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हॉस्पिटल के गेट पर हुआ प्रसव; नवजात को 25 मिनट तक नहीं मिली मदद, विदिशा जिला अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल

विदिशा जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया. परिजनों ने नवजात को 25 मिनट तक चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने का आरोप लगाया है. मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं.

हॉस्पिटल के गेट पर हुआ प्रसव; नवजात को 25 मिनट तक नहीं मिली मदद, विदिशा जिला अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल? जिला अस्पताल के गेट पर हुई डिलीवरी, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

मध्यप्रदेश के विदिशा जिला अस्पताल से सामने आई एक घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रसव पीड़ा से कराह रही एक गर्भवती महिला अस्पताल पहुंची, लेकिन आरोप है कि समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने के कारण उसे अस्पताल के मुख्य गेट पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. परिजनों का दावा है कि प्रसव के बाद नवजात करीब 25 मिनट तक बिना चिकित्सकीय देखरेख के रहा और मौके पर कोई डॉक्टर या नर्स नहीं पहुंची. घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है. विपक्ष ने भी इसे लेकर सरकार को घेरा है, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने जांच के आदेश दिए हैं.

अस्पताल का मुख्य गेट ही बन गया प्रसव कक्ष!

जानकारी के अनुसार महिला सिरोंज क्षेत्र से रेफर होकर विदिशा जिला अस्पताल पहुंची थी. परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल पहुंचते ही उसे तत्काल उपचार और सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिलेगी. लेकिन आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के कुछ ही देर बाद महिला को मुख्य गेट पर ही प्रसव हो गया. घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

Vidisha District Hospital: गेट पर हो गई डिलेवरी मासूम को नहीं मिली लंबे समय तक मदद

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परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

महिला के परिजनों का कहना है कि उन्होंने अस्पताल स्टाफ से कई बार मदद मांगी, लेकिन समय पर कोई स्वास्थ्यकर्मी वहां नहीं पहुंचा. सबसे गंभीर आरोप यह है कि बच्चे के जन्म के बाद करीब 25 मिनट तक नवजात को किसी प्रकार की तत्काल चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली. परिजनों के मुताबिक इस दौरान बच्चा और मां दोनों जोखिम भरी स्थिति में थे. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी.

Vidisha District Hospital: बाद में अस्पतालकर्मी एक्शन में आए

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वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद

घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया. सोशल मीडिया पर भी लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठाए. कई लोगों ने पूछा कि यदि जिला अस्पताल में भी प्रसूताओं को समय पर सहायता नहीं मिलेगी तो ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों का भरोसा कैसे कायम रहेगा.

विपक्ष ने सरकार को घेरा

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया के माध्यम से घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि प्रसूताओं को मूलभूत सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं तो जिम्मेदारी किसकी है.

अस्पताल प्रबंधन ने जांच के दिए आदेश

जिला अस्पताल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं. सिविल सर्जन डॉ अनूप वर्मा के अनुसार महिला सिरोंज से रेफर होकर अस्पताल आई थी और अस्पताल परिसर के गेट पर ही उसका प्रसव हो गया. उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

इमरजेंसी व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने जिला अस्पताल की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसूता के अस्पताल परिसर तक पहुंचने के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध होना चाहिए. ऐसे मामलों में कुछ मिनटों की देरी भी मां और नवजात दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है.

इन सवालों के जवाब का है इंतजार

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल एक आकस्मिक घटना थी या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी स्तर की लापरवाही सामने आई है. जांच समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि उस समय अस्पताल की व्यवस्था क्या थी और प्रसूता को समय पर सहायता क्यों नहीं मिल सकी. विदिशा जिला अस्पताल की यह घटना केवल एक परिवार के दर्द की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है जो बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों का रुख करती हैं. अब सभी की नजर जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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