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'जूते फटे थे, हौसले नहीं!', सचिन सिवाच बनना आसान नहीं, बमलौदा से लेकर ग्लासगो तक की कहानी इमोशनल कर देगी

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लोगों को मुक्केबाज सचिन सिवाच से काफी उम्मीदें हैं. वह 60 किलोग्राम भार वर्ग में दावेदारी पेश करेंगे.

'जूते फटे थे, हौसले नहीं!', सचिन सिवाच बनना आसान नहीं, बमलौदा से लेकर ग्लासगो तक की कहानी इमोशनल कर देगी
सचिन सिवाच

कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें सीजन का आगाज हो चुका है. टूर्नामेंट के आगाज के साथ ही देशवासियों को कुछ खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद भी जगने लगी है. जिसमें हरियाणा के 'लाल' होनहार मुक्केबाज सचिन सिवाच (Sachin Siwach) का भी नाम शामिल है. 26 वर्षीय सिवाच कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान 60 किलोग्राम भार वर्ग में दावेदारी पेश करेंगे. जारी टूर्नामेंट में लोगों को सिवाच से इसलिए भी ज्यादा उम्मीदें हैं क्योंकि वह वर्ल्ड और युवा खिताब अपने नाम कर चुके हैं. मौजूदा समय में इंटरनेशनल लेवल पर वह लगातार देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. जिससे लोगों को उनसे पदक की ज्यादा आस है. 

बमलौदा से ताल्लुक रखते हैं सचिन सिवाच

सचिन सिवाच का जन्म छह दिसंबर साल 1999 में हरियाणा के सोनीपत जिले में स्थित बमलौदा नामक एक छोटे से गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम कृष्ण सिवाच है, जो देश के ओलंपिक पदक विजेता विजेंद्र सिंह के भाई हैं. बताया जाता है कि सचिन को उनके चाचा पवन सिवाच ने मुक्केबाजी में हाथ आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया था. 

10 साल की उम्र में सचिन ने शुरू कर दी थी प्रैक्टिस

सचिन सिवाच ने महज 10 साल की उम्र में साल 2009 में भिवानी स्थित कैप्टन हवा सिंह अकादमी में दाखिला लेने के बाद बॉक्सिंग शुरू कर दी थी. शुरुआत में उनके कोच संजय शेओरान उनको दाखिला देने के लिए इच्छुक नहीं थे. क्योंकि वह बचपन में स्वस्थ नहीं थे और कुपोषित थे.  

मगर यहां से उन्हें उनके पिता का साथ मिला. उन्होंने अपने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए अथक प्रयास किया. उन्होंने सबसे पहले उनके पोषण संबंधी जरूरतों का ध्यान दिया. जिसमें प्रतिदिन ताजा दूध शामिल था. 

सचिन के चमकने की कहानी 

सचिन ने सबसे पहले चमक जूनियर और युवा स्तर पर प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ बिखेरी. उन्होंने 2015 एआईबीए जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता. उसके बाद वह 2016 में एआईबीए युवा वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले तीसरे भारतीय मुक्केबाज बने. 

यही नहीं उन्होंने 2017 के राष्ट्रमंडल युवा खेलों में स्वर्ण पदक और एशियाई युवा मुक्केबाजी चैंपियनशिप में रजत पदक भी हासिल किया. उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए साल 2017 में एशियाई मुक्केबाजी महासंघ की तरफ से सर्वश्रेष्ठ एशियाई पुरुष युवा मुक्केबाज का पुरस्कार प्रदान किया गया. 

सीनियर सर्किट में कदम रखने के बाद सचिन ने 2019 में इंडिया ओपन इंटरनेशनल टूर्नामेंट में रजत पदक और जी-बी बॉक्सिंग टूर्नामेंट में कांस्य पदक हासिल किया. दक्षिण एशियाई खेलों में भी वह स्वर्ण पदक प्राप्त करने में कामयाब रहे. 

सचिन ने साल 2023 में सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में डेब्यू किया. जहां वह प्री क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करने में कामयाब रहे. साल 2024 में भी उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा. यहां वह वर्ल्ड ओलंपिक मुक्केबाजी क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट में सेमीफाइनल तक का सफर तय करते हुए पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के करीब पहुंच गए थे. मगर आखिरी के मुकाबलों में उन्हें किस्मत का साथ नहीं मिला जिससे उन्हें मायूसी हाथ लगी. 

चोटों से परेशान रहे सचिन

अपने करियर में सचिन को कई बार चोटों का सामना करना पड़ा. जिससे उनका करियर काफी प्रभावित हुआ. 2018-2019 के दौरान कलाई में लगी चोट की वजह से उनका करियर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ. 

यही नहीं इसके बाद पटियाला में अपेंडिक्स की आपातकालीन सर्जरी कराने के बाद उन्हें एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप से भी हटना पड़ा था. इस दौरान वह करीब एक महीने तक खेल से दूर रहे थे. 

चोट से उबरने के बाद सचिन ने धमाकेदार अंदाज में वापसी की. उन्होंने 2023 वर्ल्ड चैंपियनशिप के प्री क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया. उन्होंने एशियाई खेलों के क्वार्टर फाइनल में उपस्थिति दर्ज कराई थी. जहां उन्हें आगे के सफर से पहले चीनी मुक्केबाज लू पिंग के खिलाफ शिकस्त का सामना करना पड़ा.

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