Jayshree Gayatri Food Products: भोपाल (Bhopal) में डेयरी प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर मिलावट और फर्जीवाड़े के मामले में ED ने जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर किशन मोदी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई के बाद संज्ञान भी ले लिया है.
ED की जांच में सामने आया है कि मिल्क मैजिक (milk magic) ब्रांड नाम से डेयरी प्रोडक्ट बेचने वाली यह कंपनी दूध से बनने वाले प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर मिलावट कर रही थी. जांच एजेंसी के मुताबिक कंपनी असली दूध की फैट की जगह पाम ऑयल और दूसरी चीजों का इस्तेमाल कर रही थी. यानी जिन प्रोडक्ट्स को शुद्ध डेयरी प्रोडक्ट बताकर बेचा जा रहा था, उनमें कथित तौर पर भारी मिलावट की जा रही थी. ED का कहना है कि ये मिलावटी प्रोडक्ट सिर्फ भारत में ही नहीं बेचे गए, बल्कि विदेशों में भी एक्सपोर्ट किए गए. इससे लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ा.
फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट की मदद से किया एक्सपोर्ट
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने डेयरी प्रोडक्ट्स को विदेश भेजने के लिए फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट का इस्तेमाल किया. ED के मुताबिक प्रतिष्ठित लैब्स के नाम पर नकली टेस्ट रिपोर्ट तैयार की गईं और इन्हें Export Inspection Agency के सामने जमा कराया गया, ताकि एक्सपोर्ट की मंजूरी मिल सके. जब इन रिपोर्ट्स की जांच की गई, तो संबंधित लैब्स ने साफ कर दिया कि कई रिपोर्ट्स पूरी तरह फर्जी थीं और उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट जारी ही नहीं की थी. इसके बाद जांच एजेंसियों को बड़े फर्जीवाड़े का शक हुआ.
फर्जी रिपोर्ट्स के आधार पर 19.69 करोड़ रुपये की कमाई
ED की जांच के अनुसार फर्जी रिपोर्ट्स के आधार पर कंपनी ने मिलावटी डेयरी प्रोडक्ट्स विदेश भेजे और इससे करीब 19.69 करोड़ रुपये की कमाई की. एजेंसी का कहना है कि यह रकम अपराध से कमाई गई आय है, जिसे PMLA के तहत प्रोसीड्स ऑफ क्राइम माना गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक यह पैसा कंपनी के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया. इससे पहले ED इस मामले में कंपनी से जुड़ी अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच भी कर चुकी है.
एमडी किशन मोदी हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में ED पहले ही कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर किशन मोदी को 13 मार्च 2026 को गिरफ्तार कर चुकी है. इसके बाद कंपनी के तत्कालीन CEO सुनील त्रिपाठी को 20 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया था. फिलहाल दोनों न्यायिक हिरासत में हैं. ED का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कंपनी के दूसरे कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे.
ED ने यह जांच भोपाल के हबीबगंज थाने और आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW भोपाल में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी. FIR में कंपनी के डायरेक्टर्स और अधिकारियों पर IPC की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. अब ED की कार्रवाई के बाद यह मामला सिर्फ मिलावट तक सीमित नहीं रहा बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फर्जी एक्सपोर्ट से जुड़े गंभीर आर्थिक अपराध के रूप में सामने आया है.
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