जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स में अब से अगले कुछ घंटे भारत के अभियान के लिए बहुत ही अहम होने जा रहे हैं. ये वो घंटे हैं, पूरे अभियान के लिए बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकते हैं. और करोड़ों खेलप्रेमियों की नजरें इन अगले कुछ घंटों पर लगी हुई हैं. चलिए बारी-बारी से जान लीजिए कि ये शुरू हो चुके इस उम्मीदों के टर्निंग प्वाइंट में कौनन-कौन से खेल हैं. और इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी कौन हैं.
टाइम खेल
3:35 शॉटपुट
4:33 पोल वॉल्ट
5.02 10,000 मी. रेस
5:10 हैमर थ्रो

(मनप्रीत कौर soure: X)
शॉटपुट में कौन बनेगा चैंपियन?
मनप्रीत कौर भारत की अनुभवी और दिग्गज महिला शॉट पुट खिलाड़ी हैं जिन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर इस खेल में अपना वर्चस्व कायम रखा है. एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी मनप्रीत के नाम शॉट पुट में कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं. अत्यधिक दबाव और प्रतिस्पर्धा के बीच भी उनका अनुभव भारतीय दल के लिए हमेशा अहम रहा है, और घरेलू व एशियाई सर्किट में उन्होंने कई पदक जीते हैं. तकनीकी रूप से मजबूत मनप्रीत ने अपनी ताकत और वापसी करने की क्षमता से खुद को भारतीय एथलेटिक्स टीम की एक मजबूत कड़ी के रूप में स्थापित किया है.
वहीं, शॉटपुट में ही कृष्णा जयशंकर मेनन भारत की उभरती हुई और प्रतिभाशाली महिला शॉट पुट खिलाड़ी हैं. चेन्नई से ताल्लुक रखने वाली कृष्णा ने इंडोर सर्किट में 17 मीटर की दूरी पार करने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा था और अमेरिकी एनसीएए सर्किट में भी सफलता हासिल की है. मौजूदा सत्र में उन्होंने लगातार 17 मीटर से अधिक के थ्रो किए हैं और सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उनका एक बड़ा मुकाबला है. उनकी फिटनेस और लंबाई उन्हें थ्रोइंग सर्कल में एक अतिरिक्त लाभ देती है तथा अनुभवी मनप्रीत कौर के साथ उनकी मौजूदगी भारत की पदक की उम्मीदों को मजबूत करती है.

(सिंधुश्री गणेश फोटो: सोशल मीडिया)
पोलवॉल्ट में आएगा पदक? (4:33 बजे)
सिंधुश्री गणेश भारत की स्टार महिला पोल वॉल्ट खिलाड़ी हैं जो कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले से ताल्लुक रखती हैं. शुरुआती दिनों में 400 मीटर की धावक रहीं सिंधुश्री ने कोच के सुझाव पर पोल वॉल्ट को अपनाया और आर्थिक तंगी का सामना करते हुए राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया. एक समय उधार के पोल की मदद से राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने वाली सिंधुश्री आज 4.25 मीटर या उससे अधिक की छलांग लगाने वाली चुनिंदा भारतीय एथलीटों में शामिल हैं. उनकी यह सफलता देश की उन तमाम युवा लड़कियों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो संसाधन न होने पर भी बड़े सपने देखती हैं.
हैमर-थ्रो में कौन होगा पास? (5:10 बजे)
इस खेल में भारत के दो खिलाड़ी पदक के लिए थ्रो करेंगे. दवनीत सिंह भारत के प्रमुख पुरुष हैमर थ्रो एथलीट हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है. राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में निर्धारित मानक को पार कर एशियाई खेलों का स्थान पक्का करने वाले दवनीत का सर्वश्रेष्ठ थ्रो लगभग 69-70 मीटर के दायरे में रहा है, जो उन्हें एशियाई स्तर पर शीर्ष खिलाड़ियों के करीब रखता है. थ्रोइंग इवेंट्स में उनकी शारीरिक क्षमता और टर्न तकनीक काफी सटीक मानी जाती है, और घरेलू सर्किट में वह सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में गिने जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक जीतने की कड़ी मेहनत में जुटे दवनीत इस महामुकाबले में अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को बेहतर करने उतरे हैं.
प्रवीण कुमार भारत के प्रतिभाशाली पुरुष हैमर थ्रो एथलीट हैं जिन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर एशियाई खेलों का टिकट हासिल किया था. घरेलू स्पर्धाओं में 69 मीटर से अधिक का थ्रो फेंककर अपनी बेहतरीन फॉर्म का परिचय देने वाले प्रवीण की गिनती देश के सबसे मजबूत और होनहार थ्रोअर्स में होती है. उनकी ताकत और थ्रो के दौरान रोटेशन की गति उन्हें मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनाती है तथा राष्ट्रीय शिविरों में वह लगातार अपने खेल की बारीकियों पर काम कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने के साथ ही उनके प्रदर्शन में परिपक्वता आई है और एशियाई खेलों के इस कड़े मुकाबले में वह एशियाई दिग्गजों को कड़ी चुनौती देने उतरे हैं.

गुलवीर पर टिकी करोड़ों की नजर (5. 02 बजे)
गुलवीर सिंह भारत के एक शीर्ष और प्रसिद्ध लंबी दूरी के धावक हैं जो भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर सेवा दे रहे हैं. उन्होंने ट्रैक और रोड रेसिंग दोनों में भारत के लिए कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े हैं तथा 5000 मीटर और 10,000 मीटर स्पर्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है. एशियाई प्रतियोगिताओं और चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले गुलवीर अपनी सहनशक्ति और फिनिशिंग स्पीड के लिए जाने जाते हैं. ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले गुलवीर एशियन गेम्स की लंबी दूरी की दौड़ स्पर्धाओं में भारत के सबसे बड़े पदक दावेदारों में गिने जाते हैं, और खेल के प्रति उनका अनुशासन व समर्पण युवा एथलीटों के लिए प्रेरणास्त्रोत है.
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