MP Excise Constable Recruitment: यह नकल पर्ची वाली नहीं थी. यह फुसफुसाकर उत्तर बताने वाली भी नहीं थी. यह थी कंप्यूटर स्क्रीन, मॉनिटर, CCTV, लॉग टाइम, और “हाई स्ट्राइक रेट” के बीच बुनी गई एक ऐसी कथित साजिश, जिसे पढ़ते हुए मामला किसी भर्ती परीक्षा से ज्यादा एक डिजिटल थ्रिलर जैसा लगता है.
आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा में मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ESB की जांच ने 12 अभ्यर्थियों को घेरे में लिया है. आरोप है कि रतलाम के एक परीक्षा केंद्र पर इन उम्मीदवारों को तकनीकी छेड़छाड़, मॉनिटर बदलने, संदिग्ध सिस्टम चेकिंग, असामान्य प्रश्न-पैटर्न और अचानक तेज़ी से सही जवाब भरने के जरिए अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई. ESB ने इसे महज संदेह नहीं माना, बल्कि उम्मीदवारी निरस्त कर दी और उसके बाद मामला जीरो FIR तक पहुंच गया.
कहानी का सबसे डरावना हिस्सा यह है कि लगभग हर केस में पैटर्न मिलता-जुलता है. उम्मीदवार के बैठने से ठीक पहले मॉनिटर बदला गया. पहले 10 से 15 मिनट में सारे प्रश्न देख लिए गए. फिर अचानक जवाबों की रफ्तार ऐसी बढ़ी जैसे किसी ने खेल की स्क्रिप्ट पहले ही लिख दी हो.
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल पहले कुख्यात व्यापम लेकिन परीक्षाओं को लेकर पैटर्न वही, आबकारी आरक्षक भर्ती 2024 अब एक ऐसे डिजिटल घोटाले में बदलती दिख रही है, जिसने व्यापमं और पटवारी परीक्षा जैसे पुराने कांडों की याद ताज़ा कर दी है. ESB की ही आईटी टीम ने एआई टूल, CCTV फुटेज और डेटा एनालिसिस के जरिए एक कथित हाई-प्रोफाइल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसका मकसद सरकारी नौकरी दिलाने का संगठित खेल बताया जा रहा है.
जांच में सामने आया कि इन 12 उम्मीदवारों ने परीक्षा के शुरुआती हिस्से में प्रश्नों को केवल स्क्रॉल किया, जैसे पूरा पेपर पहले देख रहे हों. फिर अंतिम 20 मिनट में अचानक जवाबों की बौछार हुई. यही वह पैटर्न था जिसे ESB के TBA विश्लेषण में “हाई स्ट्राइक रेट” के रूप में चिन्हित किया गया. जांचकर्ताओं का दावा है कि यह कंप्यूटर कम्प्रोमाइजेशन की सुनियोजित रणनीति हो सकती है दूसरे स्क्रीन पर प्रश्न देखे गए, बाहर से उत्तर बताए गए और फिर अंतिम क्षणों में तकनीकी सहयोग के साथ भर दिए गए.
Excise Constable Recruitment Madhya Pradesh: ESB का दावा यह संयोग नहीं, पैटर्न है
ESB की रिपोर्ट जो एनडीटीवी के पास मौजूद है उसके मुताबिक, परीक्षा के बाद डेटा और CCTV फुटेज के सांख्यिकीय विश्लेषण में 12 अभ्यर्थियों की गतिविधियां असामान्य पाई गईं. आरोप है कि परीक्षा केंद्र के भीतर कंप्यूटर सिस्टम और मॉनिटर से छेड़छाड़ कर उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई. रिपोर्ट में बार-बार एक ही बात सामने आती है. मॉनिटर बदलना, प्रवेश से पहले तकनीकी गतिविधि, बीच परीक्षा सिस्टम चेक, और उत्तर देने का अस्वाभाविक पैटर्न.
यानी कहानी सिर्फ अभ्यर्थियों की नहीं है. कहानी उस दूसरे व्यक्ति की भी है, जो कथित तौर पर स्क्रीन के पीछे खेल चला रहा था.
