Karnataka Anganwadi Workers Protest: कर्नाटक में आंगनवाड़ी कर्मियों (Anganwadi Workers) का गुस्सा सड़कों पर है. राज्य सरकार (Karnataka Government Crisis) पर दबाव बढ़ाते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क (Freedom Park Bengaluru) में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है. प्रदर्शनकारी सरकार से चुनावी वादों के अनुरूप वेतन बढ़ोतरी (Anganwadi Helper Salary) की मांग कर रहे हैं. कर्मियों का कहना है कि बजट में दी गई साड़ियां प्रतीकात्मक हैं और आर्थिक सुरक्षा का विकल्प नहीं हो सकतीं. आंदोलन को राज्यभर से समर्थन मिल रहा है, जिससे सरकार के सामने जल्द फैसला लेने की चुनौती खड़ी हो गई है. यह आंदोलन भारतीय ट्रेड यूनियनों (Centre of Indian Trade Unions) के केंद्र (CITU) से संबद्ध कर्नाटक राज्य आंगनवाड़ी वर्कर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में किया जा रहा है.

Karnataka Anganwadi Workers Protest: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना प्रदर्शन
चुनावी वादे पूरे नहीं होने से नाराज कर्मचारी
आंदोलनरत आंगनवाड़ी कर्मियों का कहना है कि राज्य सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले वेतन बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं किया गया है. सरकार की ओर से हाल ही में बजट के दौरान वितरित की गई साड़ियों को कार्यकर्ताओं ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि प्रतीकात्मक उपहार आर्थिक सुरक्षा का विकल्प नहीं हो सकते.
वेतन वृद्धि और सेवा शर्तों में सुधार की मांग
आंदोलनकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रति माह 15 हजार रुपये और आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए 10 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग कर रही हैं. यह मांग कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादे के अनुरूप बताई जा रही है. इसके अलावा सेवा शर्तों में सुधार और आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत करने की भी मांग उठाई जा रही है.
राज्यभर में आंदोलन को मिल रहा समर्थन
बेंगलुरु में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है. कई जिलों से आंगनवाड़ी कर्मचारी धरने में शामिल हो रही हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है. संघ का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
सरकार के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती
राज्य में महिलाओं और बच्चों की बुनियादी सेवाओं से जुड़ी आंगनवाड़ी व्यवस्था पर इस आंदोलन का असर पड़ने लगा है. विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. ऐसे में कर्नाटक सरकार के सामने आंगनवाड़ी कर्मियों की मांगों पर जल्द फैसला लेने की चुनौती खड़ी हो गई है.
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