अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पाकिस्तान की नींदें उड़ा दी थीं. 88 घंटे तक चले इस भीषण सैन्य संघर्ष के दौरान भारतीय सेना ने दुश्मन को उसकी असली जगह दिखा दी थी. आखिरकार घबराए पाकिस्तान को फोन उठाकर सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी. लेकिन हर किसी के मन में यह सवाल जरूर कौंधता है कि क्या होता अगर पाकिस्तान उस वक्त बाज नहीं आता? अगर युद्ध नहीं रुकता, तो भारतीय ना की आगे की प्लानिंग क्या थी? और खासकर इंडियन एयरफोर्स क्या करने वाली थी?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इंडियन एयरफोर्स के वाइस चीफ रहे एयर मार्शल नागेश कपूर (रिटायर) ने एनडीटीवी के पॉडकास्ट CtrlAltDefence में इस प्लान के बारे में बता दिया है. उन्होंने एनडीटीवी को ये प्लान हाल ही में रिलीज हुई डॉक्यूसीरीज 'डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' के सामने आने से पहले बताई थी.
वरिष्ठ पत्रकार विष्णु सोम और शिव अरूर के साथ बातचीत में भारतीय वायुसेना के पूर्व वाइस चीफ और साउथवेस्ट एयर कमांड के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने साफ कर दिया है कि अगर पाकिस्तान पीछे नहीं हटता, तो उसका हश्र ऐसा होता जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी.
'एस्केलेशन लैडर' पर वायुसेना की पूरी तैयारी
जब एयर मार्शल नागेश कपूर से पूछा गया कि अगर पाकिस्तान सीजफायर की अपील नहीं करता तो वायुसेना का अगला कदम क्या होता? इसके जवाब में उन्होंने बड़ी बेबाकी से भारतीय वायुसेना की खुफिया और आक्रामक प्लानिंग का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि वायुसेना ने 'एस्केलेशन लैडर' की पूरी रूपरेखा तैयार कर रखी थी.
पहले दिन का मकसद सिर्फ और सिर्फ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करना था, जो वायुसेना ने बखूबी किया. भारत का साफ संदेश था कि हमारा काम हो गया है और अगर पाकिस्तान बात को यहीं खत्म कर दे, तो हम आगे नहीं बढ़ेंगे. लेकिन वायुसेना के कमांडर्स यह भली-भांति जानते थे कि पाकिस्तान अपनी अवाम को मुंह दिखाने के लिए कोई न कोई जवाबी कार्रवाई जरूर करेगा. इसके लिए भारत की तैयारियां पूरी थीं.
एयर मार्शल नागेश कपूर ने बताया असली 'प्लान'
इस दौरान एयर मार्शल नागेश कपूर ने दुश्मन के होश उड़ा देने वाली उस प्लानिंग का जिक्र करते हुए कहा, "हम एस्केलेशन लैडर के लिए पूरी तरह तैयार थे. अगर वे (पाकिस्तान) नहीं रुकते, तो हम SEAD (Suppression of Enemy Air Defenses) या DEAD ( Destruction of Enemy Air Defenses) मिशन को अंजाम देते. इसके बाद हम उनके 'वैल्यू टारगेट्स' पर हमला करते. मेरा मतलब है कि हम उन एसेट्स को निशाना बनाते जिससे भारी कमर्शियल नुकसान होता. हम उनके पावर प्लांट्स और बुनियादी ढांचों पर बम बरसाते. हम उन वैध सैन्य लक्ष्यों को तबाह कर देते जो सीधे तौर पर उनकी युद्ध लड़ने की मशीनरी को चला रहे थे."
दुश्मन की कमर तोड़ने की थी पूरी रणनीति
इस बयान से एकदम साफ है कि भारतीय वायुसेना केवल बॉर्डर पार के एयरबेस या आतंकी कैंपों तक ही रुकने वाली नहीं थी. अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता, तो वायुसेना उसके ऊर्जा संसाधनों (पावर प्लांट्स) और अहम बुनियादी ढांचों को राख में मिला देती. इससे पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था और वॉर-मशीनरी ठप पड़ जाती.
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