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'सिर्फ 38 हिरण रहेंगे दिल्ली, बाकी सबको भेजिए राजस्थान' सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिरणों को इन दो टाइगर रिजर्व भेजने की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के डियर पार्क में हिरणों की आबादी के बारे में एक समिति की सिफारिश को स्वीकार करते हुए अहम फैसला सुनाया है.

'सिर्फ 38 हिरण रहेंगे दिल्ली, बाकी सबको भेजिए राजस्थान' सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिरणों को इन दो टाइगर रिजर्व भेजने की तैयारी
हिरणों को पहले भी राजस्थान भेजा गया है
IANS

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दक्षिण दिल्ली के डियर पार्क में हिरणों की संख्या को 38 रखा जाए और बाकी सभी को राजस्थान के दो टाइगर रिजर्व भेजा जाए. अदालत ने सोमवार को अपने फैसले में कहा कि डियर पार्क को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) की मंजूरी से ही "मिनी ज़ू" के रूप में रखा जा सकता है और हिरणों की संख्या को काफी कम करके 38 तक सीमित किया जा सकता है. अदालत के इस आदेश से पार्क के शेष हिरणों को राजस्थान के दो बाघ अभ्यारण्यों में स्थानांतरित करने का रास्ता साफ हो गया है.

पहले ही भेजे जा चुके हैं 260 हिरण

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने एक गैर-सरकारी संगठन न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई के बाद ये आदेश जारी किए. एनजीओ ने याचिका में पार्क से हिरणों को राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने पर आपत्ति जताई गई थी. दिल्ली के डियर पार्क से अब तक 260 हिरणों को स्थानांतरित किया जा चुका है.

अदालत ने साथ ही दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश दिया कि वह हिरणों की संख्या कम होने के बाद उनका ध्यान रखने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करे, रसद की व्यवस्था करे और साथ ही कर्मचारियों को प्रशिक्षित करे. अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली के डियर पार्क में हिरणों की संख्या इस प्रकार से रखी जाए कि उनमें 15 नर और 23 मादा हिरणियां हों.

पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि 10 एकड़ के इस पार्क को "संरक्षित वन" के रूप में बनाए रखा जाना चाहिए और भविष्य में किसी भी परिस्थिति में इसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए.

इससे पहले अदालत ने एक सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी (सीईसी) को पार्क और पुनर्वास स्थलों के निरीक्षण करने का काम सौंपा था. समिति ने अपनी सिफारिश में स्थानांतरण का समर्थन करते हुए कहा कि पार्क में हिरणों की बड़ी आबादी को बनाए रखने की क्षमता नहीं है.

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Photo Credit: IANS

असाधारण परिस्थितियों में ही वन से बाहर रखे जाएं

पीठ ने पशुओं के कल्याण को लेकर जताई गई चिंताओं का समर्थन करते हुए टिप्पणी की कि वन्यजीव होने के नाते हिरणों को असाधारण और कानूनी रूप से उचित परिस्थितियों को छोड़कर, सीमित बाड़ों में नहीं रखा जाना चाहिए.

सीईसी ने यह भी बताया कि चिड़ियाघर प्रबंधन मानदंडों के बार-बार उल्लंघन, हिरणों की आबादी को नियंत्रित करने में विफलता और अगस्त 2021 में लाइसेंस समाप्त होने के कारण  दिल्ली के डियर पार्क की "मिनी ज़ू" की मान्यता वापस ले ली गई थी.

सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर 2025 में हिरणों के स्थानांतरण पर रोक लगा दी और सीईसी को पार्क की क्षमता और स्थानांतरित जानवरों की स्थिति सहित प्रमुख मुद्दों का आकलन करने के लिए कहा था.

समिति की सिफारिश

अदालत ने समिति के निष्कर्षों को स्वीकार करते हुए कहा कि मौजूदा मानदंडों के तहत पार्क में केवल 38 चित्तीदार हिरणों को ही "स्थायी और मानवीय तरीके से" रखा जा सकता है. समिति ने कहा कि हिरणों के प्रत्येक जोड़े को बाड़े में रखने के लिए कम-से-कम 1,500 वर्ग मीटर की जगह जरूरी होती है. ऐसी स्थिति में लगभग 29,000 वर्ग मीटर के अनुमानित उपयोगी क्षेत्र के साथ पार्क में लगभग 19 जोड़े हिरण रह सकते हैं.

अदालत ने आदेश दिया कि हिरणों का आगे का स्थानांतरण निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करते हुए और केंद्रीय पर्यावरण आयोग (सीईसी) की देखरेख में समयबद्ध तरीके से किया जाए. सीईसी की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नियंत्रित परिस्थितियों में पाले गए हिरण खुले वन में रह पाने में कठिनाई का सामना कर सकते हैं, जिससे अचानक से उनका स्थानांतरण हानिकारक हो सकता है.

वन्यजीव स्थानांतरण को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनी ढांचे में कमियों को ध्यान में रखते हुए दालत ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को निर्दश दिया कि वह सीईसी के सुझाए दिशा-निर्देशों की छह महीने के भीतर समीक्षा करे और अपनी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करे. अदालत ने मामले को आगे की निगरानी के लिए अगले वर्ष 19 जनवरी को सूचीबद्ध किया है.

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