- मुंबई में कामकाजी लोग ट्रैफिक जाम और महंगे खर्च से बचने के लिए कम्युनिटी कारपूलिंग का सहारा ले रहे हैं
- नवी मुंबई से लोअर परेल तक का सफर करीब ढाई घंटे का है और पेट्रोल सहित अन्य खर्च ज्यादा हो रहे हैं
- व्हाट्सएप ग्रुप्स और ऑफिस ईमेल वेरिफिकेशन के जरिए सुरक्षित और भरोसेमंद कारपूलिंग नेटवर्क सक्रिय है
Mumbai Community Carpooling: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई अब ट्रैफिक जाम से हलकान रहने लगी है. ऐसे में यहां के प्रोफेशनल्स ने एक अनोखा तरीका ईजाद किया है- वो है 'कम्युनिटी कारपूलिंग'. लोग अब अकेले गाड़ी चलाने के बजाय एक ही रूट पर जाने वाले दूसरे साथियों के साथ गाड़ी शेयर कर रहे हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो मुंबई इन दिनों लिफ्ट लेकर सफर कर रहा है, वो भी पूरी सुरक्षा और भरोसे के साथ. दरअसल, नवी मुंबई से लोअर परेल जैसे ऑफिस हब तक पहुंचने में लगने वाले ढाई घंटे और पेट्रोल के भारी खर्च ने कामकाजी लोगों को इस सामूहिक समझदारी के लिए मजबूर कर दिया है. व्हाट्सएप ग्रुप्स और ऑफिस ईमेल वेरिफिकेशन के जरिए शुरू हुआ यह नया कल्चर न केवल समय बचा रहा है, बल्कि मुंबईकर्स की जेब और सेहत पर पड़ने वाले बोझ को भी कम कर रहा है. पेश है इस बदलाव पर हमारी खास रिपोर्ट.
ढाई घंटे का सफर और भारी खर्च
मुंबई के ट्रैफिक का हाल यह है कि नवी मुंबई से लोअर परेल पहुंचने में एक तरफ से करीब ढाई घंटे का समय लग रहा है. पूरे दिन के पांच घंटे तो सिर्फ सड़क पर ही गुजर जाते हैं. इसके अलावा टोल टैक्स, पार्किंग और ईंधन का खर्च अलग से जेब ढीली कर रहा है. इसी बढ़ते तनाव और खर्च को कम करने के लिए कामकाजी लोग अब संगठित कारपूलिंग समूहों से जुड़ रहे हैं.

व्हाट्सएप ग्रुप्स से मिल रही है 'लिफ्ट'
मुंबई में 'लिफ्ट ले लो' (liftlelo.com) जैसे प्लेटफॉर्म इस समस्या का समाधान बनकर उभरे हैं. इसके संस्थापक शैलेश दुबे ने एनडीटीवी (NDTV) से बात करते हुए बताया कि उन्होंने यह प्लेटफॉर्म खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया है जो रोजाना एक ही रास्ते पर सफर करते हैं. यह सिस्टम व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए चलता है, जहां लोग अपनी सुविधा के अनुसार 'लिफ्ट' और 'राइड' शेयर करते हैं. दरअसल मुंबई में 'लिफ्ट ले लो' जैसे कई अन्य सोशल ग्रुप्स और कारपूलिंग कम्युनिटीज अब सक्रिय हैं, जो ट्रैफिक का बोझ साझा कर रहे हैं.
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भरोसे और सुरक्षा का खास ख्याल
कारपूलिंग में सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का होता है, खासकर महिलाओं के लिए. इसे ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म पर वेरिफिकेशन का कड़ा सिस्टम है. ग्रुप से जुड़ने के लिए यूजर को अपने व्हाट्सएप नंबर के साथ-साथ ऑफिस का ईमेल आईडी देना जरूरी है. इस प्रोसेस की वजह से कामकाजी महिलाओं का भरोसा बढ़ा है और वे अब बेझिझक इन ग्रुप्स का हिस्सा बन रही हैं.
बिना किसी फीस के चल रहा है काम
हैरानी की बात यह है कि करीब 35,000 सदस्यों वाला यह बड़ा नेटवर्क बिना किसी मेंबरशिप फीस के चल रहा है. पिछले 9 सालों से यह कम्युनिटी सिर्फ लोगों की आपसी सिफारिशों पर ही आगे बढ़ रही है. फिलहाल लोअर परेल, अंधेरी और बीकेसी (BKC) जैसे व्यस्त इलाकों के लिए सबसे ज्यादा मांग रहती है.
ट्रैफिक में सुधार नहीं, पर तालमेल जरूरी
जब पूछा गया कि क्या सालों में मुंबई का ट्रैफिक कुछ कम हुआ है, तो जवाब मिला कि हालात में कोई बड़ा सुधार नहीं आया है. ट्रैफिक और लंबा सफर आज भी वैसी ही चुनौती है. ऐसे में कारपूलिंग न केवल सड़क पर गाड़ियों की संख्या कम करने में मदद कर रही है, बल्कि सफर को थोड़ा आसान और किफायती भी बना रही है.
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