जब भारत के सबसे तेज धावक अपने करियर की सबसे बड़ी रेस की तैयारी कर रहे हैं, तो 2026 एशियाई खेलों में पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में सबकी नजरें गुरिंदरवीर सिंह पर होंगी. नेशनल रिकॉर्ड होल्डर ने इस साल भारतीय स्प्रिंटिंग का इतिहास तो बदल दिया है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या वह उस रफ्तार को एशियाई खेलों के मेडल में बदल पाएंगे. रांची में फेडरेशन कप में 10.09 सेकंड में 100 मीटर की रेस करके एथलेटिक्स की दुनिया को चौंकाने वाले गुरिंदरवीर अगर एशियन गेम्स के फाइनल में अपना प्रदर्शन दोहराते हैं तो क्या टीम इंडिया को मेडल मिलेगा?
48 सालों से मेडल का इंतजार
भारत ने दशकों से एशियाड में ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में सफलता हासिल की है. लेकिन पुरुषों की 100 मीटर दौड़ देश के लिए सबसे मुश्किल इवेंट्स में से एक रही है. 1951 में पहले खेलों से हिस्सा लेने के बावजूद, भारत ने पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में सिर्फ़ तीन मेडल जीते हैं.
देश को पहली सफलता तब मिली जब लावी पिंटो ने नई दिल्ली में 1951 एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता. तीन साल बाद, मैरियन गेब्रियल ने मनीला में ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि रामास्वामी ज्ञानसेकरन ने बैंकॉक में 1978 एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीता. तब से, कोई भी भारतीय स्प्रिंटर इस अहम इवेंट में पोडियम तक नहीं पहुंच पाया है.
पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में 48 साल से मेडल का इंतज़ार कर रहा है. ऐसे में अगर गुरिंदरवीर मेडल जीतते हैं तो यह ना सिर्फ उनकी खुद की निजी उपलब्धि होगी, बल्कि भारतीय स्प्रिंटिंग के लिए एक यादगार पल भी होगा और अगर हीट के प्रदर्शन को ध्यान में रखें तो गुरिंदरवीर का मेडल पक्का हो सकता है.
रांची वाली रफ्तार से तय है मेडल?
पुरुषों की 100 मीटर के लिए कुछ छह अलग-अलग हीट हुई और प्रत्येक हीट से तीन-तीन एथलीट्स ने सेमीफाइनल राउंड के लिए क्वालीफाई किया है.थाईलैंड के पुरीपोल बूनसन हीट 1 में 9.95 सेकेंड में 100m रेस पूरी करने में सफल हुए थे. जबकि इसी हीट में अ्निमेष कुमार 10.36 सेकेंड का समय लेकर तीसरे स्थान पर रहे और सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई कर गए.
राउंड 1 में दूसरा सबसे बेहतर प्रदर्शन ओमान के अली बलूशी का रहा, जो तीसरी हीट में दौड़े. उन्होंने 10.06 सेकेंड का समय लिया. इसके अलावा अन्य किसी हीट में कोई भी एथलीट 10.23 सेकेंड से कम समय में 100 मीटर नहीं कर पाया. गुरुवार को गुरिंदरवीर चौथी हीट में रहे और उन्होंने 10.38 का समय लेकर सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया.
अगर हीट का प्रदर्शन ही एथलीट्स फाइनल राउंड में दोहराते हैं और गुरिंदरवीर अपना बेस्ट प्रदर्शन को रिपीट करते हैं तो टीम इंडिया 48 साल बाद पुरुषों की 100 मीटर रेस में मेडल जीत सकती है. लेकिन यह सिर्फ कयास है. गुरिंदरवीर इससे भी बेहतर कर सकते हैं और शुक्रवार को पूरे भारत की नजर उन्हीं पर होगी. सेमीफाइनल और फाइनल में वह जबरदस्त प्रदर्शन करते इतिहास रचना चाहेंगे.
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