भारतीय शटलर लक्ष्य सेन दिल्ली में जारी बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में उलटफेर का शिकार हुए हैं. उन्होंने राउंड ऑफ़ 32 मैच में अमेरिकी गैरेट टैन के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा है. पहला गेम जीतने के बाद लक्ष्य अगले दो गेम हार गए. टैन ने लक्ष्य सेन को हराने के लिए अविश्वसनीय वापसी की है. दुनिया में 92वें नंबर के 18 साल के टैन ने अपने पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में 2021 के ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट को 73 मिनट तक चले मुकाबले में 19-21, 21-19, 21-17 से हराया. 14वीं सीड वाले भारतीय खिलाड़ी लक्ष्य ने पहला गेम कड़े मुकाबले के बाद जीता. दूसरे गेम में टैन शुरू से ही आगे रहे. लक्ष्य ने चार गेम पॉइंट बचाए, लेकिन वह युवा खिलाड़ी को मैच को निर्णायक गेम तक ले जाने से नहीं रोक पाए.
हार के बाद लक्ष्य ने कहा,"यह एक अच्छा मैच था. मैं अपने प्रतिद्वंद्वी को पूरा श्रेय देता हूं. उन्होंने बहुत मजबूत खेल दिखाया. तीसरे सेट के आखिर तक हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे. मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया. आखिर में, यह मैच जीतने के लिए काफी नहीं था. मैं थोड़ा निराश हूं." लक्ष्य ने कहा,"पूरे मैच में उनका दबदबा रहा. मैं पिछड़ने के बाद वापसी करने की कोशिश कर रहा था. मेरे पास मौके थे. मैं स्कोर के अंतर को कम करने की कोशिश कर रहा था. लेकिन आखिरकार, प्वाइंट्स वही जीत रहे थे. मैं कई बार दबाव में खेल रहा था."
टैन के अटैकिंग गेम ने भी चुनौती पेश की, लेकिन लक्ष्य ने अपनी हार के लिए अमेरिकी खिलाड़ी के स्मैश को जिम्मेदार नहीं ठहराया. जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकी खिलाड़ी के अटैकिंग खेल की वजह से उन पर दबाव था, तो लक्ष्य ने कहा,"नहीं, ऐसा नहीं था.वे अच्छे स्मैश थे."
मैच की परिस्थितियों ने भी भूमिका निभाई. लक्ष्य ने बताया कि कोर्ट के किसी भी हिस्से से कोई खास फायदा नहीं मिल रहा था. जब लक्ष्य से कोर्ट के तथाकथित 'बेहतर' हिस्से पर खेलने की रणनीति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा,"मैं कोर्ट के उस हिस्से पर खेल रहा था, जो खेलने के लिहाज से कम फायदेमंद माना जाता है. आज दोनों हिस्से लगभग एक जैसे थे. तीनों गेम 21-19, 21-19 और 21-17 के स्कोर पर खत्म हुए. मुझे नहीं लगता कि आज किसी भी हिस्से से कोई साफ फायदा मिल रहा था."
लक्ष्य ने आगे कहा कि शटल की गति की वजह से प्वाइंट जीतना मुश्किल हो रहा था, खासकर लंबी रैलियों के दौरान. उन्होंने कहा,"रैलियां लंबी थीं. मुझे लगता है कि दूसरे दिनों की तुलना में, आज 'ड्रिफ्ट' (हवा का बहाव) का खेल पर उतना असर नहीं था. आप स्कोरलाइन देख सकते हैं. मुकाबला बराबरी का था. रणनीति वही रही क्योंकि वह अपने अटैक और डिफेंस, दोनों में काफी मजबूत था. मुझे ज्यादा मौके नहीं मिल रहे थे. साथ ही, खेल थोड़ा धीमा था. ऐसे में आपको आमतौर पर शॉट में वह जोर (पंच) नहीं मिल पाता। आप शॉट को उतनी अच्छी तरह से फिनिश नहीं कर पाते."
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