राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. 'वन स्टेट वन इलेक्शन' के तहत 2 चरणों में चुनाव होंगे. पहले चरण की वोटिंग 9 सितंबर और दूसरे चरण की वोटिंग 11 सितंबर को होगी. जबकि मतगणना 14 सितंबर को होगी. राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है. मीडिया को संबोधित करते हुए शहरी निकाय चुनाव के कार्यक्रम की जानकारी दी. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित नगरीय निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है. अब राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की गतिविधियां तेज होंगी.
27 अगस्त को जारी होगी अधिसूचना
राजस्थान में कुल एक करोड़ 44 लाख 3 हजार 853 वोटर मतदान करेंगे. इस दौरान नगर निगमों में भारत निर्वाचन आयोग की ईवीएम काम में ली जाएंगी. जबकि अन्य जिलों में राजस्थान और मध्य प्रदेश की ईवीएम के जरिए चुनाव होंगे. चुनाव की अधिसूचना 27 अगस्त को जारी होगी. निकाय प्रमुख के चुनाव के लिए चुनाव चिन्ह का आवंटन 18 सितंबर को होगा. वोटर संख्या के लिहाज से जयपुर निगम सबसे बड़ा निकाय है. जयपुर में 24 लाख 20 हजार 839 वोटर रजिस्टर्ड है. बूंदी की इंद्रगढ़ सबसे छोटी पालिका है, जहां महज 4 हजार 744 वोटर ही है.
राजस्थान के 309 निकायों में चुनी जाएंगी स्थानीय सरकार
टिकट को लेकर दावेदारियां, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और चुनावी रणनीति पर फोकस बढ़ेगा. इस चुनाव के जरिए प्रदेश के 309 नगरीय निकायों की नई स्थानीय सरकार चुनी जाएगी. नगरीय चुनाव के बाद पंचायत चुनाव कराए जाने की तैयारी है. ऐसे में निकाय चुनाव को प्रदेश में स्थानीय स्तर पर बड़े राजनीतिक शक्ति-परीक्षण के तौर पर भी देखा जा रहा है.
1.15 लाख से ज्यादा कार्मिक चुनाव ड्यूटी में
चुनाव प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए 1,15,255 कार्मिकों की नियुक्ति की जाएगी. मतदान और मतगणना दलों के गठन के लिए सॉफ्टवेयर के माध्यम से रेंडमाइजेशन किया जाएगा. चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने वाले मतदान दलों को दो स्तरीय प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. राज्य और जिला स्तर पर चुनाव नियंत्रण कक्ष यानी कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे. इनके जरिए चुनाव से संबंधित सूचनाओं, शिकायतों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर निगरानी रखी जाएगी. चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी.
उम्मीदवारों के खर्च की सीमा तय
आयोग ने प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा भी तय की है. इसके अनुसार नगर निगम पार्षद 3.50 लाख रुपये, नगर परिषद पार्षद 2.50 लाख रुपये और नगरपालिका सदस्य 1.50 लाख रुपये तक चुनाव खर्च कर सकेंगे. चुनाव खर्च का पूरा विवरण निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत करना होगा. आयोग ने दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं. मतदान केंद्रों पर जरूरत के मुताबिक सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही मतदाताओं की सहायता के लिए Voter Assistance Booth भी स्थापित किए जाएंगे.
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