महाराष्ट्र के पालघर जिले के मोखाडा गांव में रहने वाले बीजेपी के जिला सचिव विठ्ठल दगडू पाटील के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, तो उनकी पत्नी को समझ नहीं आया कि क्या करें? दूसरे राज्य में थीं, तो समझ नहीं आया कि क्या करें, कहां जाएं और किससे मदद मांगें? ऐसी मुश्किल घड़ी में पूरा भाजपा परिवार उनके साथ खड़ा नजर आया. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद पूरी स्थिति को संभाला और विठ्ठल दगडू पाटील की पत्नी वंदना को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह दूसरे शहर में अकेली हैं.
सैकड़ों किलोमीटर दूर अनजान राज्य में वंदना अकेली थीं
दरअसल, विठ्ठल पाटील अपनी पत्नी वंदना पाटील के साथ अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर गए थे. यात्रा अच्छी चल रही थी और दोनों तवांग में ठहरे हुए थे. 6 जून, शनिवार की सुबह लगभग साढ़े सात बजे अचानक विठ्ठल दगडू की तबीयत बिगड़ गई. पत्नी वंदना उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर गईं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. हार्ट अटैक के कारण विठ्ठल जी का निधन हो गया. सैकड़ों किलोमीटर दूर, एक अनजान राज्य में वंदना अकेली थीं, साथ में सिर्फ अपने पति का पार्थिव शरीर था. भाषा अपरिचित थी, लोग अनजान थे और संसाधन सीमित थे, सबसे बड़ा सवाल था, अपने पति के पार्थिव शरीर को लेकर महाराष्ट्र स्थित अपने गांव तक कैसे पहुंचा जाए?

बीजेपी के जिला सचिव विठ्ठल दगडू पाटील का निधन
CM फडणवीस ने खुद स्थिति को संभाला
इस कठिन घड़ी में वंदना को बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की याद आई, परिचित कार्यकर्ता के माध्यम से दोनों जगह उन्होंने संदेश भिजवाया. जैसे ही यह दुखद समाचार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचा, उन्होंने तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए, देर रात तक महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश और असम के अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत चलती रही, खुद मुख्यमंत्री फडणवीस भी स्थिति पर नजर रखे हुए थे. एक ही उद्देश्य था, विठ्ठल जी के पार्थिव शरीर को शीघ्र महाराष्ट्र पहुंचाना.
500 किलोमीटर और 15 घंटे की कठिन पहाड़ी यात्रा
मुख्यमंत्री फडणवीस के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया, अरुणाचल प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो उठा, वंदना को पूरा सहयोग मिलने लगा, तवांग से गुवाहाटी तक लगभग 500 किलोमीटर और 15 घंटे की कठिन पहाड़ी यात्रा एम्बुलेंस के जरिए वंदना ने पूरी की, अपने पति के पार्थिव देह के साथ वंदना अकेली ना रह जाये इसके लिए एक महिला कर्मचारी भी उनके साथ नियुक्त की गई.
गुवाहाटी पहुंचते ही असम सरकार ने व्यवस्था संभाली
गुवाहाटी पहुंचते ही असम सरकार और प्रशासन ने आगे की व्यवस्था संभाली, विमान कंपनी से विशेष अनुमति लेकर पार्थिव शरीर को मुंबई भेजने की व्यवस्था की गई, वंदना का भी उसी विमान में टिकट सुनिश्चित किया गया, इतना ही नहीं, उनका पहले से बुक किया गया दिल्ली-मुंबई टिकट रद्द करवाकर उसकी राशि वापस दिलाने की व्यवस्था भी की गई. विवार दोपहर वंदना अपने पति विठ्ठल के पार्थिव शरीर के साथ मुंबई पहुंचीं. वहां सांसद हेमंत सावरा और बीजेपी के स्थानीय पदाधिकारी उनको सहारा देने के लिए मौजूद थे, मुंबई से उनके गांव तक एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की गई थी.
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यह ऐसा दुखद समय था जो किसी पर भी न आए, लेकिन इस कठिन घड़ी में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, विठ्ठल दगडू पाटील के परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहे. देर रात तक वे स्वयं अधिकारियों के संपर्क में बने रहे और लगातार प्रयास करते रहे कि महाराष्ट्र की यह बेटी सुरक्षित अपने घर पहुंच जाए. इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि संकट की घड़ी में संवेदनशील नेतृत्व किस तरह परिवार की तरह साथ खड़ा होता है.
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