- बृजभूषण शरण सिंह ने अखिलेश यादव की खुले दिल से तारीफ करते हुए उनके संस्कारों की प्रशंसा की है
- बृजभूषण शरण सिंह भाजपा से सांसद रहे और एक बार सपा में शामिल होकर चुनाव भी जीते थे
- मुलायम सिंह यादव और बृजभूषण शरण सिंह के बीच पारस्परिक सम्मान और दोस्ताना संबंध रहे हैं
बृजभूषण शरण सिंह से पिछले दिनों एक सवाल कांग्रेस और सपा में सीटों की खींचतान पर पूछा गया था. इस पर उनका जवाब था कि अखिलेश यादव बिना सब सूना है. वह यहीं नहीं रुके. एनडीटीवी से इंटरव्यू में यहां तक कहा कि मैं अपने बच्चों से कहता हूं कि यदि संस्कार सीखना हो तो मुलायम सिंह यादव के परिवार में 15 दिन बिताकर आएं. आपको पता लगेगा कि किसी की इज्जत कैसे की जाती है. इस तरह उन्होंने अखिलेश यादव की खुलकर तारीफ की. उनका ऐसा कहना था कि यूपी की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. उनका एक बेटा भाजपा से सांसद है तो एक विधायक है. खुद भी भाजपा में बड़ा कदम रखते हैं. फिर भी उनकी ओर से सपा नेता की सराहना करना मायने रखता है.
तथ्य यह भी है कि महिला पहलवानों की ओर से जब उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे. तब भी अखिलेश यादव की बृजभूषण ने तारीफ की थी. उनका कहना था कि वह अच्छे नेता हैं और सत्य के साथ खड़े हैं. वजह यह थी कि अखिलेश यादव ने इस मसले पर कोई टिप्पणी नहीं की थी. दरअसल बृजभूषण शरण सिंह भले ही राम मंदिर आंदोलन से उभरे नेता रहे हैं, लेकिन सपा से भी उनके रिश्ते कभी ज्यादा खराब नहीं रहे. मुलायम सिंह यादव से तो बृजभूषण के अच्छे संबंध थे. खुद भी नेताजी कहलाने वाले बृजभूषण शरण सिंह का मुलायम सिंह यादव के साथ सम्मान का रिश्ता था. बृजभूषण शरण सिंह उन्हें बड़े दिल वाला नेता मानते थे.
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कहा जाता है कि दोनों के शौक जैसे थे. मुलायम सिंह यादव अपनी युवावस्था में पहलवानी किया करते थे और बृजभूषण का कुश्ती से लगाव जगजाहिर है. एक तरफ अवध के राजपूत नेताओं में मुलायम सिंह यादव को राजा भैया प्रिय थे तो वहीं पूर्वांचल में बृजभूषण शरण सिंह उनकी पसंद थे. भाजपा से 5 बार सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह का ज्यादातर वक्त भगवा दल में ही गुजरा है, लेकिन एक बार वह सपा में ही चले गए थे. यही नहीं उन्होंने 2008 में आए विश्वास प्रस्ताव के दौरान क्रॉस वोटिंग कर दी थी. उन्होंने यूपीए का साथ दिया था. फिर एक्शन हुआ तो पार्टी ही छोड़ दी और सपा में चले गए. 2009 में सपा से ही कैसरगंज सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.
क्रॉस वोटिंग की और फिर सपा में ही चले गए बृजभूषण
इस तरह मुलायम सिंह यादव के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले बृजभूषण ने नेताजी के कहने पर सपा का ही दामन थाम लिया था. फिर पूरे 6 बाद 2014 में उनकी भाजपा में वापसी हुई. अब एक बार फिर से भाजपा में थोड़े बागी तेवर दिखा रहे बृजभूषण ने कयासों के दौर को तेज कर दिया है. हालांकि बाबरी विध्वस से जुड़ा बृजभूषण शरण सिंह का इतिहास सपा के एक वर्ग को चुभता भी रहा है. वजह यह कि बाबरी ढांचे के विध्वंस में जिन 38 लोगों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था, उनमें से एक बृजभूषण शरण सिंह भी थे. फिर भी सपा और बृजभूषण शरण सिंह का थोड़ी दूरी के साथ ही सही, लेकिन एक सम्मानजनक रिश्ता रहा है.
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