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लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर थे संयम लोढ़ा; विदेशी पिस्टल और 36 कारतूस, दो शूटर गिरफ्तार, पुलिस का खुलासा

राजस्थान में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की हत्या की कथित साजिश का खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े नेटवर्क ने नेपाल से दो शूटर भेजे थे, जिन्होंने कई दिनों तक फार्महाउस की रेकी की. AGTF की कार्रवाई में दोनों गिरफ्तार कर लिए गए और विदेशी हथियार बरामद किए गए.

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर थे संयम लोढ़ा; विदेशी पिस्टल और 36 कारतूस, दो शूटर गिरफ्तार, पुलिस का खुलासा
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर थे संयम लोढ़ा, AGTF ने नाकाम की साजिश
NDTV
  • नेपाल से आए शूटर, विदेशी पिस्टल और 36 कारतूस; पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की हत्या की साजिश का खुलासा
  • फर्जी आधार कार्ड, होटल में ठहराव और फार्महाउस की रेकी; चौंकाने वाला खुलासा
  • संयम लोढ़ा क्यों थे निशाने पर? पुलिस कई एंगल से कर रही जांच
जयपुर:

राजस्थान में कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की कथित हत्या की साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. पुलिस जांच में सामने आया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आर्जू बिश्नोई और उसके सहयोगी सुमित सन्नी ने पूर्व विधायक की हत्या की योजना बनाई थी. इस साजिश को विदेश से संचालित करने और हरियाणा के नेटवर्क के जरिए स्थानीय स्तर पर मदद पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं. नेपाल से आए दो शूटर कई दिनों तक संयम लोढ़ा के फार्महाउस की रेकी करते रहे, लेकिन एजीटीएफ और पुलिस की सतर्कता के चलते कथित वारदात अंजाम तक नहीं पहुंच सकी.

हत्या की साजिश का खुलासा, गैंगस्टर नेटवर्क पर पुलिस की नजर

राजस्थान पुलिस और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) की जांच में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है.

पुलिस के अनुसार इस साजिश के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आर्जू बिश्नोई और सुमित सन्नी का नाम सामने आया है. आरोप है कि दोनों ने विदेश में बैठकर हत्या की योजना तैयार की और उसे अंजाम देने के लिए आपराधिक नेटवर्क का सहारा लिया.

जांच एजेंसियों के अनुसार हरियाणा में सक्रिय गैंग के सहयोगियों को शूटरों को स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया था.

संयम लोढ़ा

संयम लोढ़ा

कौन हैं संयम लोढ़ा?

संयम लोढ़ा राजस्थान के सिरोही जिले से तीन बार विधायक रह चुके हैं. छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले लोढ़ा कांग्रेस संगठन और विधानसभा दोनों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं. 2018 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बावजूद निर्दलीय चुनाव जीतना उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा और चर्चित मोड़ माना जाता है. विधायक रहने के साथ-साथ संयम लोढ़ा कांग्रेस संगठन में भी सक्रिय रहे. उन्होंने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं. वह AICC सदस्य सहित पार्टी के विभिन्न पदों पर रहे.

  • 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सिरोही सीट से चुनाव लड़ा और पहली बार विधायक बने.
  • 2003 में फिर सिरोही विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर लगातार दूसरी बार विधायक बने.
  • 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार भाजपा नेता ओटाराम देवासी से हार का सामना करना पड़ा.
  • 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया. इसके बावजूद संयम लोढ़ा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया और भाजपा के ओटाराम देवासी को 10,253 वोटों से हराकर तीसरी बार विधायक बने.
संयम लोढ़ा को मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत का करीबी माना जाता है. 2018 से 2023 के बीच विधायक रहते हुए संयम लोढ़ा तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार भी रहे। इस दौरान वे राज्य की राजनीति और प्रशासनिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे. 

संयम लोढ़ा पेशे से वकील है और राजस्थान हाई कोर्ट में सेवाएं दे चुके हैं. सिरोही क्षेत्र में उनका प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है और वे राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं.

नेपाल से राजस्थान पहुंचे थे शूटर

एडीजी दिनेश एमएन के अनुसार इस ऑपरेशन के लिए जिन दो शूटरों को नेपाल से राजस्थान भेजा गया, उनकी पहचान जसकरण और राजेंद्र के रूप में हुई है.

पुलिस का दावा है कि दोनों पंजाब के कई आपराधिक मामलों में वांछित हैं और उन पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम भी घोषित है.

