेरा जन्म एक ऐसे देश में हुआ है जहां सपने देखने वाली महिलाओं पर हमले होते हैं. और मैं वास्तव में बहुत खुश हूं कि मैंने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी है. मुझे उम्मीद है कि अगली पीढ़ी यहां आएगी और बिना किसी डर के अपने देश का प्रतिनिधित्व करेगी.' ध्यान दिला दें कि साल 2021 में तालिबान सत्ता में लौटा और तब से उसने महिलाओं की शिक्षा और खेल सहित सार्वजनिक जीवन तक पहुंच को सीमित करने वाले कई नियम लागू किए हैं.
उत्तरी अफगानिस्तान के फरयाब प्रांत से ताल्लुक रखने वाली और तालिबान के सत्ता संभालने के बाद देश छोड़ने वाली हाशमी ने कहा, 'उन्होंने हमारी स्वतंत्रता छीन ली, उन्होंने हमसे सब कुछ छीन लिया. यह रजत पदक अफगान महिलाओं के भारी लचीलेपन को दिखा सकता है, और मैं वास्तव में बहुत खुश हूं. मैं अकेली नहीं हूं. मैं जानती हूँ कि मेरे पीछे कई देशों की लाखों महिलाओं का वही सपना है और वे मेरे साथ खड़ी हैं.'
इटली में ही रह कर करती हैं अभ्यास
इटली की पूर्व विश्व चैंपियन एलेसेंड्रा कैपेलोट्टो की मदद से अफगानिस्तान से भागने के बाद हाशमी इटली चली गईं. वह वहीं, रहती हैं और अभ्यास करती हैं. वह और उनकी बहन ने दो साल पहले पेरिस ओलिंपिक में प्रतिस्पर्धा की थी और अब 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक क्षितिज पर दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा, 'मैं कभी हार नहीं मानना चाहती और उम्मीद है कि हम लॉस एंजिल्स में फिर से (देख सकते हैं कि क्या हो सकता है).' हाशमी ने अपने रजत पदक में भूमिका निभाने के लिए जापानी टीम का विशेष आभार व्यक्त किया.
उन्होंने कहा, 'मैं यहां बिना किसी मैकेनिक के, बिना किसी तैयारी के हूं. हम राष्ट्रीय महासंघ से अपने साथ एक आदमी को लाए थे, और उसने सिर्फ गाड़ी चलाई. हम खुद साइकिल ठीक कर रहे थे. मैं खुद अपनी मैकेनिक थी. मैं खुद साइकिल धो रही थी. जापानी टीम का धन्यवाद. वे मेरे प्रति वास्तव में बहुत अच्छे थे, उन्होंने मेरी साइकिल ठीक की.
बिना मैकेनिक के जापान पहुंचीं, खुद धो रहीं अपनी साईकिल
इटली की पूर्व विश्व चैंपियन एलेसेंड्रा कैपेलोट्टो की मदद से अफगानिस्तान से भागने के बाद हाशमी इटली चली गईं. वह वहीं, रहती हैं और अभ्यास करती हैं. वह और उनकी बहन ने दो साल पहले पेरिस ओलिंपिक में प्रतिस्पर्धा की थी और अब 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक क्षितिज पर दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा, 'मैं कभी हार नहीं मानना चाहती और उम्मीद है कि हम लॉस एंजिल्स में फिर से (देख सकते हैं कि क्या हो सकता है).' हाशमी ने अपने रजत पदक में भूमिका निभाने के लिए जापानी टीम का विशेष आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, 'मैं यहां बिना किसी मैकेनिक के, बिना किसी तैयारी के हूं. हम राष्ट्रीय महासंघ से अपने साथ एक आदमी को लाए थे, और उसने सिर्फ गाड़ी चलाई. हम खुद साइकिल ठीक कर रहे थे. मैं खुद अपनी मैकेनिक थी. मैं खुद साइकिल धो रही थी. जापानी टीम का धन्यवाद. वे मेरे प्रति वास्तव में बहुत अच्छे थे, उन्होंने मेरी साइकिल ठीक की.'
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