केस 1 आशुतोष
भिंड के रहने वाले आशुतोष के मामले में दावा है कि उसके लैब में प्रवेश करने से कुछ मिनट पहले ही उसके सिस्टम का मॉनिटर बदल दिया गया. CCTV में ब्लैक फ्लिकर जैसा दृश्य भी दर्ज बताया गया. इसके बाद TBA पैटर्न में पहले सवालों को तेजी से देखा गया और फिर उत्तर दर्ज होने लगे. जांच एजेंसी के लिए यही शुरुआती संकेत था कि यह सामान्य टेस्ट-टेकिंग नहीं लगती.
केस 2 विवेक शर्मा
मुरैना के विवेक शर्मा के बारे में रिपोर्ट कहती है कि उसकी निर्धारित सीट तक पहुंचने से पहले ही उसका मॉनिटर बदल चुका था. इसके बाद जो पैटर्न सामने आया, वह और ज्यादा चौंकाने वाला था. पहले 15 मिनट में सारे प्रश्न देख लिए गए. जांचकर्ताओं के मुताबिक, भर्ती परीक्षा में यह व्यवहार सामान्य नहीं माना जाता, खासकर तब, जब उसके बाद उत्तर दर्ज करने की गति अस्वाभाविक हो.
केस 3 कुलदीप
सोनीपत हरियाणा के कुलदीप के मामले में भी आरोप है कि रजिस्ट्रेशन और वास्तविक लैब एंट्री के बीच उसके सिस्टम पर तकनीकी छेड़छाड़ हुई. ESB का कहना है कि इसी अंतराल में मॉनिटर बदला गया. फिर वही पैटर्न. शुरुआती मिनटों में सारे प्रश्न देखना. जैसे किसी को पहले पूरा नक्शा दिखाया गया हो, फिर रास्ता तय कराया गया हो.
केस 4 सुभाष सिंह
भिंड जिले के सुभाष सिंह के केस में कहानी और ज्यादा रोमांचक हो जाती है. आरोप है कि उसके प्रवेश से पहले मॉनिटर बदला गया. परीक्षा के दौरान कुछ समय पर वह अपनी सीट पर नहीं पाया गया. और फिर TBA पैटर्न में दिखा कि शुरुआती हिस्से के बाद Q4 से Q7 तक अचानक हाई स्ट्राइक रेट आ गया. पहले धीमी चाल, फिर अचानक निशाने पर सटीक वार.
केस 5 दयाशंकर कुशवाह
मुरैना के दयाशंकर के मामले में कहा गया कि उसके पहुंचने से पहले मॉनिटर बदल दिया गया था. फिर Q1 और Q2 में सभी प्रश्न तेजी से देखे गए, और उसके बाद Q4 में हाई स्ट्राइक रेट दिखा. यह पैटर्न जांचकर्ताओं के लिए संकेत बना कि उत्तर देने की रणनीति सामान्य नहीं थी.
केस 6 रवि कुमार
आगरा के रवि कुमार का केस सबसे ज्यादा फिल्मी लगता है. पहले कुछ प्रश्नों में उसकी गति सामान्य से भी धीमी रही, लो स्ट्राइक रेट. लेकिन अचानक बाद के हिस्से में Q4 से Q7 तक हाई स्ट्राइक रेट उभर आया. पहले संघर्ष, फिर अचानक धारदार सटीकता. ऐसा कैसे.
केस 7 अनिल कुमार
भिंड के अनिल कुमार के मामले में CCTV समय में गड़बड़ी और एक कथित वीडियो कॉल लिंक्ड अनियमितता जैसा पैटर्न दर्ज हुआ. इसके बाद Q3 से Q6 तक हाई स्ट्राइक रेट सामने आया. यहां आरोप सिर्फ सिस्टम छेड़छाड़ का नहीं, बल्कि संभावित बाहरी समन्वय का संकेत भी देता है.
