जेन-जी के आंदोलन से पहले देश में सबसे अधिक चर्चा अयोध्या के राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की घटना की थी. अयोध्या मंदिर विवाद के बीच अचानक शुरू हुए जेन-ज़ी आंदोलन के बाद राम मंदिर की चर्चा कम हो गई. इस बीच समाजवादी पार्टी अयोध्या के मामले को छोड़ना नहीं चाहती. शायद यही वजह है कि संसद में पेपर लीक पर बोलते हुए सपा प्रमुख ने राम मंदिर का मुद्दा छेड़ दिया.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा में पेपर लीक मामले पर चर्चा के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि जो लोग चढ़ावा नहीं बचा पाये वो पेपर लीक क्या रोकेंगे? अखिलेश यादव अपने सार्वजनिक बयानों में भी राम मंदिर को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए अक्सर दिखाई दे रहे हैं. इस तरह अखिलेश अपने सॉफ्ट हिंदुत्व' वाले एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
यूपी विधानसभा चुनाव टारगेट
यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष राम मंदिर मामले को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है. इसकी वजह ये है कि पहली बार विपक्ष को राम मंदिर के नाम पर बीजेपी को घेरने का मौक़ा मिला है. सपा से लेकर कांग्रेस राम मंदिर के मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साध रही है और दावा है कि बीजेपी ने चोरी की घटना को रोकने की जगह छुपाने का काम किया.
समाजवादी पार्टी ने पूरे प्रदेश में भी राम मंदिर मामले को लेकर तमाम विरोध प्रदर्शन किए. सपा ये दावा कर रही है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट में चंदा/चढ़ावा चोरी करने का आरोप लगाने के बार ही सारी कार्रवाई हुई. अगर अखिलेश यादव पोस्ट करके आरोप ना लगाते तो चंदा चोरी करने वालों का कुछ नहीं होता और जो हो रहा था, वो होता रहता.
यूपी में मंडल और कमंडल की राजनीति ही सबसे बड़ा मुद्दा बनती रही
बात करें यूपी की राजनीति की तो यूपी में मंडल और कमंडल की राजनीति ही सबसे बड़ा मुद्दा बनती रही है. विकास का एजेंडा इन दोनों मुद्दों के बाद आता है. बीजेपी जहां कमंडल की पिच पर अपनी फील्डिंग सेट करती है वहीं सपा मंडल के इर्द गिर्द फार्मूला बनाकर वोट बैंक को साधती रही है. बीजेपी के पास योगी आदित्यनाथ का हिंदूवादी चेहरा है तो सपा के पास पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक वाला पीडीए का कार्ड.
जेन-ज़ी आंदोलन ने राजनैतिक दलों को मंथन करके नई पीढ़ी के मूड मिजाज को परखने पर मजबूर ज़रूर कर दिया है. जिस तरह दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए आंदोलन ने केंद्र सरकार को झुकने को मजबूर किया, उसके बाद बीजेपी भी नई पीढ़ी को साधने के लिए माहौल समझने की कोशिश कर रही है वहीं विपक्ष ने जिस तरह से जेन-ज़ी को सपोर्ट किया, उसके बाद विपक्ष भी उसी वेव में ख़ुद को ढालकर एक नया वोट बैंक तैयार करने में जुटी दिखाई दे रही है.
जेन-जी और राम मंदिर के मुद्दे को साथ-साथ लेकर चलने की कोशिश
विपक्ष ने भले ही जेन-ज़ी का समर्थन कर ख़ुद को लिबरल दिखाने की कोशिश की लेकिन विपक्ष को पता है कि यूपी में लड़ने के लिए मंडल कमंडल का हथियार भी तैयार रखना होगा. इसी वजह से सपा प्रमुख अखिलेश यादव जेन-जी और राम मंदिर के मुद्दे को साथ साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में अखिलेश यादव एक तरफ़ उस जेन-ज़ी को साधने की कोशिश कर रहे जिसमें जाति धर्म जैसे मुद्दे फ़िलहाल दिखाई नहीं देते. साथ साथ वो पीडीए और चंदा चोरी के मुद्दे को भी उठा रहे हैं.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पीडीए, राम मंदिर और जेन-ज़ी को साथ लेकर चलने की रणनीति सफल होगी या नहीं, ये तो भविष्य बताएगा लेकिन अगर मंडल कमंडल और युवा जैसा कोई फार्मूला गढ़ लिया जाये तो ज़ाहिर है इससे बेहतर राजनैतिक फार्मूला नहीं हो सकता. युवा जेन-ज़ी की तरह सोचें और बाक़ी समाज मंडल कमंडल के हिसाब से विपक्ष के साथ आ खड़ा हो तो ये 'डेडली कॉम्बो' हो सकता है. हालांकि, ऐसा होना मुश्किल है लेकिन अगर ऐसा होता है तो ज़ाहिर है बीजेपी के लिए ये बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.
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