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9 दिन की बच्ची को चढ़ा दिया 12 यूनिट ब्लड; मेडिकल कॉलेज विदिशा में बवाल, बच्ची की मौत पर डॉक्टरों से झड़प

Vidisha Medical College Controversy: विदिशा मेडिकल कॉलेज में नवजात की मौत के बाद हंगामा, परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, डॉक्टरों ने मारपीट की शिकायत की. पढ़िए पूरी खबर.

9 दिन की बच्ची को चढ़ा दिया 12 यूनिट ब्लड; मेडिकल कॉलेज विदिशा में बवाल, बच्ची की मौत पर डॉक्टरों से झड़प
मेडिकल कॉलेज विदिशा में बवाल, बच्ची की मौत पर डॉक्टरों से झड़प

Vidisha Medical College Newborn Death: विदिशा मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया, जब 9 दिन तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद एक नवजात बच्ची की मौत हो गई और इसके बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ. घटना ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों पर सवाल खड़े किए, वहीं डॉक्टरों ने खुद के साथ मारपीट और अभद्रता का आरोप लगाया. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मामला अस्पताल से सीधे कोतवाली थाने तक पहुंच गया. इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीज-परिजन संवाद और डॉक्टरों की सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है.

प्रसव के बाद अचानक बिगड़ी नवजात की तबीयत

जानकारी के अनुसार राजपूत कॉलोनी निवासी विक्रम राजपूत अपनी पत्नी अनुराधा राजपूत को प्रसव के लिए विदिशा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे. यहां डॉक्टर शरद कुशवाहा की देखरेख में डिलीवरी कराई गई. परिवार के मुताबिक प्रसव सामान्य रहा और शुरुआत में मां और नवजात बच्ची दोनों स्वस्थ बताई गई थीं. हालांकि, प्रसव के अगले ही दिन बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. हालत गंभीर होने पर उसे तत्काल आईसीयू में भर्ती किया गया. इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने लगातार उसकी निगरानी और इलाज शुरू किया. करीब 9 दिनों तक बच्ची का उपचार चलता रहा, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका.

Vidisha Medical College Newborn Death: विदिशा मेडिकल कॉलेज

Vidisha Medical College Newborn Death: विदिशा मेडिकल कॉलेज

परिजनों का आरोप: इलाज में लापरवाही, सही जानकारी नहीं दी गई

बच्ची की मौत के बाद परिवार का गुस्सा फूट पड़ा. परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई. उनका कहना है कि बच्ची को इलाज के दौरान 12 यूनिट तक रक्त चढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. मृत बच्ची के पिता विक्रम राजपूत ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने समय पर सही निर्णय नहीं लिया और न ही परिवार को बच्ची की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी दी गई. उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन लगातार स्थिति को सामान्य बताता रहा, जबकि बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई थी. परिजनों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने डॉक्टरों से सवाल पूछे, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे उनका शक और बढ़ता गया और अंततः मामला आक्रोश में बदल गया.

डॉक्टरों का पक्ष: गंभीर हालत में भर्ती हुई थी बच्ची

वहीं दूसरी ओर, बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने सभी आरोपों को खारिज किया है. डॉक्टरों का कहना है कि नवजात को जब अस्पताल में भर्ती किया गया, उसी समय उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी. उसे लगातार दौरे पड़ रहे थे और ब्रेन हेमरेज का खतरा बना हुआ था. डॉक्टरों के मुताबिक मेडिकल टीम ने पूरी मेहनत और लगन के साथ 8 से 9 दिनों तक लगातार इलाज किया. हर जरूरी चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन बच्ची की स्थिति में सुधार नहीं हो सका. डॉक्टरों ने यह भी आरोप लगाया कि बच्ची की मौत के बाद कुछ परिजन आक्रोशित होकर अस्पताल में घुस आए और उन्होंने डॉक्टरों के साथ अभद्रता और मारपीट की. इस घटना के बाद अस्पताल में कार्यरत जूनियर डॉक्टर भी एकजुट हो गए और कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंच गए.

Vidisha Medical College Newborn Death: बच्ची की मौत के बाद बवाल

Vidisha Medical College Newborn Death: बच्ची की मौत के बाद बवाल

अस्पताल परिसर में तनाव, मामला थाने तक पहुंचा

घटना के बाद मेडिकल कॉलेज परिसर में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया. परिजन और डॉक्टर आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस को मौके पर बुलाया गया. सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया. थाना प्रभारी आनंद राज ने दोनों पक्षों को कोतवाली थाने बुलाया, जहां उनकी शिकायतें सुनी गईं. पुलिस ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर मामले की जांच शुरू की. अधिकारियों के अनुसार फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता करा दिया गया है, लेकिन पूरे मामले की जांच अभी जारी है.

सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की कई गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या परिजनों को मरीज की स्थिति की सही और समय पर जानकारी दी जा रही थी? इसके अलावा अस्पतालों में मरीज और डॉक्टरों के बीच संवाद की कमी भी सामने आई है, जो कई बार विवाद का कारण बन जाती है. वहीं दूसरी ओर, डॉक्टरों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है, क्योंकि इलाज के बाद असंतोष की स्थिति में हिंसक घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.

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