- छत्तीसगढ़ की ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता.
- ज्ञानेश्वरी ने कुल मिलाकर 82 से 111 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर पदक की दौड़ में मजबूत दावेदारी दिखाई.
- नाइजीरिया की दिदीह ने गोल्ड मेडल जीता जबकि ज्ञानेश्वरी ने भारत के लिए रजत पदक हासिल किया.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया है. राजनांदगांव की रहने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं के 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया. ग्लास्गो (स्कॉटलैंड) में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने दमदार प्रदर्शन करते हुए भारत को पांचवां पदक दिलाया.
ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रतियोगिता के दौरान शानदार लिफ्ट लगाकर अपनी क्षमता का परिचय दिया. उन्होंने पहले चरण में 82 किलोग्राम, 85 किलोग्राम और 88 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया. इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में 103 किलोग्राम से शुरुआत की और फिर 107 किलोग्राम तथा 111 किलोग्राम वजन उठाकर पदक की दौड़ में अपनी मजबूत दावेदारी पेश की. उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें सिल्वर मेडल दिलाया.
नाइजीरिया की खिलाड़ी ने जीता गोल्ड
महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग में नाइजीरिया की खिलाड़ी दिदीह ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि ज्ञानेश्वरी यादव दूसरे स्थान पर रहीं और उन्होंने रजत पदक जीता. इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
भारत का वेटलिफ्टिंग में चौथा पदक
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वेटलिफ्टिंग भारत के लिए लगातार सफलता लेकर आई है. ज्ञानेश्वरी यादव का यह पदक इस खेल में भारत का चौथा पदक है. इससे पहले मीराबाई चानू ने गोल्ड मेडल जीता था, जबकि राजा मुथुपाडी और रिशिकांता सिंह ने सिल्वर मेडल अपने नाम किए थे. ज्ञानेश्वरी के पदक के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या पांच हो गई है.

छत्तीसगढ़ पुलिस में एएसआई हैं ज्ञानेश्वरी
खेल के साथ-साथ ज्ञानेश्वरी यादव एक जिम्मेदार सरकारी पद भी संभाल रही हैं. वह छत्तीसगढ़ पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद पर कार्यरत हैं. नौकरी और खेल के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है. उनकी उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा मानी जा रही है.
पहले भी जीत चुकी हैं कई अंतरराष्ट्रीय पदक
यह पहला मौका नहीं है जब ज्ञानेश्वरी ने देश का नाम रोशन किया हो. इससे पहले भी उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया है. सीनियर एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर और कांस्य पदक जीते थे. इसके अलावा खेलो इंडिया जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भी वह पदक जीत चुकी हैं.
साधारण परिवार से निकलकर बनाई बड़ी पहचान
ज्ञानेश्वरी यादव की सफलता की कहानी संघर्ष और मेहनत से भरी हुई है. उनके पिता दीपक यादव इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद ज्ञानेश्वरी ने अपने खेल पर लगातार मेहनत की और आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं. उनकी यह उपलब्धि न केवल राजनांदगांव और छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है.
ज्ञानेश्वरी यादव के सिल्वर मेडल जीतने के बाद राजनांदगांव में जश्न का माहौल है. खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों, पुलिस विभाग और स्थानीय लोगों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई है. लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर ज्ञानेश्वरी ने साबित कर दिया है कि मेहनत और लगन के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
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