एक तरफ बुलेट ट्रेन और दूसरी तरफ सड़क मार्ग तक नहीं. मुंबई के करीब पालघर जिले के वाढीव गांव का मामला कुछ ऐसा ही है. सफाले और वैतरणा रेलवे स्टेशनों के बीच खाड़ी में एक द्वीप पर बसे वाढीव गांव के लोगों को अब तक सड़क नहीं मिल पाई है. नतीजा यह है कि हर दिन यहां के लोगों को रेलवे पटरियों से होकर एक तरफ से दूसरे तरफ जाना पड़ता है, जो बेहद जोखिम भरा होता है. छात्र हर दिन इसी तरह स्कूल जाते हैं, मरीजों को बाहर ले जाने में भी परेशानियां होती हैं. ऐसे में इस गांव के बच्चों और लोगों ने मुख्यमंत्री से सड़क बनवाने की गुहार लगाई है.
पालघर तालुका के दक्षिण में बसा आखिरी गांव
वाढीव गांव पालघर तालुका के दक्षिण में बसा आखिरी गांव है, जिसकी आबादी करीब साढ़े चार हजार है. वैसे तो यह गांव संपन्न है, लेकिन अगर यहां के नागरिकों को गांव से बाहर यानी विरार या सफाले शहर जाना हो तो उनके पास पश्चिम रेलवे की पटरियों से गुजरने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. आपात स्थिति में तो चक्क नाव से खाड़ी पार करनी पड़ती है. आजादी के 80 साल बाद भी सुरक्षित सड़क न होने के कारण यहां के स्कूली बच्चों और नागरिकों को हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करना पड़ता है. खास बात यह है कि इसी गांव के पास अब बुलेट ट्रेन गुजरने वाली है. लेकिन दुर्भाग्य है कि यहां अब तक सड़क मार्ग यहां नहीं पहुंचा है.
22 लोगों की हो चुकी मौत
वाढीव के ग्रामीणों के अनुसार मुताबिक पटरियों से रास्ता पार करने के चक्कर में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है. ग्रामीणों का दावा है कि मेडिकल इमरजेंसी के समय सही वक्त पर इलाज न मिल पाने के कारण भी 20 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. कुछ महीने पहले 28 साल के विशाल पाटिल को दिल का दौरा पड़ा था. सड़क न होने के कारण उन्हें एक झोली में लिटाकर रेलवे ट्रैक पार करते हुए इलाज के लिए ले जाया गया. इस सफर में करीब आधा घंटा लग गया. जिससे समय से इलाज नहीं मिल पाने की वजह से उनकी मौत हो गई. इसके अलावा, कुछ दिन पहले ही एक गर्भवती महिला को नाव के जरिए खाड़ी पार कराकर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. गांव तक एंबुलेंस के न पहुंच पाने के कारण आपात स्थिति में खतरा और भी बढ़ जाता है.
विधायक सदन में उठा चुके मुद्दा
सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कई बार शिकायत और मिन्नतें करने के बावजूद सड़क की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है. बोईसर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके विलास तरे का दावा है कि उन्होंने इस मामले में अब तक तीन बार पत्राचार किया है और विधानसभा सत्र में भी इस मुद्दे को उठाया है. लेकिन यह दुर्भाग्य ही है कि इतने सालों में उनके प्रयासों को भी सफलता नहीं मिली.
विडंबना यह है कि वाढीव गांव के इसी द्वीप के पास से पश्चिम रेलवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर DFCC, मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे के अलावा बुलेट ट्रेन गुजर रही है और प्रस्तावित ऑफ-शोर समुद्र में हवाई अड्डा भी यहीं पास में बनने वाला है. लेकिन गांव के लिए सड़क मार्ग तक नहीं है.
इनपुट:मनोज सातवी
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