Ram Mandir Donation Chori Scam: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ट्रस्ट सदस्यता पर सवाल उठाया है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने वाले करोड़ों लोगों की तरह वे भी ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों से चिंतित हैं. उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का ट्रस्ट का सदस्य होना भी चर्चा का विषय है. इस बयान के बाद राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं.
दिग्विजय सिंह ने जताया आश्चर्य
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लोग ट्रस्ट से जुड़े आरोपों को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए देशभर के लोगों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ दान दिया था, इसलिए ट्रस्ट से जुड़ी किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी की खबर चिंता का विषय है.
VIDEO | Bhopal: Congress leader Digvijaya Singh says, “People who donated money for the Ram Temple case are completely shocked at the kind of corruption that is reportedly going on there. We are also seeing that Gyanesh Kumar is a member of the trust. The person who is now a… pic.twitter.com/OXyI30j53W
— Press Trust of India (@PTI_News) June 18, 2026
दिग्विजयन ने कहा, “राम मंदिर के मामले में हम सब लोग... जिन्होंने चंदा दिया है, वे आश्चर्यचकित हैं. आश्चर्यचकित हैं कि किस तरह का भ्रष्टाचार वहां हुआ है.”उन्होंने कहा, “हम यह भी देख रहे हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस ट्रस्ट के सदस्य हैं. यह भी अजीब बात है.”
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सदस्यता पर उठाया सवाल
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं. उन्होंने कहा कि इस विषय पर लोग चर्चा कर रहे हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ट्रस्ट में भूमिका को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर विवाद तब सुर्खियों में आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दान एवं चढ़ावे की राशि को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया था कि करोड़ों रुपये के हिसाब-किताब को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
SIT कर रही है जांच
विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य तथ्यों को सामने लाना और राम मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचाने के संभावित प्रयासों की निष्पक्ष पड़ताल करना है.
ट्रस्ट पदाधिकारियों से पूछताछ
जांच के क्रम में एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की है. इसके अलावा दान राशि की गणना, लेखा-जोखा और रिकॉर्ड प्रबंधन से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है. जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी समीक्षा कर रही हैं.
कई शिकायतें, लेकिन FIR नहीं
विवाद सामने आने के बाद अलग-अलग थानों में तीन शिकायतें दर्ज कराई गई हैं. शिकायतकर्ताओं ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. हालांकि, अब तक किसी भी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई है. वहीं ट्रस्ट की ओर से भी इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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