Shaurya Chakra Awardee Success Story: छत्तीसगढ़ पुलिस के दो जांबाज निरीक्षकों लक्ष्मण केवट और रामेश्वर प्रसाद देशमुख को देश के प्रतिष्ठित शौर्य चक्र से सम्मानित किए जाने के बाद जब वे अपने गृह क्षेत्र दुर्ग पहुंचे तो पुलिस विभाग ने उनका आत्मीय स्वागत किया. नक्सल प्रभावित इलाकों में अपने साहस, रणनीति और नेतृत्व क्षमता के लिए मशहूर इस जोड़ी को ‘राम-लक्ष्मण' की उपमा दी जाती है. दोनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कई मुठभेड़ों का नेतृत्व करते हुए 155 नक्सलियों को ढेर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उनकी इस उपलब्धि को न केवल पुलिस विभाग बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है.
दुर्ग में हुआ भव्य स्वागत, गौरव का क्षण
शौर्य चक्र से सम्मानित दोनों अधिकारियों के दुर्ग पहुंचने पर पुलिस विभाग द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया. इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस जवानों ने उन्हें बधाई देते हुए उनकी बहादुरी और सेवा भावना को सलाम किया. यह सम्मान प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रेरणा मिल रही है.

Shaurya Chakra Awardee Success Story: 'राम-लक्ष्मण' की जोड़ी
‘राम-लक्ष्मण' की जोड़ी से नक्सलियों में खौफ
लक्ष्मण केवट और रामेश्वर देशमुख की जोड़ी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष पहचान रखती है. जहां भी उनकी पोस्टिंग रही, वहां नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई. उनकी रणनीति और ऑपरेशन प्लानिंग इतनी सटीक रही कि कई बड़े नक्सली मुठभेड़ों में सफलता मिली, जिससे नक्सलवाद कमजोर पड़ा.
155 नक्सलियों के एनकाउंटर में भूमिका
दोनों अधिकारियों के नेतृत्व में दर्जनों सफल ऑपरेशन किए गए. इन अभियानों के दौरान कुल 155 नक्सलियों को मार गिराया गया, जो छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. उनकी रणनीति और टीम वर्क की सराहना वरिष्ठ अधिकारियों तक ने की.
लक्ष्मण केवट का करियर और उपलब्धियां
लक्ष्मण केवट का जन्म 1 जुलाई 1986 को मनेन्द्रगढ़ में हुआ. उन्होंने 2007 में आरक्षक के रूप में पुलिस सेवा शुरू की और मेहनत के दम पर निरीक्षक के पद तक पहुंचे. बीजापुर, राजनांदगांव और कांकेर जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में उन्होंने सेवा दी और 40 मुठभेड़ों में भाग लेकर 97 नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई की. उन्हें शौर्य चक्र के अलावा कई वीरता पदक और प्रशस्ति पत्र भी मिल चुके हैं.
रामेश्वर देशमुख का साहसिक सफर
रामेश्वर प्रसाद देशमुख का जन्म 1 अप्रैल 1986 को दुर्ग जिले में हुआ. उन्होंने 2007 में दंतेवाड़ा से अपनी सेवा शुरू की और धीरे-धीरे निरीक्षक पद तक पहुंचे. उन्होंने 25 मुठभेड़ों में सक्रिय भागीदारी की और 58 नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई. उनकी इस बहादुरी के लिए उन्हें भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.
कठिन परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य का परिचय : एसपी
दुर्ग के पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने कहा कि शौर्य चक्र जैसे सम्मान प्राप्त करना किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने कहा कि दोनों अधिकारियों ने कठिन परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य का परिचय दिया और विभाग का नाम पूरे देश में रोशन किया है. इन दोनों अधिकारियों की पहचान केवल उनके साहस से नहीं, बल्कि उनके मजबूत नेतृत्व और रणनीतिक सोच से भी बनी है. उन्होंने न केवल ऑपरेशन को सफल बनाया बल्कि अपनी टीम को भी प्रेरित किया, जिससे बड़े अभियानों में निरंतर सफलता मिली.
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