- महाराष्ट्र में मेडिसिन और कॉस्मेटिक लाइसेंस से जुड़ी 2450 से अधिक अपीलें लंबित हैं
- वर्तमान में अपील सुनने का अधिकार राज्य के अन्न व औषधि प्रशासन मंत्री के पास है
- एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने सरकार को पत्र लिखकर अपीलीय अधिकार खुद को सौंपने का प्रस्ताव रखा है
महाराष्ट्र में मेडिसिन और कॉस्मेटिक लाइसेंस के सस्पेंशन और कैंसिलेशन से जुड़ी अपीलों का अंबार लग गया है. प्रदेश में फिलहाल 2,453 से अधिक अपीलें लंबित हैं. इस भारी बैकलॉग को देखते हुए, राज्य के अन्न व औषधि प्रशासन FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने सरकार को एक आधिकारिक पत्र लिखकर अपीलीय अधिकार कमिश्नर को सौंपने की मांग की है. हालांकि, सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों के दबाव के चलते सरकार में इस बात की चर्चा है कि सुनवाई का अधिकार मंत्री अपने पास ही बनाए रखना चाहते हैं.
क्या है मौजूदा व्यवस्था?
वर्तमान में, औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940, कॉस्मेटिक्स रूल्स 2020, मेडिकल डिवाइस रूल्स 2017, महाराष्ट्र पॉइजन एक्ट 1972 और NDPS एक्ट 1985 के तहत एफडीए द्वारा लाइसेंस जारी किए जाते हैं.
यदि कोई लाइसेंस धारक नियमों का उल्लंघन करता है, तो सक्षम अधिकारी उसका लाइसेंस निलंबित या रद्द कर सकते हैं. इसके खिलाफ अपील सुनने का अधिकार फिलहाल राज्य के “अन्न व औषधि प्रशासन मंत्री” FDA मिनिस्टर के पास है.
एफडीए प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में दवा बिक्री लाइसेंस से जुड़ी लगभग 2,418 और दवा उत्पादन से जुड़ी 35 अपीलें लंबित हैं. लंबे समय तक अपीलों का निपटारा न होने से लाइसेंस धारकों को न्याय मिलने में देरी हो रही है.

कई मामलों में तंग आकर लाइसेंस धारक बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं. तुकाराम मुंढे ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में हाई कोर्ट को लंबित अपीलों पर एक तय समय-सीमा के भीतर फैसला लेने का निर्देश देना पड़ रहा है.
कमिश्नर मुंढे ने सरकार को आगाह किया है कि अपीलों के निपटारे में हो रही इस देरी के कारण एफडीए द्वारा की जा रही दंडात्मक कार्रवाई का प्रभाव कम हो रहा है. सजा और निलंबन में होने वाली देरी से नियमों का उल्लंघन करने वालों में प्रशासन का खौफ खत्म होने की आशंका है.
तुकाराम मुंढे ने अपने पत्र में अन्य राज्यों की कार्यप्रणाली का भी हवाला दिया है:
- उत्तर प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पंजाब: यहां संबंधित विभाग के सचिव अपीलीय प्राधिकारी के रूप में कार्य करते हैं.
- तेलंगाना और आंध्र प्रदेश: यहां यह अधिकार विभाग के महानिदेशक के पास है.
- तमिलनाडु: यहां अपील सुनने का अधिकार “ड्रग कंट्रोलर” को दिया गया है.
अपीलों के फ़ौरन निपटारे, अर्धन्यायिक कार्यवाही को अधिक पारदर्शी बनाने और विभागीय कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए तुकाराम मुंढे ने यह प्रस्ताव भेजा है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य सरकार मंत्रियों के दबाव को दरकिनार कर एफडीए कमिश्नर को ये अहम अधिकार सौंपती है या नहीं
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