17 दिसंबर 1933, बॉम्बे के जिमखाना मैदान, इन बातों से बरबस ही किसी भी भारतीय क्रिकेट फैंस को लाला अमरनाथ की याद आती है. लाला अमरनाथ, आजाद भारत में भारतीय टीम के पहले कप्तान. लाला अरमनाथ- भारत की तरफ से शतक लगाने वाले पहला खिलाड़ी. भारतीय सरजमीं पर शतक लगाने वाला पहला भारतीय. और वो भी ऐसे दौर में जब जिमखाना क्लब में भारतीयों को एंट्री नहीं मिलती थी. राज अंग्रजों का साथ और जिमखाना क्लब में जो भारतीय थे, वो वहां नौकरी करते थे. लेकिन इस एक तारीख ने भारतीय क्रिकेट के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया. यह शतक भारतीय क्रिकेट के वीजारोपण की तरह रहा. भारतीय क्रिकेट आज एक वटवृक्ष है, तो लाला अमरनाथ को इसका श्रेय देना होगा.
पहली बार भारत दौरे पर आई थी कोई टीम
साल 1933 में एक मजबूत इंग्लैंड टीम ने पहली बार भारत का दौरा करने का फैसला लिया था. 1932 में इंग्लैंड दौर पर गई टीम इंडिया ने लॉर्ड्स में मेजबान टीम को यह तो समझा ही दिया था कि भारत को हल्के में नहीं लिया जा सकता. ऐसे में बॉडीलाइन गेंदबाजी के जनक, जार्डिन ने दौरे के लिए एक ऐसी टीम चुनी जो मजबूत हो. कई परिचित नाम अनुपस्थित थे, लेकिन यह अभी भी मजबूत दल था.
ऐसा नहीं था कि भारत ने इससे पहले कोई टेस्ट नहीं खेला था या फिर जिमखाना क्लब पर पहली बार मैच हो रहा था, लेकिन यह अधिकारिक तौर पर किसी भी देश का भारत का पहला दौरा था. इससे पहले भारत के अलग-अलग विदेशी क्लबों के खिलाफ थे.
इस मुकाबले के लिए बॉम्बे में गजह का क्रेज था. इएसपीएनक्रिकइन्फो के लिए जेनी थॉम्पसन ने अपनी रिपोर्ट में भारत में पहले टेस्ट के अपने लेख में लिखा था,"जब 1933 में इंग्लैंड और इंडिया के बीच पहला टेस्ट होस्ट करने के लिए बॉम्बे को चुना गया, तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं थी. जगह, बॉम्बे जिमखाना, भी सही थी, अपने कूल, सफ़ेद कॉलोनियल आर्किटेक्चर के साथ, जिसका पवेलियन इंग्लैंड के किसी भी हरे-भरे गांव में अलग नहीं लगेगा."
और बदला गया जिमखाना क्लब का नियम
क्योंकि मैच जिमखाना क्लब में था, तो क्लब के अंदर भारतीयों के बैन के नियम को खत्म किया गया, ताकि प्लेयर्स को फैसिलिटीज़ इस्तेमाल करने की इजाज़त मिल सके. भारत का पहला मैच देखने के लिए 50 हजार लोगों की भीड़ आई थी. टेम्पररी टेंट और शामियानों बनाए गए. इस मैच के लिए टिकट की कीमत 100 रूपये तक थी. यह सस्ता नहीं थी. फिर भी हजारों की संख्या में लोग जमा हुए.
वो पल जब झूठ उठे फैंस
पहले दिन भारत तो भारतीय बल्लेबाज संघर्ष करते दिखे. पहली पारी में टीम इंडिया 219 पर ऑल-आउट हो गई. इसके बाद इंग्लैंड के लिए ब्रायन वेलेंटाइन और कप्तान डगलस जार्डाइन की साझेदारी से दूसरे दिन का खेल समाप्त होने पर इंग्लैंड ने पहली पारी में 4 विकेट के नुकसान पर 294 रन बना लिए थे. लेकिन तीसरे दिन का खेल खत्म होने से पहले तक हालात पूरी तरह से बदल गए थे.
आस-पास के गांवों में बात फैसने लगी कि भारत जीत रहा है और यह करिश्मा हुआ था, अमरनाथ और नायडू के बीच साझेदारी से. तीसरे विकेट के लिए दोनों के बीच 186 रन की पार्टनरशिप हो चुकी था और मैच पलटने का खतरा था. अमरनाथ अपना शतक लगा चुके थे.
जब लाला अमरनाथ ने इस लैंडमार्क का छुआ तो मैदान पर हंगामा मच गया. बहुत देर तक तालियां की गरगराहट रूकने का नाम नहीं ले रही थी. टोपियां हवा में उछाली गईं. दो दर्शक तो उन्हें माला पहनाने के लिए पिच पर दौड़ पड़े. जिससे कप्तान सीके नायडू को बहुत गुस्सा आया. उन्होंने उन्हें भगाने की कोशिश की थी. लाला अमरनाथ भारत के लिए शतक लगाने वाले पहले भारतीय बन चुके थे. और भारतीय क्रिकेट इतिहास में उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हुआ.
लाला का पहला शतक उनके करियर का आखिरी शतक भी रहा. उन्होंने इसके बाद चार अर्द्धशतक और लगाए. लाला के नाम कई रिकॉर्ड है. लेकिन पहला शतक और भारत में हुए पहले अधिकारिक टेस्ट में, इसने लाला को क्रिकेट इतिहास में अमर कर दिया.
लंबे समय तक रहा असर
लाला अमनराथ ने सिर्फ भारतीयों के हौसले को नहीं बढ़ाया था, बल्कि उन्होंने अपने बेटों को भी प्रभावित किया और वो भी इस कदर की उनके तीनों बेटे क्रिकेट बरे. सबसे बड़े बेटे सुरिंदर अमरनाथ, बाएं हाथ के बल्लेबाज थे, जिन्होंने 1976 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अपने टेस्ट डेब्यू में सेंचुरी बनाई थी. दूसरे बेटे मोहिंदर अमरनाथ. इनका नाम कोई कैसे भूल सकता है. भारत को 1983 विश्व विजेता बनाने वाला खिलाड़ी. 1983 की यादें आज भी फैंस के मन में ताजा हैं. जिमी के तौर पर पहचान बना चुके मोहिंदर 1983 वर्ल्ड कप में सेमी-फ़ाइनल और फ़ाइनल, में मैन ऑफ़ द मैच बने. उन्होंने 69 टेस्ट मैच खेले. जबकि सबसे छोटे बेटे राजिंदर अमरनाथ, हरियाणा के लिए फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट खेला और बाद में कोच बन गए. लाला ने जो बीच बोया था, उसका फल भारत को 1983 में विश्व विजेता बनकर मिला.
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