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फडणवीस-शिंदे को फंसाने की साजिश का आरोप: पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे के खिलाफ FIR पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे और वकील शेखर जगताप के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है. उन पर साल 2021 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को जबरन वसूली के झूठे मामले में फंसाने के लिए एक व्यवसायी पर दबाव बनाने का आरोप था. 

फडणवीस-शिंदे को फंसाने की साजिश का आरोप: पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे के खिलाफ FIR पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक संजय पांडे के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है
  • संजय पांडे पर 2021 में एक कारोबारी पर दबाव बनाकर फडणवीस और शिंदे के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने का आरोप था
  • मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस सुमन श्याम की विशेष पीठ ने की

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे को बहुत बड़ी राहत दी है. अदालत ने संजय पांडे और सह-आरोपी अधिवक्ता शेखर जगताप के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर  को पूरी तरह से रद्द कर दिया है.

कारोबारी पर अनुचित दबाव बनाया

यह मामला बेहद हाईप्रोफाइल राजनीतिक विवाद से जुड़ा था. पूर्व आईपीएस संजय पांडे पर आरोप था कि उन्होंने साल 2021 में एक कारोबारी पर अनुचित दबाव बनाया था ताकि मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ जबरन वसूली के झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा सकें.

मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस सुमन श्याम की विशेष पीठ (स्पेशल बेंच) ने इस पर सुनवाई की. अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एफआईआर को सेट-एसाइड (खारिज) करने का आदेश दिया.

3 साल की देरी पर उठे सवाल

संजय पांडे की ओर से पैरवी कर रहे वकील राहुल कामेरकर ने कोर्ट में जोरदार दलीलें पेश कीं. उन्होंने अदालत को बताया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित और टारगेटेड थी. वकील ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कथित घटना साल 2021 की है, लेकिन इसके खिलाफ साल 2024 में ठाणे में केस दर्ज किया गया. इस 3 साल की लंबी देरी का शिकायतकर्ता के पास कोई वैध और तार्किक स्पष्टीकरण नहीं था.

अदालत के इस फैसले से संजय पांडे को तात्कालिक राहत जरूर मिली है, हालांकि विस्तृत अदालती आदेश आना अभी बाकी है. इसके अलावा, पूर्व पुलिस कमिश्नर सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज दो अन्य अलग-अलग मामलों का सामना कर रहे हैं, जो फिलहाल लंबित हैं. 

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