बताया जा रहा है कि दोनों पिछले करीब डेढ़ साल से नेपाल में फरारी काट रहे थे. वहां से मध्य प्रदेश के रास्ते राजस्थान पहुंचे और सिरोही जिले के सिरोई क्षेत्र में ठहरे.

पुलिस की गिरफ्त में शूटर

पुलिस की गिरफ्त में शूटर

कई दिनों तक की गई फार्महाउस की रेकी

जांच में सामने आया है कि दोनों शूटरों ने कई दिनों तक संयम लोढ़ा के फार्महाउस की रेकी की. पुलिस के अनुसार वे यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि पूर्व विधायक किस समय फार्महाउस पर आते हैं, कौन-कौन उनसे मिलने पहुंचता है और वारदात के बाद कौन-सा रास्ता सुरक्षित रहेगा. होटल, ढाबों और अन्य स्थानों से शूटरों के आने-जाने के सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं.

निकाय चुनाव बना साजिश की राह में बाधा

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि उसी दौरान राजस्थान में निकाय चुनाव चल रहे थे. चुनावी गतिविधियों के कारण इलाके में जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही बढ़ गई थी. फार्महाउस के आसपास भीड़भाड़ अधिक होने से शूटरों को कथित वारदात के लिए अनुकूल मौका नहीं मिल सका. इसके बाद दोनों सिरोही से निकलकर जोधपुर पहुंच गए.

रेकी करते हुए आरोपी

रेकी करते हुए आरोपी

फर्जी आधार कार्ड से होटल में ठहरे

जोधपुर पहुंचने के बाद दोनों आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया. वे स्थानीय होटल में ठहरे हुए थे, जबकि दूसरी ओर एजीटीएफ लगातार उनके मूवमेंट पर नजर बनाए हुए थी. सूचना मिलने पर एजीटीएफ इंस्पेक्टर राम सिंह ने जोधपुर पुलिस को इनपुट दिया, जिसके बाद संयुक्त कार्रवाई में दोनों शूटर गिरफ्तार कर लिए गए.

मोबाइल से मिले अहम सबूत

पूछताछ और मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को संयम लोढ़ा की तस्वीरें और अन्य संदिग्ध सामग्री मिली. इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियों को यह विश्वास हुआ कि आरोपी केवल रेकी के लिए नहीं, बल्कि हत्या की नीयत से राजस्थान पहुंचे थे.

हथियार बरामद हुए

हथियार बरामद हुए

विदेशी पिस्टल और 36 कारतूस बरामद

गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस उन्हें सिरोई हाईवे के पास लेकर गई. वहां झाड़ियों में छिपाकर रखे गए हथियार बरामद किए गए. पुलिस के मुताबिक बरामद हथियारों में तुर्की और ऑस्ट्रेलिया निर्मित विदेशी पिस्टल शामिल हैं. इसके अलावा 36 जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए. इससे संकेत मिलता है कि कथित हमले की तैयारी पहले ही पूरी कर ली गई थी.

हरियाणा कनेक्शन भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों के अनुसार हरियाणा के तीन लोगों को भी हिरासत में लिया गया है. आरोप है कि इन लोगों ने शूटरों को स्थानीय स्तर पर वाहन, ठिकाना और अन्य सहायता उपलब्ध कराई. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की अन्य कड़ियों की तलाश कर रही है.

क्यों निशाने पर थे संयम लोढ़ा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को निशाना क्यों बनाया गया. पुलिस फिलहाल कई पहलुओं पर जांच कर रही है. एक एंगल कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग और संयम लोढ़ा के बीच पुराने विवादों से जुड़ा बताया जा रहा है. वहीं दूसरा एंगल राजस्थान में गैंग की दहशत और प्रभाव बढ़ाने की रणनीति से संबंधित माना जा रहा है. हालांकि पुलिस ने हत्या के पीछे के अंतिम मकसद पर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष घोषित नहीं किया है.

सुरक्षा बढ़ी, जांच जारी

एजीटीएफ और राजस्थान पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से पूर्व विधायक की हत्या की कथित साजिश समय रहते नाकाम हो गई. संयम लोढ़ा की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दो शूटर गिरफ्तार किए जा चुके हैं, तीन संदिग्ध सहयोगी हिरासत में हैं और हथियार बरामद हो चुके हैं. अब जांच एजेंसियां इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड, विदेश से संचालन करने वाले नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई हैं.

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