विज्ञापन

मुंबई की चकाचौंध के पीछे का 'अंधेरा': 12 घंटे की ड्यूटी..रेंगता ट्रैफिक, लड़की ने खोली कॉर्पोरेट कल्चर की पोल!

सपनों की नगरी मुंबई में क्या वाकई सपने पूरे हो रहे हैं या सिर्फ शिफ्ट ही लंबी हो रही है? इंस्टाग्राम पर 'ट्यूलिप' नाम की एक लड़की का वीडियो आग की तरह फैल रहा है, जिसमें उसने मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिना पैसे वाले ओवरटाइम का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है. अगर आप भी 9 से 5 की नौकरी का ख्वाब देख रहे हैं, तो जरा ठहरिए, क्योंकि असलियत कुछ और ही है.

मुंबई की चकाचौंध के पीछे का 'अंधेरा': 12 घंटे की ड्यूटी..रेंगता ट्रैफिक, लड़की ने खोली कॉर्पोरेट कल्चर की पोल!
हम मशीन नहीं इंसान हैं! मुंबई की लड़की ने बताया क्यों यहां की नौकरी है सिरदर्द! वायरल वीडियो में झलका दर्द

Mumbai Corporate Life Viral Video: मुंबई... कहने को तो ये शहर कभी सोता नहीं, लेकिन यहां के नौकरीपेशा लोग तो सोने के लिए तरस रहे हैं. आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो तहलका मचा रहा है, जिसमें ट्यूलिप नाम की लड़की ने मुंबई की कॉर्पोरेट लाइफ का ऐसा 'पोस्टमॉर्टम' किया है कि हर नौकरीपेशा बंदा उसे अपना हाल-ए-दिल समझ रहा है. उसका कहना है कि यहां 9 से 5 वाली जॉब तो बस कागजों पर है, हकीकत में तो ये 12 घंटे का बंधुआ मजदूरी जैसा खेल बन गया है.

ये भी पढ़ें:-1 करोड़ का पैकेज छोड़ अब अपार्टमेंट्स में साफ-सफाई क्यों कर रही है ये महिला, कहानी सुन दंग रह जाएंगे आप

शाम को जल्दी निकलना जैसे 'गुनाह' है (12 Hour Shift Reality)

ट्यूलिप ने बड़े ही देसी और मजेदार अंदाज में बताया कि, अगर कोई कर्मचारी शाम 6 बजे अपना बैग उठाने की जुर्रत कर ले, तो पूरे ऑफिस की नजरें उस पर ऐसे टिक जाती हैं, जैसे उसने कोई डाका डाल दिया हो. कंपनियों का तर्क भी बड़ा अजीब है...बॉस कहते हैं कि आपने दिन में चाय-पानी और लंच का जो ब्रेक लिया, उसकी भरपाई शाम को एक्स्ट्रा रुककर करो. मतलब, सांस लेना भी अब कंपनी के उधार खाते में जाएगा क्या?

ट्रैफिक का टॉर्चर और बिना पैसे का ओवरटाइम (Unpaid Overtime Issues)

मुंबई की जान उसकी लोकल और ट्रैफिक है, लेकिन यही जान निकाल भी देती है. वीडियो में बताया गया कि दफ्तर की थकान तो एक तरफ, लेकिन घर पहुंचने तक जो ट्रैफिक का 'जहर' पीना पड़ता है, वो इंसान को बेहद थका देता है. ऊपर से सितम ये कि घंटों एक्स्ट्रा काम करने के बावजूद फूटी कौड़ी नसीब नहीं होती. इसे 'डेडीकेशन' का नाम देकर कर्मचारी का तेल निकाला जाता है. सच तो ये है कि यहां लोग काम के लिए नहीं जी रहे, बल्कि बस जीने के लिए काम किए जा रहे हैं.

ये भी पढ़ें:-35 की उम्र में कॉर्पोरेट की दुनिया को कहा 'टा-टा बाय-बाय', 11 साल की नौकरी को कहा खुदा हाफिज, वजह दिल जीत लेगी!

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com