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Student Suicides: छात्र सुसाइड में महाराष्ट्र सबसे आगे, देश में हर दिन औसतन 40 छात्र हार रहे जिंदगी की जंग!

Suicide Death: साल 2024 के दौरान देशभर में 4,488 छात्र आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए. यानी भारत में औसतन हर दिन करीब 40 छात्र आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा रहे हैं. इनमें सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं. NCRB के आंकड़ों के अनुसार, देश में आत्महत्या करने वाला लगभग हर 8वां छात्र महाराष्ट्र का था.

Student Suicides: छात्र सुसाइड में महाराष्ट्र सबसे आगे, देश में हर दिन औसतन 40 छात्र हार रहे जिंदगी की जंग!
MAHARASHTRA LEADS NATION IN STUDENTS SUICIDE CASE

National Crime Records Bureau 2024: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो 2024 की “एक्सीडेंटल डेथ एंड सुसाइड इन इंडिया 2024” रिपोर्ट ने महाराष्ट्र के लिए बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की है. रिपोर्ट में छात्र आत्महत्या के केस में महाराष्ट्र देश में सबसे ऊपर पहुंच गया है. जहां दर औसतन 40 छात्र रोजाना सुसाइड कर रहे हैं. 2024 में राज्य में 1,909 छात्रों ने आत्महत्या की, जो देशभर में हुए कुल सुसाइड करने वाले छात्रों का 13.2% है.

साल 2024 के दौरान देशभर में 4,488 छात्र आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए. यानी भारत में औसतन हर दिन करीब 40 छात्र आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा रहे हैं. इनमें सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं. NCRB के आंकड़ों के अनुसार, देश में आत्महत्या करने वाला लगभग हर 8वां छात्र महाराष्ट्र का था.

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पिछले 10 वर्षों में देशभर में करीब 1.15 लाख छात्रों ने आत्महत्या कर जान दी है

रिपोर्ट के मुताबिक छात्र आत्महत्या के मामलों में महाराष्ट्र के बाद MP (10.9%), MP(10%) और तमिलनाडु (8.9%) का स्थान रहा. हालांकि महाराष्ट्र का आंकड़ा बाकी राज्यों की तुलना में सबसे अधिक चिंताजनक है. रिपोर्ट कहती है कि 2023 की तुलना में छात्र सुसाइड केस में 4.3%  की वृद्धि हुई है. 2015 से 2024 के बीच छात्र सुसाइड 62 % से अधिक वृद्धि हुई. वहीं,पिछले 10 वर्षों में देशभर में करीब 1.15 लाख छात्रों ने आत्महत्या की है.

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कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक दबाव से मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर 

विशेषज्ञों का कहना है कि महाराष्ट्र में कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक दबाव का बढ़ता माहौल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है. मुंबई, पुणे, नागपुर और कोटा की तर्ज पर विकसित हो रहे शिक्षा केंद्रों में करियर को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अपेक्षाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है.

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NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में आत्महत्या करने वाले छात्रों में 7,669 पुरुष छात्र और 6,819 महिला छात्राएं शामिल थीं. मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में असफलता, करियर की चिंता, पारिवारिक दबाव, सामाजिक तुलना और अकेलापन छात्रों को मानसिक तनाव की ओर धकेल रहे हैं.
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अंक और रैंक पर आधारित शिक्षा व्यवस्था छात्रों पर भारी डाल रही है मानसिक दबाव

विशेषज्ञों ने राज्य सरकार और शिक्षा संस्थानों से स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों में मजबूत काउंसलिंग सिस्टम विकसित करने की मांग की है. उनका कहना है कि केवल अंक और रैंक पर आधारित शिक्षा व्यवस्था छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डाल रही है, जिसे समय रहते संभालना बेहद जरूरी है. रिपोर्ट महाराष्ट्र समेत पूरे देश के लिए गंभीर चेतावनी है. सवाल है कि क्या बढ़ती प्रतिस्पर्धा से देश का युवा मानसिक रूप से टूट रहे हैं?

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