केस 8 शैलेंद्र बोहरे
भिंड के ही शैलेंद्र बोहरे के मामले में मॉनिटर उसके बैठने से ठीक पहले बदल गया. फिर परीक्षा के बीच वह लैब से बाहर गया, वापस लौटा, और उसके तुरंत बाद IT व्यक्ति द्वारा सिस्टम चेक किया गया. रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि उसे 88 अंक मिले. उम्मीदवार की मूवमेंट और तकनीकी गतिविधि एक ही फ्रेम में दिखाई देती है.
केस 9 अंकित सिंह
भिंड के अंकित सिंह के मामले में प्रवेश से पहले मॉनिटर बदला गया. इसके बाद Q1 All Visited जैसा पैटर्न सामने आया. फिर हाई स्ट्राइक रेट. रिपोर्ट के मुताबिक उसे 86 अंक मिले. जांच एजेंसी यही पूछ रही है कि यह तैयारी थी या पहले से तय खेल.
केस 10 संजीत
जिंद हरियाणा के संजीत के मामले में बैठने से पहले लगातार मॉनिटर चेकिंग हुई. फिर आखिरी मिनट में मॉनिटर बदल दिया गया. इसके बाद उसने भी पहले सभी प्रश्न देखे. जैसे हर बार मंच सजाया जाता हो, फिर उम्मीदवार अंदर आता हो.
केस 11 पुष्पेंद्र
भिंड के पुष्पेंद्र के मामले में Q1, Q7 और Q8 में उत्तर नहीं दिए गए, लेकिन Q2 से Q6 तक हाई स्ट्राइक रेट दर्ज हुआ. यह सीधी लाइन में चलने वाला पेपर नहीं था. यह चुनिंदा हिस्सों में अचानक दक्षता उभरने वाला पैटर्न था.
केस 12 आशु गुप्ता
आशु गुप्ता भी भिंड का रहने वाला है उसके मामले में CCTV समय में तकनीकी गड़बड़ी दर्ज है, लेकिन उसके सिस्टम से जुड़ी गतिविधियां संदिग्ध बताई गईं. मॉनिटर बदलने और बाद में तकनीकी व्यक्ति की मौजूदगी जैसे संकेत दर्ज हैं. रिपोर्ट में उसके 85 अंक का भी उल्लेख है. यहां सिर्फ अभ्यर्थी नहीं, सिस्टम की विश्वसनीयता भी सवालों में है.
जीरो FIR में दर्ज शिकायत के मुताबिक ESB ने परीक्षा के बाद डेटा, CCTV और अन्य तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पाया कि रतलाम पब्लिक स्कूल केंद्र से जुड़े इन 12 उम्मीदवारों की गतिविधियां असामान्य थीं. मामले में प्रणीत सिजरिया, प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट, ESB की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है और फिर मामले को क्षेत्राधिकार के कारण रतलाम ट्रांसफर किया गया.
FIR में कहा गया है कि एक दूसरा शख्स भी परीक्षा में अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने का प्रयास करते CCTV में दिखाई दिया. इसी आधार पर 12 अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी निरस्त की गई और पुलिस कार्रवाई की अनुशंसा की गई.
अगर ESB के आरोप सही हैं, तो यह मामला कुछ छात्रों की चालाकी भर नहीं है. यह एक ऐसा कथित ऑपरेशन लगता है, जहां सीट पर बैठने से पहले स्क्रीन सेट की गई उम्मीदवार के आने से पहले मॉनिटर बदला गया बीच परीक्षा तकनीकी स्टाफ की हलचल दिखी. कई उम्मीदवारों ने पहले सारे सवाल स्कैन किए और फिर जवाब ऐसे आए जैसे किसी ने अंदर ही अंदर दिशा दे दी हो. नकल अब जेब में छिपे कागज से निकलकर डिजिटल स्क्रीन के पीछे पहुंच चुकी है.
सबसे बड़ा सवाल यही है. क्या यह कुछ अभ्यर्थियों की हरकत है या भर्ती सिस्टम के भीतर कोई बड़ा खेल चल रहा है. इस बार कहानी क्लासरूम की नहीं है. यह कंप्यूटर स्क्रीन की रोशनी में लिखी गई है.
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