महाकौशल की राजधानी कहे जाने वाले जबलपुर के लिए आने वाले वर्षों में परिवहन और विकास का नया अध्याय लिखने वाली परियोजना आकार ले रही है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही 114 किलोमीटर लंबी जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है. अक्टूबर 2027 तक चरणबद्ध तरीके से पूरी होने वाली यह परियोजना न केवल शहर के यातायात दबाव को कम करेगी, बल्कि जबलपुर को मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से जोड़ने वाले एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में भी स्थापित करेगी. इससे उद्योग, पर्यटन, कृषि और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक बदलाव की उम्मीद की जा रही है.
114 किलोमीटर लंबी रिंग रोड से जुड़ेगा पूरा जबलपुर
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही यह आउटर रिंग रोड लगभग 114 किलोमीटर लंबी होगी. परियोजना को पांच रणनीतिक पैकेजों में तैयार किया जा रहा है. रिंग रोड राष्ट्रीय राजमार्ग-45, राष्ट्रीय राजमार्ग-34, राष्ट्रीय राजमार्ग-30 और राज्य राजमार्ग-37ए समेत प्रमुख मार्गों को जोड़ते हुए शहर के चारों ओर एक आधुनिक परिवहन नेटवर्क तैयार करेगी. इससे शहर के भीतर और बाहर यातायात का संचालन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा.

Jabalpur Outer Ring Road: आकार ले रहा है प्रोजेक्ट
Photo Credit: NHAI
शहर में प्रवेश किए बिना गुजर सकेगा लंबी दूरी का यातायात
वर्तमान में जबलपुर कई राष्ट्रीय राजमार्गों का महत्वपूर्ण जंक्शन है. भारी वाहनों और लंबी दूरी के यातायात को शहर के भीतर से गुजरना पड़ता है, जिससे ट्रैफिक दबाव बढ़ता है. परियोजना निदेशक पीयूष यदुवंशी के अनुसार रिंग रोड बनने के बाद उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे. इससे ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा समय घटेगा और ईंधन की बचत होगी.

Jabalpur Outer Ring Road: जबलपुर आउटर रिंग रोड मेगा प्रोजेक्ट
आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण बनेगी परियोजना
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अत्याधुनिक संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. परियोजना के अंतर्गत ये कार्य शामिल हैं:
- 14 प्रमुख पुल
- 37 लघु पुल
- 3 फ्लाईओवर
- 4 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB)
- 12 व्हीकुलर अंडरपास
- 23 लाइट व्हीकुलर अंडरपास
- 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर
- 3 ओवरपास
- 332 कल्वर्ट
नर्मदा पर बनेगा आकर्षक एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज
परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण नर्मदा नदी पर निर्मित होने वाला आधुनिक एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज होगा. उन्नत इंजीनियरिंग तकनीक से बनने वाला यह पुल न केवल यातायात को सुगम बनाएगा बल्कि जबलपुर की नई पहचान भी बन सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरचना प्रदेश के सबसे आधुनिक पुलों में शामिल होगी. इसके निर्माण से नर्मदा तटों और आसपास के धार्मिक स्थलों तक पहुंच और आसान हो जाएगी.

Jabalpur Outer Ring Road: नर्मदा नदी पर ब्रिज की तैयारी
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पर्यटन को मिलेगा बड़ा लाभ
रिंग रोड परियोजना से जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र के पर्यटन क्षेत्र को भी नई गति मिलने की संभावना है. भेड़ाघाट की विश्व प्रसिद्ध मार्बल रॉक्स, धुआंधार जलप्रपात, नर्मदा रिवरफ्रंट, कान्हा नेशनल पार्क और अमरकंटक जैसे प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच पहले से अधिक आसान हो जाएगी. पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, ट्रैवल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प व्यवसाय को भी फायदा होगा.
ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
इस परियोजना का लाभ केवल जबलपुर शहर तक सीमित नहीं रहेगा. बरेला, मानेगांव, अमझर, कुशनेर, पाटन, सिहोरा, शाहपुरा, अधारताल और गढ़ा जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी. किसानों को कृषि उपज बाजारों तक जल्दी और कम लागत में पहुंचाने की सुविधा मिलेगी. इससे स्थानीय व्यापार को भी मजबूती मिलेगी.
औद्योगिक निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
रिंग रोड बनने के बाद औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस और व्यापारिक केंद्रों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित होगी. बेहतर परिवहन नेटवर्क के कारण नए निवेश आकर्षित होंगे और क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियां बढ़ेंगी. परियोजना के निर्माण और संचालन से हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर भी सृजित होंगे.
महाकौशल के जिलों को मिलेगा फायदा
मंडला, डिंडोरी, कटनी और नरसिंहपुर जैसे जिलों को भी इस परियोजना का बड़ा लाभ मिलेगा. इन क्षेत्रों से कृषि उपज, वन उत्पाद और खनिज संसाधनों का परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और कम लागत वाला होगा. इससे पूरे महाकौशल क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी.
पर्यावरण संरक्षण पर भी फोकस
परियोजना में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. निर्माण कार्य में लगभग 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जाएगा, जिससे औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा वृक्षारोपण, हरित पट्टी विकास और आधुनिक जल निकासी प्रणाली भी विकसित की जा रही है.
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