बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला डॉक्टरों और नर्सों के साथ मारपीट के मामले में शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने उनकी उम्र के आधार पर जमानत देने से इनकार करते हुए साफ कहा कि ऐसे आरोपी को कुछ और समय हिरासत में रहना चाहिए. सुनवाई के दौरान रमेश म्हात्रे की ओर से उनकी उम्र का हवाला देकर जमानत की मांग की गई थी. इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए तंज कसा कि वीडियो में आपकी फुर्ती देखकर ऐसा लगता है कि आप 25 साल के युवा हैं. कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि आपने महिलाओं और डॉक्टरों पर जिस तरह से हमला किया यह देखकर आश्चर्य होता है कि वे बच कैसे गए.
सामाजिक कार्यकर्ता होने पर उठाए गंभीर सवाल
अदालत ने म्हात्रे के सामाजिक कार्यकर्ता होने के दावे पर भी कड़े सवाल खड़े किए. बेंच ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते आपका कर्तव्य लोगों की सेवा करना है न कि उन पर हमला करना. कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि यदि कोई वकील आपका केस लड़ने से मना कर दे तो क्या आप उस पर भी हमला कर देंगे. यह सख्त टिप्पणियां एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंकड़ की डिवीजन बेंच ने की हैं.
निचली अदालत की राहत पर रोक
वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मिली जमानत पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को तुरंत पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था और चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर उनकी संपत्तियां कुर्क कर ली जाएंगी. इससे पहले मुंबई के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) अस्पताल में महिला डॉक्टर और नर्सों के साथ मारपीट के ठाणे जिले में सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत रद्द करने के बाद शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे रविवार को पुलिस स्टेशन में सरेंडर करने पहुंचे थे.
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