उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में होटल कारोबारी आलोक राय के बेटे विनीत राय की हत्या का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. पुलिस एनकाउंटर में मारे गए मुख्य आरोपी कमलेश चौधरी उर्फ कमलेश बिंद के भाई संजय बिंद की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. जिसमें जिला प्रशासन की तरफ से जारी किए गए ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती दी गई है. गाजीपुर प्रशासन की तरफ से यह नोटिस जारी किया गया था.
गाजीपुर एसडीएम ने जारी किया नोटिस
दरअसल, गाजीपुर के एसडीएम सदर ने बगैर नक्शा स्वीकृत कराए बनाए गए अवैध निर्माण को गिराने के लिए नोटिस जारी किया था. यह नोटिस संजय बिंद के साथ-साथ तीन अन्य आरोपी शंकर पांडेय, सोनू यादव और एक अन्य आरोपी को भी जारी किया गया है. सभी आरोपियों प्रशासन ने 12 जून 2026 तक जवाब मांगा है. संतोषजनक जवाब न मिलने पर बुलडोजर एक्शन की कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई है. हालांकि उससे पहले ही संजय बिंद की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है.
संजय बिंद ने प्रशासन पर लगाया आरोप
याचिका लगाने वाले संजय बिंद का आरोप है कि पुलिस उसके भाई कमलेश को तीन जून को बिहार से उठाकर लाई और 4 जून को उसका फर्जी एनकाउंटर कर दिया गया. याचिका में आरोप लगाया गया है कि कमलेश के परिजन पुलिस एनकाउंटर पर सवाल न उठाएं, इसलिए दबाव डालने के लिए प्रशासन की तरफ से ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया गया है. याचिका संजय बिंद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने की बात भी कही है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सिर्फ एफआईआर के आधार पर बुलडोजर एक्शन नहीं किया जा सकता है. उन्होंने दावा किया है कि कमलेश बिंद के एनकाउंटर मामले में सीबीआई जांच की मांग परिजनों ने मांग उठाई है, इसलिए प्रशासन दबाव डालने के लिए यह तरीका अपना रहा है. याचिका में यह नोटिस रद्द करने की मांग की गई है.
पुलिस एनकाउंटर में हुई थी कमलेश बिंद की मौत
बता दें कि गाजीपुर में होटल कारोबारी विनीत राय की हत्या के मामले में आरोपी कमलेश बिंद की पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई थी. इसके बाद सैकड़ों की संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इस दौरान कुछ पुलिसवाले भी घायल हुए थे. इस मामले में यूपी के कैबिनेट मंत्री डॉ संजय निषाद भी कमलेश बिंद के एनकाउंटरपर सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने सीएम योगी से मिलकर जांच की मांग भी की है.
कानून अपना काम कर रहा है: गाजीपुर जिलाधिकारी
गाजीपुर के जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला का भी मामले में बड़ा बयान सामने आया है. उनका कहना है कि जांच के दौरान विनियमित क्षेत्र में बने कुछ निर्माण कार्यों में आरबीओ एक्ट का उल्लंघन पाया गया है. किसी भी भवन निर्माण के लिए संबंधित प्राधिकरण से नक्शे और निर्माण की स्वीकृति आवश्यक होती है. अगर बिना अनुमति निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. डीएम अनुपम शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. किसी भी अपराधी का कोई खास नहीं होता, कानून अपना काम कर रहा है. मामले को जातीय रंग देने या सामाजिक संघर्ष पैदा करने का प्रयास किया गया तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा. जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में हो रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. वहीं पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से आरोपियों के नेटवर्क और उनकी संपत्तियों की भी जांच तेज कर दी गई है.
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