- बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की ज़मानत रद्द कर दी है और सरेंडर करने का आदेश दिया है
- कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की जमानत अनुमति पर सवाल उठाते हुए 18 आपराधिक मामलों में उनकी संलिप्तता की बात कही
- म्हात्रे के खिलाफ हत्या और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर और जघन्य अपराधों के मामले दर्ज हैं
शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे के डॉक्टरों और दूसरे स्टाफ मेंबरों पर हमले को गंभीरता से लेते हुए, बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी ज़मानत रद्द कर दी है. अदालत ने उन्हें रविवार शाम 5 बजे तक सरेंडर करने का आदेश दिया है. शनिवार को एक विशेष सुनवाई में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने म्हात्रे और उनके साथियों को मिली जमानत का स्वतः संज्ञान लिया.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायाधीश गौतम अंखाड की खंडपीठ ने कहा कि कल्याण की मजिस्ट्रेट कोर्ट, जिसने म्हात्रे को ज़मानत दी थी, उसने इस बात पर ठीक से विचार नहीं किया कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के इस कॉर्पोरेटर का नाम 18 आपराधिक मामलों में शामिल था, जिनमें हत्या और हत्या की कोशिश के मामले भी शामिल हैं.

न्यायाधीशों ने महाराष्ट्र में डॉक्टरों, खासकर नगर निगम और सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के 22 जुलाई को हड़ताल पर जाने के फैसले पर भी ध्यान दिया.
म्हात्रे और उनके साथियों की ज़मानत रद्द करने के बाद, बेंच ने "मानवता की सेवा" को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों से अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है.
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