सुप्रीम कोर्ट ने आज ट्रैवल ब्लॉगर और यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिन पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है. कोर्ट ने कहा कि "देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता." 7 मार्च को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की तरफ से जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती देने वाली मल्होत्रा की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एससी शर्मा की पीठ ने उनके खिलाफ लगे आरोपों को "बेहद गंभीर" बताया.
पीठ ने कहा, "आपके खिलाफ ये बेहद गंभीर आरोप हैं और आपका बचाव मुकदमे का विषय है."
ज्योति मल्होत्रा को क्यों नहीं मिली जमानत
ज्योति मल्होत्रा के वकील ने दलील दी कि उन्हें पिछले साल 16 मई को गिरफ्तार किया गया था और आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने के बावजूद वे एक साल से अधिक समय से हिरासत में हैं.हालांकि, अदालत ने कहा कि आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं.
हरियाणा के हिसार की निवासी मल्होत्रा पर पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है. वह 'ट्रैवल-विद-जो' नाम से एक यूट्यूब चैनल चलाती थीं.
ज्योति मल्होत्रा पर क्या है आरोप
हरियाणा पुलिस की तरफ से दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी से उनकी मुलाकातों के कथित सबूत जुटाने के बाद, उनके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया, जो देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है. जांचकर्ताओं के अनुसार, मल्होत्रा बाद में पाकिस्तान गईं और वहां उन्होंने पाकिस्तान की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों से मुलाकात की, जिनके नाम उन्होंने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर उजागर किए. पुलिस का आरोप है कि वह कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में रहीं और हिमाचल प्रदेश के पांडोह बांध, रणनीतिक प्रतिष्ठानों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के वीडियो फुटेज का आदान-प्रदान किया.
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी माना
जांच के दौरान, हरियाणा पुलिस को यह भी पता चला कि ज्योति मल्होत्रा कथित तौर पर पाकिस्तान उच्चायोग में एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से गुप्त रूप से मिलती थी. दानिश को बाद में केंद्रीय विदेश मंत्रालय द्वारा अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया गया और 14 मई, 2025 को भारत छोड़ने का आदेश दिया गया. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पहले उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और बीएनएस की धारा 152 के तहत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं.
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