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Tiger Corridor का रास्ता साफ; NH-46 को लेकर हाई कोर्ट, वाइल्डलाइफ बोर्ड व केंद्र की मंजूरी, NHAI करेगा काम

NHAI NH-46 Project Baretha Ghat Tiger Corridor: NH‑46 के बरेठा घाट सेक्शन पर निर्माण का रास्ता साफ. टाइगर कॉरिडोर वाले हिस्से को वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र से मंजूरी मिल गई है. हाईकोर्ट स्टे हटते ही 20.9 किमी सेक्शन में काम शुरू होगा.

Tiger Corridor का रास्ता साफ; NH-46 को लेकर हाई कोर्ट, वाइल्डलाइफ बोर्ड व केंद्र की मंजूरी, NHAI करेगा काम
Tiger Corridor का रास्ता साफ; NH-46 को लेकर हाई कोर्ट, वाइल्डलाइफ बोर्ड व केंद्र की मंजूरी, NHAI करेगा काम

NHAI NH 46 Tiger Corridor Project: नेशनल हाइवे 46 (NH‑46) के सबसे संवेदनशील और लंबे समय से अटके बरेठा घाट सेक्शन पर अब सड़क निर्माण की राह लगभग साफ हो गई है. हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर वाले इस हिस्से को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी मंजूरियां हासिल कर ली हैं. अब अदालत से स्टे हटने का औपचारिक आदेश मिलते ही करीब 20.9 किलोमीटर लंबे इस सेक्शन पर निर्माण शुरू किया जाएगा.

NHAI NH 46 Tiger Corridor Project: टाइगर कॉरिडोर

NHAI NH 46 Tiger Corridor Project: टाइगर कॉरिडोर

मध्यप्रदेश का सबसे लंबा नेशनल हाईवे

NH‑46 मध्यप्रदेश का प्रमुख उत्तर‑दक्षिण कॉरिडोर माना जाता है, जो ग्वालियर से बैतूल तक लगभग 634 किलोमीटर तक फैला है. यह पूरी तरह प्रदेश के भीतर स्थित सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है और भोपाल‑नागपुर कॉरिडोर की एक अहम कड़ी भी है. इस हाईवे के जरिए राजधानी क्षेत्र से दक्षिणी मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा तक सीधा और तेज संपर्क बनता है.

तीन हिस्सों में अटका था करीब 21 किलोमीटर का काम

बैतूल तक हाईवे का अधिकांश निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन केसला रेंज, भौंरा रेंज और बरेठा घाट के तीन खंड (कुल मिलाकर करीब 20.91 किलोमीटर) अब तक अधूरे रह गए थे. वजह थी यह इलाका टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर और घने वन क्षेत्र के भीतर आना. इन्हीं कारणों से 1 अप्रैल 2022 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यहां निर्माण पर रोक लगा दी थी.

क्यों संवेदनशील है बरेठा घाट सेक्शन?

बरेठा घाट का यह हिस्सा न सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील है, बल्कि सड़क सुरक्षा की दृष्टि से भी इसे बेहद जोखिम भरा माना जाता है. फिलहाल यह मार्ग सिर्फ दो लेन का है, जहां तीखे मोड़, ढलान और सीमित विजिबिलिटी आए दिन परेशानी का सबब बनते हैं. भारी वाहनों और बढ़ते ट्रैफिक के कारण यहां जाम और हादसे आम बात हो गई है.

आंकड़े बताते हैं खतरे की हकीकत?

स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस सेक्शन में 51 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. इन हादसों में 18 लोगों की जान चली गई, जबकि करीब 62 लोग घायल हुए. इनमें से कई दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की अचानक सड़क पर मौजूदगी भी एक बड़ी वजह मानी जाती है.

NHAI NH 46 Tiger Corridor Project: टाइगर कॉरिडोर का मैप

NHAI NH 46 Tiger Corridor Project: टाइगर कॉरिडोर का मैप

4‑लेन में बदलेगा घाट का रास्ता

हाईकोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए NHAI ने बरेठा घाट सेक्शन के लिए चार लेन का नया डिजाइन तैयार किया है. मौजूदा दो‑लेन सड़क को चौड़ा कर ट्रैफिक के दबाव को कम किया जाएगा. घुमावदार हिस्सों का रेक्टिफिकेशन किया जाएगा, जिससे सफर ज्यादा सुरक्षित और सुगम हो सके.

ब्लैक स्पॉट पर खास फोकस

इस खंड में चिन्हित दो प्रमुख ब्लैक स्पॉट्स को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई गई है. इसके तहत 3 माइनर ब्रिज बनाए जाएंगे और 38 बॉक्स कलवर्ट्स का पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण किया जाएगा. इसके अलावा 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास भी प्रस्तावित हैं, ताकि ट्रैफिक बिना रुकावट आगे बढ़ सके.

वन्यजीव संरक्षण के साथ सड़क विकास

परियोजना की खास बात यह है कि इसे वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. बरेठा घाट जैसे वन क्षेत्रों में कुल 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि जानवरों की प्राकृतिक आवाजाही बाधित न हो. इनके डिजाइन और स्थान तय करने में वाइल्डलाइफ बोर्ड और हाईकोर्ट के सुझावों को शामिल किया गया है.

NHAI NH 46 Tiger Corridor Project: फाइल फोटो

NHAI NH 46 Tiger Corridor Project: फाइल फोटो

सुरक्षा और पर्यावरण पर भी ध्यान

घाट सेक्शन में एनजे टाइप क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप और आधुनिक रोड साइन लगाए जाएंगे. इसके साथ ही नॉइज बैरियर, चेन‑लिंक फेंसिंग और बंबू क्रीपर जैसे उपाय किए जाएंगे, जिससे शोर और पर्यावरणीय प्रभाव कम हों और वन्यजीव सुरक्षित रहें.

कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन को मिलेगा फायदा

NH‑46 का यह हिस्सा पूरा होने से ग्वालियर से बैतूल और आगे महाराष्ट्र की ओर सफर न सिर्फ आसान होगा, बल्कि व्यापारिक आवाजाही भी तेज होगी. मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र सहित कई उद्योगों को इससे सीधा लाभ मिलेगा. साथ ही सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, तवा डैम और सलकनपुर जैसे धार्मिक‑पर्यटन स्थलों तक पहुंच और बेहतर हो जाएगी.

अब नजरें स्टे हटने के आदेश पर

वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के औपचारिक आदेश पर टिकी हैं. जैसे ही स्टे हटेगा, NHAI बरेठा घाट के बचे हुए 20.9 किलोमीटर हिस्से पर काम शुरू करेगा, जिससे वर्षों से अधूरा पड़ा यह अहम कॉरिडोर आखिरकार पूरा हो सकेगा.

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