राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना ने सैन्य अभ्यास किया. युद्धाभ्यास 'रोटर क्लैप-III' सप्ताहभर चला, जो शनिवार (1 अगस्त) को पूरा हुआ. इस हाई-इंटेंसिटी हेलीकॉप्टर अभ्यास के दौरान ड्रोन और मानव रहित एयर सिस्टम के खतरे से निपटने पर फोकस किया गया. वायुसेना के लगभग सभी प्रमुख हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म ने हिस्सा लिया और रेगिस्तान में अपनी ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन किया.
हेलीकॉप्टर बेड़े की जवाबी कार्रवाई का परीक्षण
इस अभ्यास की थीम 'काउंटर-यूएएस' थी, जिसका उद्देश्य हेलीकॉप्टर बेड़े की युद्धक तैयारियों को मजबूत करना था. साथ ही बदलते युद्धक्षेत्र में उभरती चुनौतियों के बीच परिचालन रणनीतियों का परीक्षण भी किया गया. अभ्यास में युद्ध जैसी परिस्थितियां तैयार कर एयरक्रू ने मिशन प्लानिंग, त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय और संयुक्त अभियान क्षमता को परखा गया.
सटीक हवाई हमले से लेकर घायलों को सुरक्षित निकालने पर फोकस
पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज देश के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में शामिल है. वहां लाइव ऑपरेशनल ड्रिल के लिए वास्तविक युद्ध जैसा माहौल तैयार किया गया. यहां आधुनिक युद्ध में लगातार बढ़ रहे ड्रोन खतरों के बीच हेलीकॉप्टर अभियानों की प्रभावशीलता और प्रतिक्रिया क्षमता का आंकलन किया गया.

रेगिस्तान में IAF के हेलीकॉप्टरों ने दिखाई ताकत
अभ्यास के दौरान हेलीकॉप्टरों ने सटीक हवाई हमले, युद्धक्षेत्र में सैनिकों को सहायता, टोही मिशन, सैनिकों की तैनाती, घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने और हवाई-जमीनी खतरों के खिलाफ समन्वित ऑपरेशन जैसे कई महत्वपूर्ण मिशनों का प्रदर्शन किया. चुनौतीपूर्ण रेगिस्तानी इलाके में विभिन्न हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म के बीच तालमेल भी इस अभ्यास का प्रमुख हिस्सा रहा.
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