उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने सिंहस्थ महापर्व की व्यवस्थाओं और तैयारियों को सुव्यवस्थित बनाने के लिए सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का गठन किया है. इसके साथ ही वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल को प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है. नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद अब सिंहस्थ की तैयारियों को संस्थागत ढांचा मिलेगा, जिससे आगामी महापर्व की योजना और क्रियान्वयन को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा.
सरकार ने किया सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का गठन
मध्य प्रदेश शासन ने उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व के लिए सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का गठन कर दिया है. सिंहस्थ देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है और इसका आयोजन हर 12 वर्ष में किया जाता है. ऐसे बड़े आयोजन की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए प्राधिकरण का गठन किया है.
जगदीश अग्रवाल को मिली अध्यक्ष की जिम्मेदारी
सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल को सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति मध्य प्रदेश सिंहस्थ मेला अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत की गई है. शासन के आदेश के बाद अब वे प्राधिकरण का नेतृत्व करते हुए सिंहस्थ से जुड़े विभिन्न कार्यों की निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे.
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने जारी किया आदेश
सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के गठन और अध्यक्ष की नियुक्ति का आदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी किया है. विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में प्राधिकरण के गठन को औपचारिक मंजूरी दी गई. इसके साथ ही सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.
सिंहस्थ की तैयारियों में होगी अहम भूमिका
सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में करोड़ों श्रद्धालु देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से उज्जैन पहुंचते हैं. ऐसे में बुनियादी सुविधाओं, यातायात, आवास, सुरक्षा, स्वच्छता और घाटों के विकास जैसे कई बड़े कार्य समय रहते पूरे करने होते हैं. सिंहस्थ मेला प्राधिकरण इन सभी तैयारियों के समन्वय और निगरानी में अहम भूमिका निभाएगा.
हर 12 साल में आयोजित होता है सिंहस्थ महापर्व
उज्जैन का सिंहस्थ महापर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है. यह आयोजन 12 वर्ष के अंतराल पर होता है और इसमें बड़ी संख्या में साधु-संतों, अखाड़ों तथा श्रद्धालुओं की भागीदारी होती है. इसी वजह से इसकी तैयारियां वर्षों पहले शुरू कर दी जाती हैं ताकि आयोजन को सुचारु और भव्य रूप दिया जा सके.
तैयारियों को मिलेगा संस्थागत ढांचा
मेला प्राधिकरण के गठन के साथ अब सिंहस्थ से जुड़ी योजनाओं और विकास कार्यों को एक संगठित व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाया जाएगा. माना जा रहा है कि इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी की जा सकेंगी. सरकार के इस फैसले को सिंहस्थ 2028 की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है.
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