World Meditation Day MP Police Yoga Meditation: मध्य प्रदेश में वर्ल्ड मेडिटेशन दिवस (World Meditation Day) के मौके पर पुलिस (MP Police) विभाग की ओर से बड़े स्तर पर योग और ध्यान कार्यक्रम आयोजित किए गए. प्रदेशभर में 50 हजार से अधिक पुलिस कर्मियों ने योग और ध्यान में भाग लिया. यह आयोजन लगभग 2800 स्थानों पर एक साथ किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों और जवानों ने मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) और आत्मिक संतुलन पर ध्यान केंद्रित किया. डीजीपी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से नियमित रूप से ध्यान और योग को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया. साथ ही उन्होंने इस पहल के प्रभाव का निष्पक्ष मूल्यांकन करने का सुझाव भी दिया, ताकि भविष्य में इसे और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके.
पुलिस की तनावपूर्ण ड्यूटी को देखते हुए पहल : DGP
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस बल की ड्यूटी 24 घंटे की होती है और यह स्वभाविक रूप से तनावपूर्ण होती है. ऐसे में योग और ध्यान जैसी गतिविधियां कर्मियों को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और संतुलित जीवन की ओर प्रेरित करती हैं. उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में हार्टफुलनेस संस्थान के साथ हुए एमओयू के बाद प्रदेश की पुलिस इकाइयों में योग और ध्यान को नियमित गतिविधि के रूप में अपनाया गया है. डीजीपी मकवाणा के अनुसार इस पहल के सकारात्मक नतीजे अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं. पुलिस कर्मियों के ऊर्जा स्तर में वृद्धि हुई है, उनके व्यवहार में सुधार देखने को मिला है और पारिवारिक संबंधों में भी मजबूती आई है. इसके अलावा तनाव के स्तर में कमी दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि कई पुलिसकर्मियों ने नकारात्मक आदतों, विशेष रूप से नशा छोड़ने की दिशा में भी गंभीर प्रयास किए हैं.
हार्टफुलनेस ध्यान पद्धति पर विशेषज्ञों की बात; मन के संस्कार और ‘क्लीनिंग' प्रक्रिया
कार्यक्रम में हार्टफुलनेस संस्थान के मार्गदर्शक कमलेश पटेल (दाजी) ने ध्यान पद्धति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि हार्टफुलनेस ध्यान अन्य प्रणालियों से अलग है, जिसमें प्राण ऊर्जा के माध्यम से साधक की चेतना को उच्च स्तर तक विकसित करने का प्रयास किया जाता है. कमलेश पटेल ने कहा कि दैनिक जीवन में व्यक्ति के मन पर अनुभवों, विचारों और भावनाओं के अनेक संस्कार जमा हो जाते हैं, जिससे मानसिक असंतुलन और तनाव उत्पन्न होता है. हार्टफुलनेस में अपनाई जाने वाली “क्लीनिंग” प्रक्रिया के जरिए इन नकारात्मक प्रभावों को धीरे‑धीरे दूर कर मन को हल्का और संतुलित बनाया जाता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि समाज और परिस्थितियों के कारण व्यक्ति कई प्रकार की मानसिक पीड़ाओं से घिर जाता है. ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति इन सीमाओं से बाहर आकर अधिक स्वतंत्र, सकारात्मक और संतुलित सोच विकसित कर सकता है. नियमित ध्यान अभ्यास भावनात्मक संतुलन को बेहतर बनाता है और अनावश्यक मानसिक दबाव को कम करता है.
बच्चों के लिए भी विशेष कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान Brighter Minds पहल का भी उल्लेख किया गया. यह कार्यक्रम बच्चों के मस्तिष्क विकास, एकाग्रता और आत्मविश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. इसके तहत बच्चों को विशेष तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिनसे उनकी स्मरण शक्ति, ध्यान क्षमता और सीखने की गति में सुधार होता है. अब तक इस कार्यक्रम में करीब 3000 बच्चे भाग ले चुके हैं.
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