किसानों के लिए चाहे उनके खेतों में लहराती फसलें हो या उनके घर और गोदाम में रखे अनाज के भंडारण, उनका सबसे बड़ा अदृश्य दुश्मन है - चूहा. चूहे ना केवल करोड़ों रुपये के मूल्य की फसलों और उनके अनाज को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों को भी आमंत्रित करते हैं. अक्सर देखा जाता है कि चूहों के कारण किसानों की शत प्रतिशत फसलें चौपट हो जाती हैं. यह पीड़ा सिर्फ राजस्थान की नहीं बल्कि देश भर के किसानों की रही है. लेकिन अब जोधपुर में स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान यानी काजरी ने किसानों की फसलों को चूहों से बचाने के लिए अनूठी रणनीति को बनाया है. यह पहल धरातल पर भी सार्थक साबित हो रही है जहां अब तक देश भर के विभिन्न राज्यों में हजारों किसानों को काजरी के द्वारा किए गए इस नवाचार का लाभ मिल चुका है.

काजरी के वैज्ञानिकों की ओर से किसानों को प्रशिक्षण
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चूहों से सेहत को भी खतरा
काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और इस प्रोजेक्ट से जुड़े डायरेक्टर प्रोफेसर विपिन चौधरी ने बताया कि किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने में चूहों की बड़ी भूमिका रहती है. भारत में चूहों से हर वर्ष बड़ी मात्रा में खाद्यान्न नष्ट होता है जो बड़ी बात है. लेकिन चूहे केवल अनाज नहीं खाते, बल्कि यह मलमूत्र और बालों से भी उस अनाज को दूषित कर देते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए भी काफी गंभीर खतरा होता है.
काजरी के वैज्ञानिकों का कहना है कि चूहों पर नियंत्रण के लिए केवल जहर का प्रयोग ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन्टीगरेटेड रोडेन्ट मैनेजमेंट सिस्टम को भी अपनाने की आवश्यकता है. इसके जरिये खेतों और गोदामों की नियमित सफाई करने के साथ ही उन्हें सुरक्षित भंडारण और चूहों के बिलों को नष्ट करने के साथ ही समय-समय पर निगरानी और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही रासायनिक नियंत्रण को उपयोग में लेने की भी सलाह दी जाती है.

खेतों में चूहों के लिए फसलों के हिसाब से केमिकल वाले चुग्गे दिए जाते हैं
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विशेष चुग्गों से नियंत्रण
प्रोफेसर विपिन चौधरी ने बताया कि हर राज्य में चूहों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया काफी अलग है. उन्होंने कहा, "राजस्थान की बात करें तो विशेष रूप से यहां बाजरे की पैदावार ज्यादा होती है. यहां रासायनिक तरीकों से बाजरे में केमिकल मिलाकर उन्हें खत्म किया जाता है. इसमें विशेष रूप से चीजों को नियंत्रण हेतु रासायनिक नियंत्रण की विधि है जिसमें जिंक फास्फाइड और ब्रोमाइड लोन बी और ब्रोमाइड अलोन से तैयार चुग्गे से चूहों को नियंत्रित किया जाता है."
उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत विभिन्न केंद्रों के जरिए किसानों को विशेष तरह का चुग्गा बनाने की विधि बताई जाती है. साथ ही उन्हें बताया जाता है कि किन-किन बातों की सावधानी रखी जानी चाहिए. इस परियोजना के जरिए ने ट्रिप बैरियर सिस्टम(टीबीएस)की शुरुआत भी की गई है जो विशेष रूप से धान के खेतों में चूहा प्रबंधन के लिए एक वैज्ञानिक और कम लागत वाला और पर्यावरण के अनुकूल समाधान के रूप में भी उभरा है. देश भर के विभिन्न राज्यों में चूहों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया का धरातल पर सकारात्मक असर भी देखा जा रहा है.
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