MP UCC Row: मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं और आगामी विधानसभा मानसून सत्र में विधेयक पेश किए जाने की संभावना है. लेकिन कानून बनने से पहले ही इसके कुछ प्रावधानों को लेकर सियासी और सामाजिक विवाद शुरू हो गया है. खास तौर पर लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े सुझाव फॉर्म के सवालों ने बहस को और तीखा बना दिया है. कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इन प्रावधानों का विरोध करते हुए लोगों से यूसीसी के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की अपील की है. वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस सत्र में UCC विधेयक पेश कर इसे पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
सरकार ने शुरू किया जन सुझाव अभियान
मध्यप्रदेश सरकार ने UCC को लेकर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है. इस पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक 22 जून तक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं. सरकार का उद्देश्य है कि कानून बनाने से पहले समाज के विभिन्न वर्गों की राय को शामिल किया जाए, ताकि एक संतुलित और व्यवहारिक विधेयक तैयार किया जा सके.

MP UCC Row: लिव-इन रिलेशनशिप वाला प्रावधान
Photo Credit: Ajay Kumar Patel
लिव-इन रिलेशनशिप पर सवालों ने बढ़ाया विवाद
पोर्टल पर दिए गए सुझाव फॉर्म में दो सवालों ने विवाद खड़ा कर दिया है:
- क्या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के वित्तीय और उत्तराधिकार अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए?
- क्या ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को भी भरण-पोषण और संपत्ति के अधिकार मिलने चाहिए?
इन सवालों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर पारंपरिक सामाजिक संरचनाओं में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है.
उच्चस्तरीय समिति कर रही मसौदा तैयार
सरकार ने UCC के प्रारूप को तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है. इस समिति में प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं. समिति प्रदेशभर में जाकर विभिन्न वर्गों से सुझाव ले रही है और उसी आधार पर विधेयक का मसौदा तैयार कर रही है.
आरिफ मसूद का विरोध, जनता से अपील
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इन प्रावधानों का खुलकर विरोध किया है. उन्होंने कहा किमुख्यमंत्री महाकाल की कृपा का जिक्र कर रहे हैं, लेकिन लिव इन रिलेशनशिप के लिए महाकाल की कृपा नहीं होती. इस तरह की व्यवस्था को बढ़ावा देना कोई नहीं चाहेगा. यूसीसी अब बचा ही नहीं है, क्योंकि जब एक कम्युनिटी को अलग कर दिया गया तो फिर यह कॉमन सिविल कोड कैसे हुआ.
शरीयत के कई कानून हैं, जिनका इससे उल्लंघन होगा. इसमें सिर्फ मुस्लिम समाज ही नहीं, बल्कि हर वह व्यक्ति विरोध करेगा जो संविधान और अपनी सामाजिक परंपराओं को महत्व देता है. विधानसभा सत्र में कांग्रेस इस मुद्दे का पूरी ताकत से विरोध करेगी. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी इस मामले में संज्ञान लेगा.
मुख्यमंत्री का क्या कहना है?
वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कर दिया है कि सरकार विधानसभा के इसी सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करेगी... मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया है कि बाबा महाकाल की कृपा से यह विधेयक इसी सत्र में पारित भी हो जाएगा.
यानी यूसीसी सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों की परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सामाजिक बदलाव है. सरकार इसे समान अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, तो विरोध करने वाले इसके कुछ प्रावधानों को अपनी परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों में दखल मान रहे हैं.
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