- उत्तराखंड के ओम पर्वत से एक बार बर्फ फिर गायब हो गई है.
- बर्फ कम होने से पर्वत पर दिखने वाली ॐ की आकृति धुंधली पड़ गई है.
- जानकर इसे पर्यावरण में बदलाव का असर मान रहे हैं.
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में 6000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ओम पर्वत पर बर्फ फिर से पिगल गई है. जिससे यहां बनने वाले प्राकृतिक 'ॐ' का स्वरूप भी धुंधला दिख रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि 2024 में भी ओम पर्वत से कुछ समय के लिए बर्फ पूरी तरह गायब हो गई थी. जिससे ॐ की आकृति दिखना भी बंद हो गई थी. इस घटना को लेकर विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने कम बर्फबारी, बढ़ते तापमान, वाहनों के प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे कारणों पर चिंता जताई थी. ऐसे में इस बार भी ओम पर्वत से बर्फ के गायब होने से क्या हिमालय कोई बड़ा संकेत दे रहा है.
हिमालय की अद्भुत चोटी ओम पर्वत
करीब छह हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित ओम पर्वत हिमालय की उन अद्भुत चोटियों में शामिल है, जहां बर्फ के जमने से प्राकृतिक रूप से 'ॐ' की आकृति बनती है. यही आकृति इस पर्वत को धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी खास बनाती है. लेकिन बार-बार बर्फ का गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है, सब के मन में यही सवाल है कि क्या यह केवल मौसम में बदलाव का असर है या फिर हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता तापमान, कम बर्फबारी, मानवीय गतिविधियां और पर्यावरणीय दबाव इसके पीछे बड़ी वजह हैं. पिछले साल भी जब इसी तरह की स्थिति बनी थी तब विशेषज्ञों ने इसे जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान से जोड़कर चिंता जताई थी. हालांकि बाद में बर्फबारी होने पर ओम की आकृति दोबारा दिखाई देने लगी थी.

क्या पर्यावरण में हो रहे बदलाव का असर
ओम पर्वत से बर्फ का बार-बार गायब होना कही हिमालयी पर्यावरण में हो रहे बदलावों का इशारा तो नहीं है. जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में हिमालय के ऊपरी हिस्सों में सर्दियों के मौसम के दौरान होने वाली बर्फबारी और प्री मानसून में गिरावट दिखी है. इसके अलावा वैज्ञानिकों का कहना है कि वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी का असर भी पहाड़ों पर तेजी से होता है. ऊंचाई बढ़ने के साथ पहाड़ों पर सूरज की तपिश और रेडिएशन का असर बढ़ रहा है, जिससे मौसमी बर्फ टिक नहीं पा रही है.

हिमालय के जलस्रोतों पर पड़ सकता है असर
हालांकि केवल इस घटना के आधार पर इसे सीधे 'ग्लोबल वार्मिंग का प्रमाण' कहना भी वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा. इसके पीछे स्थानीय मौसम, तापमान, बर्फबारी की मात्रा और कई अन्य प्राकृतिक कारण भी हो सकते हैं. लेकिन विशेषज्ञों की चिंता को देखते हुए इस बदलाव का वैज्ञानिक अध्ययन जरूर जरूरी है. लेकिन सवाल यह है कि अगर हिमालय की चोटियों से बर्फ इसी तरह कम होती रही, तो इसका असर सिर्फ एक पर्वत की खूबसूरती पर नहीं, बल्कि आने वाले समय में हिमालय के जलस्रोतों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ सकता है.
इनपुट-गोविंद
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