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'चीकू' बना दुलारा, 2 महीने तक बकरी का दूध पिलाकर पाला खरगोश का बच्चा, विदाई में फूट-फूटकर रोया पर‍िवार

आवारा कुत्‍तों से बचाकर खरगोश के बच्‍चे को घर लाया और पाला. उसका नाम चीकू रख द‍िया, और वह धीरे-धीरे पर‍िवार का ह‍िस्‍सा बन गया. 

'चीकू' बना दुलारा, 2 महीने तक बकरी का दूध पिलाकर पाला खरगोश का बच्चा, विदाई में फूट-फूटकर रोया पर‍िवार
परिवार नम आंखों से खरगोश को वन विभाग को सौंपा.

जैसलमेर में एक नन्हे से खरगोश के बच्चे को परिवार ने सिर्फ बचाया ही नहीं, बल्कि उसे अपने घर के सदस्य और बच्‍चे की तरह प्यार देकर बड़ा किया. जब उसे वन विभाग को सौंपने का समय आया तो पूर परिवार फूट-फूटकर रोया. यह दृश्‍य देखकर आसपास खड़े लोगों की आंखें भी नम हो गईं. लाठी कस्बे निवासी नरपतराम की बेटी किरण ने करीब 2 महीने पहले एक मासूम खरगोश के बच्चे को मौत के मुंह से बचाया था.

गांव के पास एक मादा खरगोश ने बच्चे को जन्म दिया था. इसके बाद आवारा कुत्‍तों के हमले में उसकी मौत हो गई. मां के बिना तड़प रहे नन्हे खरगोश को कुत्‍तों से बचाकर किरण अपने घर ले आई.

बकरी का दूध पिलाकर देखभाल की 

किरण ने खरगोश के बच्चे को बकरी का दूध पिलाकर उसकी देखभाल शुरू की. धीरे-धीरे पूरा परिवार उसके लालन-पालन में जुट गया. परिवार ने प्यार से उसका नाम चीकू रख दिया. शुरुआत में सहमा रहने वाला चीकू कुछ ही दिनों में परिवार से इतना घुल मिल गया कि पूरे दिन घर के लोगों के आसपास ही मंडराने लगा. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सबके हाथ से दूध पीने लगा, और खेलने लगा.

परिवार के साथ खेलने लगा था खरगोश.

परिवार के साथ खेलने लगा था खरगोश.

आंगन में खेलने लगा था खरगोश 

खरगोश बेहद डरपोक और इंसानों से दूर रहने वाले वन्य जीव माने जाते हैं, लेकिन चीकू ने परिवार के बीच ऐसा अपनापन महसूस किया कि उसका डर पूरी तरह खत्म हो गया. अब वह घर के आंगन और आसपास चहल-कदमी करने लगा था. किरण के पिता नरपतराम ने बताया कि अब खरगोश पूरी तरह स्वस्थ हो चुका था, और घर से बाहर भी जाने लगा था. ऐसे में उन्हें आवारा कुत्तों के हमले का डर सताने लगा था. इसके बाद परिवार ने वन विभाग को सूचना दी.

बकरी का दूध और ककड़ी खीरा खाने के लिए देता था परिवार.

बकरी का दूध और ककड़ी खीरा खाने के लिए देता था परिवार.

विदाई के समय रोया परिवार 

स्थानीय वन्यजीव प्रेमी विक्रम दर्जी, जयप्रकाश देवड़ा, फुसाराम नाई और चन्द्रशेखर पंवार की मौजूदगी में खरगोश के बच्चे को वनरक्षक रमेश सिंह राजपुरोहित सहित वन विभाग की टीम को सुपुर्द कर दिया गया. इस दौरान सबसे भावुक पल तब आया, जब चीकू को विदा करते समय किरण सहित पूरे परिवार फूट-फूटकर रोया. यह कहानी सिर्फ एक खरगोश की नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच प्रेम, संवेदना और जिम्मेदारी के अनमोल रिश्ते की मिसाल बन गई है.

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